रांची : भाजपा का पलटवार, गूगल के बिना 10 एसटी समूह का नाम नहीं बता सकते डॉ अजय
Updated at : 26 Aug 2018 7:41 AM (IST)
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कांग्रेस और झामुमो की सरकार स्थानीय व नियोजन नीति नहीं बना पायी रांची : भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रेस वार्ता में कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार को आदिवासी शब्द का अ भी नहीं पता है और वह बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं. डॉ अजय गूगल के बिना 10 […]
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कांग्रेस और झामुमो की सरकार स्थानीय व नियोजन नीति नहीं बना पायी
रांची : भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रेस वार्ता में कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार को आदिवासी शब्द का अ भी नहीं पता है और वह बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं. डॉ अजय गूगल के बिना 10 एसटी समूह का नाम नहीं बता सकते.
उनकी पार्टी कांग्रेस ने आजादी के बाद से आदिवासियों को वोट बैंक के रूप में प्रयोग किया. सबसे पहले आदिवासी मंत्रालय का गठन स्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने किया था. स्व वाजपेयी की सरकार ने अनुसूचित जनजाति बाहुल्य झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्य का गठन करके इन समूहों के विकास का रास्ता प्रशस्त किया था.
झारखंड के शहीदों के गांव के विकास के लिए रघुवर सरकार ने सकारात्मक कदम उठाये हैं. श्री शाहदेव ने कहा कि अगर आदिवासियों की संख्या घटी है तो इसके लिए पूर्ण रूप से कांग्रेस जिम्मेदार है. कांग्रेस ने 60 वर्षों तक राज किया लेकिन आदिवासियों के लिए रोजगार के कोई नये रास्ते नहीं खोले. जिसके कारण इनका बड़ी संख्या में पलायन हुआ.
कांग्रेस ने झारखंड को लूटने का काम किया : प्रवक्ता दीनदयाल बर्णवाल ने कहा कि कांग्रेस आदिवासियों के कंधे पर रखकर बंदूक चलाना चाहती है.
जब-जब कांग्रेस को मौका मिला आदिवासियों को मूर्ख बनाया. उनका उपयोग किया और इस झारखंड की संपदा को लूटने का काम किया. अब हताश और निराश कांग्रेस, भाजपा पर दोष मढ़ बचना चाहती है. जिसे झारखंड की जनता खूब समझ रही है.
श्री बर्णवाल ने कहा कि मधु कोड़ा की सरकार बनाकर 38 सौ करोड़ का बंदरबांट और लूटपाट करनेवाली कांग्रेस को जवाब देना चाहिए कि वह 38 सौ करोड़ को कैसे झारखंड को वापस दिलायेगी और इसके लिए डॉ अजय कुमार को झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता से माफी मांगनी चाहिए. भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक बड़ाइक ने कहा कि कांग्रेस-झामुमो की सरकार स्थानीय नीति-नियोजन नीति नहीं बना पायी, जिस कारण नियुक्तियां के अभाव में हजारों आदिवासी युवा बेरोजगार रह गये.
श्री बड़ाइक ने कहा कि कांग्रेस नेत्री गीताश्री ने शायद स्व कार्तिक उरांव की लिखी पुस्तक बीस वर्ष की काली रात को नहीं पढ़ा है. उस पुस्तक में स्व कार्तिक उरांव ने आदिवासियों के दोहरे लाभ का विरोध किया है. साथ ही आदिवासियों का धर्मांतरण का भी विरोध किया है.
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