रांची : को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले पर पर्दा डालने की कवायद शुरू

Updated at : 06 Sep 2018 6:36 AM (IST)
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रांची : को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले पर पर्दा डालने की कवायद शुरू

रांची : करोड़ों रुपये के को-ऑपरेटिव घोटाले पर पर्दा डालने की कवायद शुरू हो गयी है. इसके तहत रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी बैंक के सीइओ को ही सौंप दी है. जबकि बैंक घोटाले में बैंक के सीइओ को भी दोषी पाया गया है. घोटाले की जांच के बाद कृषि […]

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रांची : करोड़ों रुपये के को-ऑपरेटिव घोटाले पर पर्दा डालने की कवायद शुरू हो गयी है. इसके तहत रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी बैंक के सीइओ को ही सौंप दी है. जबकि बैंक घोटाले में बैंक के सीइओ को भी दोषी पाया गया है. घोटाले की जांच के बाद कृषि पशुपालन एवं सहकारिता सचिव ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने और तीन अधिकारियों को बर्खास्त करने की अनुशंसा की थी. पर अब तक किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी है.
अनुशंसा करने के बाद भी दोषियों के खिलाफ नहीं की गयी है कार्रवाई
कार्रवाई के लिए सीइओ को पत्र लिखा, जबकि वे भी हैं आराेपी
मालूम हो कि को-ऑपरेटिव घोटाले की जांच के बाद विभागीय सचिव पूजा सिंघल ने दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की. इससे संबंधित फाइल रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव को भेजी गयी. रजिस्ट्रार ही को-ऑपरेटिव बैंक के प्रशासक भी होते हैं.
पर रजिस्ट्रार ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बदलेे खुद को ही(प्रशासक) कार्रवाई करने के लिए चिट्ठी लिखी. इसके बाद यह फाइल काफी दिनों तक उन्हीं के पास प्रशासक के रूप में पड़ी रही. बाद में हंगामा होने पर उन्होंने विभागीय सचिव की अनुशंसा के आलोक में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने के लिए बैंक के सीइओ को ही पत्र लिख दिया.
जबकि बैंक के सीइओ ब्रजेश्वर नाथ भी बैंक घोटाले में दोषी पाये गये थे और सचिव ने उनके खिलाफ भी कार्रवाई की अनुशंसा की थी. इस तरह को-ऑपरेटिव घोटाले में दोषी व्यक्तियों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी दोषी अधिकारी को ही सौंप दी गयी. इससे दोषी अफसरों पर कार्रवाई का मामला एक महीने से लंबित है.
सीइओ को किस मामले में पाया गया था दोषी
ब्रजेश्वर नाथ को लोन मैनुअल के खिलाफ करोड़ों का लोन देने, चेक बुक प्रिंटिंग में गड़बड़ी और रिटायर्ड कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए दोषी पाया गया है.
बोकारो के प्रभारी अंकेक्षण पदाधिकारी संदीप सेन को गुमला सिमडेगा बैंक में कर्मचारियों की सेवा गलत तरीके से नियमित करने के लिए दोषी पाया गया था. इस मामले के प्रकाश में आने और बैंक में आमेलन का काम पूरा होने के बाद सेन को बैंक से हटा दिया गया था. पर तीन चार दिनों के बाद ही उन्हें फिर से बैंक में पदस्थापित करने की कोशिश की जा रही है. को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले की जांच के बाद सचिव ने उमेश सिंह, बीके नारायण और कुंज बिहारी प्रसाद को बर्खास्त करने की अनुशंसा की थी.
पर यह मामला भी सीइओ के पास पड़ा हुआ है. उल्लेखनीय है कि को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले की जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद बैंक के ब्रजेश्वर नाथ(सीइओ), परितोष पाठक ( परियोजना प्रबंधक), संजय कुमार सिंह( तकनीकी प्रबंधक), मुकेश कुमार(प्रबंधक), सुनील कुमार(प्रबंधक) सुशीला मिंज( सहायक प्रबंधक), संदीप सेन( जिला अंकेक्षण पदाधिकारी) , विजय कुमार सिंह( पूर्व प्रशासक), मनोज लाल नाथ शाहदेव( क्षेत्रीय प्रबंधक), सुनील कुमार सत्पति( शाखा प्रबंधक) सहित अन्य अधिकारियों को दोषी पाया गया था.
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