सरकार की लोकलुभावनी योजनाओं पर कटौती करने की जरूरत : झामुमो
Updated at : 03 Aug 2018 5:29 AM (IST)
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नेता प्रतिपक्ष सह झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि किसी भी क्षेत्र का विकास राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के अन्य क्रियाओं से निर्धारित होता है. ऐसे में वित्त आयोग से अनुरोध है कि केंद्र राजस्व के बंटवारे के संबंध में कोई भी फार्मूला निकालने से पहले झारखंड के सामाजिक, […]
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नेता प्रतिपक्ष सह झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि किसी भी क्षेत्र का विकास राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के अन्य क्रियाओं से निर्धारित होता है.
ऐसे में वित्त आयोग से अनुरोध है कि केंद्र राजस्व के बंटवारे के संबंध में कोई भी फार्मूला निकालने से पहले झारखंड के सामाजिक, आर्थिक सूचकांकों पर विशेष संज्ञान लेना चाहिए. इसमें झारखंड की भौगोलिक का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए.
झारखंड में आदिवासी आबादी को मापदंड के रूप में अपनाते हुए संसाधन आवंटन पर विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुझे बताया गया है कि लोकलुभावन योजनाओं पर खर्च में कटौती करने वाले राज्यों को प्रोत्साहन देने का काम वित्त आयोग द्वारा किया जाना है.
इसका अर्थ है कि जो सरकार लोकलुभावन योजनाओं पर कम राशि खर्च करेगी, उसे केंद्रीय राशि के आवंटन में प्रोत्साहन दिया जायेगा. यदि झारखंड के मुख्यमंत्री यह निर्णय लेते हैं कि मानसरोवर की यात्रा करने वाले झारखंडियों को एक लाख रुपये का अनुदान दिया जायेगा, तो यह कौन तय करेगा की यह योजना लोकलुभावन या लोकोपयोगी या कल्याणकारी योजना है. यदि सौ करोड़ की लागत से मोरहाबादी मैदान में टाइम स्क्वायर बनेगा, तो यह कौन तय करेगा कि यह योजना कौन सी है.
आयोग का टोटल फर्टिलिटी रेट कहता कि जिन राज्यों को टीएफआर कम है. यानि 2:1 है या उससे कम है, वैसे राज्यों को केंद्रीय राजस्व आवंटन में प्रोत्साहन दिया जायेगा. टीएफआर वहीं ज्यादा है जहां गरीब ज्यादा हैं.
जहां निरक्षरता, दलित, आदिवासी ज्यादा हैं. यहां टीएफआर घटाने को प्रोत्साहन राशि से जोड़ना विनाशकारी साबित होगा. श्री सोरेन ने कहा कि बदले हुए कर प्रणाली के आलोक में वित्त आयोग के स्वरूप में नयापन दिखना चाहिए था, जो नहीं दिखता है.
सिर्फ झारखंड को जीएसटी के कारण जून 2018 तक लगभग 2500 करोड़ की कमी राजस्व में हुई है. इसमें लगभग 30 प्रतिशत का शॉर्टफाल हुआ है.
वर्ष 2022 तक इस कमी की भरपाई केंद्र सरकार करेगी, लेकिन उसके बाद क्या होगा. एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2025 तक राज्य सरकार के राजस्व में लगभग 1300 करोड़ का नुकसान होगा. श्री सोरेन ने आयोग के टीओआर में न्यू इंडिया-2022 पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह भाजपा का पॉलिटिकल स्लोगन है. इसके लिए धन कर्णांकित करना सही नहीं है.
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