26 किसानों को इजराइल के लिए रवाना करते हुए सीएम ने कहा, उन्नत तकनीक, उन्नत किसान झारखंड की अब नयी पहचान

Updated at : 27 Aug 2018 8:18 AM (IST)
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26 किसानों को इजराइल के लिए रवाना करते हुए सीएम ने कहा, उन्नत तकनीक, उन्नत किसान झारखंड की अब नयी पहचान

रांची : उन्नत तकनीक, उन्नत किसान झारखंड की अब नयी पहचान. झारखंड से 26 किसानों के दल को इजराइल की यात्रा पर रवाना करते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यह बात कही. मुख्यमंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि रक्षाबंधन के पवित्र दिन किसानों की आय वृद्धि की रक्षा का संकल्प के साथ […]

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रांची : उन्नत तकनीक, उन्नत किसान झारखंड की अब नयी पहचान. झारखंड से 26 किसानों के दल को इजराइल की यात्रा पर रवाना करते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यह बात कही.
मुख्यमंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि रक्षाबंधन के पवित्र दिन किसानों की आय वृद्धि की रक्षा का संकल्प के साथ आप इजराइल जा रहे हैं. वहां की उन्नत तकनीक के साथ वहां के किसानों के अनुभवों को जानने और सीखने पर अपना पूरा समय दें और उन अनुभवों को अपनी खेती में उतारें.
साथ ही राज्य के अन्य किसानों को भी इन अनुभवों का लाभ दें. उन्होंने कहा कि झारखंड से भी क्षेत्रफल में छोटा देश होते हुए भी इजराइल अपने कृषि पैदावार के बल पर राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय में भारत से भी आगे है. जहां अच्छा हो रहा है, उससे हमेशा ही सबक लेना चाहिए और उसी को अपने जीवन में उतारना चाहिए. इस भावना से ही हमारे किसान इजराइल जा रहे हैं.
झारखंड खाद्यान्न की आपूर्ति में आज पीछे है. परंतु वह दिन दूर नहीं, जब झारखंड न केवल आत्मनिर्भर होगा बल्कि देश के अन्य राज्यों को भी खाद्यान्न उपलब्ध करायेगा. किसानी या खेती के अर्थ को भी व्यापक रूप से लेने की आवश्यकता है. इसमें केवल खेती नहीं बल्कि मत्स्य पालन, पशुपालन, बागवानी इत्यादि सब सम्मिलित है. किसानों का अपना एफपीओ फ़ूड प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन बने, जिसके किसान ही मालिक हों.
किसानों ने कहा : झारखंड को कृषि के क्षेत्र में आगे ले जायेंगे
किसानों ने मुख्यमंत्री से अपनी उम्मीद और अपेक्षाओं को लेकर बात की. किसान मो अब्दुल कय्यूम ने कहा कि हम वहां के अनुभवों का लाभ लेकर झारखंड को कृषि के क्षेत्र में पूरे देश में सबसे आगे ले जायेंगे. गंदुरा उरांव ने कहा कि हमने कभी सोचा भी नहीं था कि हम इजराइल जाकर सीखेंगे.
नमन टोपनो ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी हो, इसके लिए मुख्यमंत्री जो प्रयास कर रहे हैं वह जरूर पूरा होगा. इस अवसर पर कृषि सचिव पूजा सिंघल ने कहा कि चार दिनों तक किसान इजराइल में डेयरी फार्म, फलों और सब्जियों के पैदावार, ड्रिप इरिगेशन का कार्य देखेंगे तथा वहां के किसानों से वार्ता करेंगे. साथ ही उनके और अपने अनुभवों को साझा करेंगे.
पहली बार जा रहे हैं विदेश झारखंड को होगा फायदा
रांची : इजराइल जानेवाले किसानों को बीएयू के कुलपति डॉ पी कौशल ने संस्थान में तैयार होनेवाली तकनीक की जानकारी दी. बीएयू के कृषक भवन में एक-एक किसानों से बात की गयी. उनको बताया कि अपने देश में भी बहुत टेक्नोलॉजी है, लेकिन विदेश में लोग कैसे अपनी तकनीक का उपयोग लगन से करते हैं, यह समझने की जरूरत है. वहां से लौटने के बाद आपलोगों काे झारखंड के किसानों का ब्रांड एंबेसडर बनना है.
जो किसान इजराइल गये : रांची से गंदुरा उरांव, श्याम सुंदर बेदिया और एसएस बनर्जी, गुमला से रंजीत प्रसाद, सिमडेगा से नमन टोपनो, लोहरदगा से राज किशोर महतो, पश्चिमी सिंहभूम से पंकज कुमार गोंड, सरायकेला से राधाकृष्ण केवट, लातेहार से राजेंद्र यादव, दुमका से जय प्रकाश मंडल, जामताड़ा से शंकर भंडारी, साहेबगंज से नीरज हेम्ब्रम, पाकुड़ से अभिनव किशोर, खूंटी से रामानंद साहू, गढ़वा से सतीश कुमार तिवारी, पलामू से रंजीत कुमार सिंह, हजारीबाग से फुलेश्वर महतो, रामगढ़ से रचिया महतो, धनबाद से अब्दुल कयूम अंसारी, चतरा से मोहन प्रजापति, कोडरमा से अजय साव, गिरिडीह से संतोष कुमार वर्मा, बोकारो से खुश मोहम्मद अंसारी, देवघर से वकील प्रसाद यादव और गोड्डा से प्रीतम कुमार इजराइल गये हैं.
इजराइल जानेवाले किसानों ने कहा
इजराइल जाने से पूर्व गुमला के किसान रंजीत प्रसाद ने बताया कि देश के विभिन्न कोने में तकनीक देखने का मौका मिला है. पहली बार विदेश जा रहे हैं. वहां की तकनीक को झारखंड में उतारने की कोशिश करेंगे. रंजीत गुमला में चार एकड़ जमीन पर सब्जी की खेती करते हैं.
सरायकेला के राधाकृष्ण केवट ने कहा कि वहां मछली उत्पादन में इस्तेमाल की जानेवाली तकनीक सीखने की कोशिश करेंगे. झारखंड में कई प्रकार की मछलियों की प्रजाति को मैंने लाया है. फंगेश्यिस यहां मैंने ही लाया था. अब यह पूरे राज्य में फैल गया है. वहां से लौटने के बाद अन्य किसानों को भी तकनीक की जानकारी देंगे.
चतरा के मोहन प्रजापति करीब पांच एकड़ जमीन पर खेती करते हैं. पिछले तीन-चार वर्षों से मूंग की खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि चतरा अब मूंग की खेती के लिए जाना जाने लगा है. आनेवाले समय में कम पानी में खेती की तकनीक पर काम करेंगे..
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