रणधीर-जानकी की हाजिरी, 11 महीने में 53 गवाहों की गवाही पूरी, जानकी यादव ने कहा, बाबूलाल मरांडी भी विलय चाहते थे

Updated at : 30 Jun 2018 2:24 AM (IST)
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रणधीर-जानकी की हाजिरी, 11 महीने में 53 गवाहों की गवाही पूरी, जानकी यादव ने कहा, बाबूलाल मरांडी भी विलय चाहते थे

आपने स्पीकर पर दबाव बना कर नहीं होने दी हमारे गवाहों की गवाही मंत्री रणधीर ने अधिवक्ता पर लगाया आरोप झाविमो के छह बागी विधायकों के दलबदल का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच रहा है. प्रतिवादी पक्ष (आरोपी विधायक) की ओर से सभी गवाहों की गवाही पूरी हो गयी है. 14 जुलाई से 2017 […]

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आपने स्पीकर पर दबाव बना कर नहीं होने दी हमारे गवाहों की गवाही
मंत्री रणधीर ने अधिवक्ता पर लगाया आरोप
झाविमो के छह बागी विधायकों के दलबदल का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच रहा है. प्रतिवादी पक्ष (आरोपी विधायक) की ओर से सभी गवाहों की गवाही पूरी हो गयी है. 14 जुलाई से 2017 से प्रतिवादी पक्ष के गवाही की प्रक्रिया शुरू हुई थी.
लगभग 11 महीने में प्रतिवादी पक्ष के 53 गवाहों की गवाही हुई. अब वादी-प्रतिवादी की ओर से दलबदल मामले में बहस होगी. वादी पक्ष की ओर पहले बहस की जायेगी. इधर मंत्री रणधीर सिंह और आवास बोर्ड के अध्यक्ष जानकी यादव की शुक्रवार को आखिरी गवाही हुई. दो घंटे चले क्रॉस एग्जामिन में मंत्री रणधीर सिंह और वादी पक्ष के अधिवक्ता आरएन सहाय के बीच नोक-झोंक, तकरार के साथ-साथ हंसी ठिठोली भी हुई.
रांची : झाविमो के छह बागी विधायकों के दलबदल मामले में गवाही के दौरान विधानसभा स्पीकर के न्यायाधिकरण में ही मंत्री रणधीर सिंह ने वादी पक्ष के अधिवक्ता पर आरोप लगा दिया कि आपने न्यायालय पर, स्पीकर पर दबाव बना कर हमारे गवाहों की गवाही नहीं होने दी. हमारी आेर से 450 गवाह थे. सबको निरस्त कर दिया गया. अधिवक्ता इस बात से बिफर गये.
कहा : कोर्ट ने गवाहों की गवाही निरस्त की है. कोर्ट ने भरसक प्रयास किया कि सबकी गवाही हो जाये. किसी ने कोई दबाव नहीं बनाया है. मंत्री और अधिवक्ता जोर-जाेर अपनी बात कर रहे थे. बाद में स्पीकर दिनेश उरांव ने हस्तक्षेप कर दोनों को समझाया.
मंत्री रणधीर सिंह का कहना था कि वह झाविमो के बूते नहीं, अपने बल पर चुनाव जीत कर आये हैं. अगर ऐसा होता, तो पार्टी के नेता बाबूलाल मरांडी दो-दो जगह से चुनाव नहीं हार जाते. राज्यहित में झाविमो का भाजपा में विलय हुआ है. राज्य की सवा तीन करोड़ जनता के हित और विकास के लिए विलय किया गया है. विलय विधि-सम्मत और कानूनी रूप से सही है.
अधिवक्ता का कहना था कि आठ फरवरी 2015 के जिस बैठक का हवाला दे कर आप पूरी पार्टी का विलय बता रहे हैं, उसमें अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी नहीं थे. पार्टी संविधान का हवाला देते हुए कहा कि विधायक नहीं, पार्टी कार्यसमिति बहुमत से यह निर्णय ले सकती है. इस पर मंत्री रणधीर सिंह ने कहा : हमलोग मांगते रहे, लेकिन संविधान नहीं दिया गया. पहली बार संविधान देख रहे हैं. वहां तो खाता न बही, जो प्रदीप यादव बोले वही सही. अावास बोर्ड के अध्यक्ष जानकी यादव ने भी दोहराया कि राज्य में स्थिरता के लिए विलय किया गया था. सर्वसम्मति से विलय हुआ था.
बाबूलाल मरांडी भी विलय चाहते थे
एक सवाल के जवाब में जानकी यादव ने कहा कि बाबूलाल मरांडी भी विलय चाहते थे. माही होटल में उन्होंने कहा था कि अमित शाह ने विलय का प्रस्ताव दिया है. पार्टी के सभी विधायक शामिल होना चाहते थे.
केवल प्रदीप यादव एक-दो दिन इंतजार करने की बात कर रहे थे. जानकी ने कहा : बाबूलाल गीता पर हाथ रख कर कहें कि उन्होंने विलय की बात नहीं की थी. इसके बाद पार्टी के सभी लोग सहमत हुए. बाद में वह प्रदीप यादव के दबाव में पलट गये. वहां दो लोगों की चलती थी. पार्टी के अंदर कोई लोकतंत्र नहीं था. जानकी ने कहा कि उस समय गाड़ी खराब नहीं हुई होती, तो सातवां विधायक भी आज हमारे साथ होता.
मैंने नहीं, न्यायालय ने गवाही निरस्त की, आप कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं
कोर्ट रूम में मंत्री ने क्या-क्या कहा
बाबूलाल ने हमको नहीं जिताया, खुद जीते, अगर ऐसा होता, तो वे खुद क्यों नहीं जीत गये.
चुपके-चुपके बाबूलाल अब भी भाजपा के नेताओं के साथ मिलते हैं. इसमें हर्ज क्या है? हम भी दूसरों से मिलते हैं.
बाबूलाल अमित शाह से मिलने चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली गये. फिर आकर हमलोगों से विलय की बात कही.
कोई हिडेन एजेंडा होगा, इसलिए बाद में इनकार कर दिया.
बाबूलाल ने कहा था, हम तो विलय के लिए तैयार हैं, प्रदीप यादव को मनाइये.
बाबूलाल उस समय तैयार नहीं हुए, इसलिए आज भटक रहे हैं.
कोर्ट रूम में जानकी यादव ने कहा
झाविमो का संविधान अालमीरा में बंद था, वहां तानाशाही चल रही थी. चुनाव आयोग की चिट्ठी को साक्ष्य के रूप में लेने से किया इनकार
वादी पक्ष के अधिवक्ता सूचना के अधिकार कानून से मिले उस पत्र को साक्ष्य के रूप में शामिल कराना चाहते थे, जिसमें आयोग ने जवाब दिया था कि झाविमो के भाजपा में विलय की सूचना उसे नहीं है. स्पीकर दिनेश उरांव का कहना था कि सभा सचिवालय ने इसको लेकर पत्र दे दिया है. इससे स्वीकार नहीं किया जा सकता है.
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