रामगढ़ का हेतमसरिया परिवार बना जॉइंट फैमिली की मिसाल, छह पीढ़ियां एक छत के नीचे
Published by : Priya Gupta Updated At : 15 May 2026 9:52 AM
रामगढ़ हेतमसरिया संयुक्त परिवार के सदस्य
Ramgarh News: आज यानी 15 मई को अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाता है. इस मौके पर रामगढ़ का हेतमसरिया परिवार संयुक्त परिवार की अनोखी मिसाल बना है. यहां छह पीढ़ियां एक ही छत के नीचे प्रेम, संस्कार, सहयोग और पारिवारिक मूल्यों के साथ रह रही हैं.
सलाउद्दीन की रिपोर्ट
Ramgarh News: रामगढ़ जिले में छह पीढ़ियों से रह रहे बसंत हेतमसरिया का संयुक्त परिवार एक पाठशाला बन गया है. जहां परिवार के सभी सदस्य नि:स्वार्थ प्रेम, नैतिक मूल्यों, सहयोग और अनुशासन का पाठ सीखकर जीवन जी रहे हैं. अन्य चीजें हमें बदल सकती हैं, लेकिन हमारी शुरुआत और अंत परिवार से ही होता है. इसकी झलक इस परिवार में देखने को मिलती है. इस पुश्तैनी घर में प्रवेश करते ही यह एहसास होता है कि परिवार जीवन का आधार स्तंभ है और जीने की प्रेरणा देता है. बसंत हेतमसरिया का संयुक्त परिवार इसी भावना को साकार कर रहा है.
राजस्थान से रामगढ़ तक छह पीढ़ियों का सफर

- पहली पीढ़ी में रती राम हेतमसरिया वर्ष 1903 ई में राजस्थान के हेतमसर मंडावा गांव से हजारीबाग जिले के गोला प्रखंड आए थे.
- दूसरी पीढ़ी में रती राम हेतमसरिया के तीन पुत्रों में से सुरजमल हेतमसरिया वर्ष 1940 ई में रामगढ़ शहर के चट्टी बाजार में आकर रहने लगे. उसी समय रामगढ़ में कांग्रेस अधिवेशन हुआ था. व्यापारिक दृष्टिकोण से इस परिवार ने रामगढ़ में रहना पसंद किया. शुरुआती दिनों में परिवार धागा खरीदकर बुनकरों को बेचने के साथ-साथ तेलहन फसल, सरसों, सरगुजा और डोरी दाल खरीदकर बंगाल के बाकुड़ा में बिक्री करता था. वर्ष 1943 ई में परिवार ने रामगढ़ के चट्टी बाजार में अपना मकान बनाया. जो आज भी इसी मकान में युवा पीढ़ी भी रह रहे हैं.
- तीसरी पीढ़ी में सुरजमल हेतमसरिया के पुत्र राधेश्याम और पुत्री तारा देवी रामगढ़ शहर के चट्टी बाजार स्थित आवास में रहने लगे. राधेश्याम की मृत्यु वर्ष 1977 ई में मात्र 44 वर्ष की उम्र में हो गई थी. उनकी पत्नी गिन्नी देवी ने उस समय से लेकर आज तक हेतमसरिया परिवार को संजोकर रखा है.
- चौथी पीढ़ी में बसंत हेतमसरिया समेत पांच भाइयों का परिवार संयुक्त रूप से एक ही छत के नीचे रह रहा है. इन पांचों भाइयों की पत्नियां, पुत्र, पुत्रवधुएं और बच्चे भी इस संयुक्त परिवार का हिस्सा हैं. यह पांचवी और छठी पीढ़ी के सभी सदस्य है सभी का मानना है कि परिवार का मतलब है कि कोई भी पीछे न छूटे और न ही भुलाया जाए.

संयुक्त परिवार की मुखिया गिन्नी देवी का त्याग और संघर्ष
पति की मृत्यु के बाद गिन्नी देवी ने संयुक्त परिवार की नींव को मजबूत बनाने में त्याग और संघर्ष की अनूठी मिसाल कायम की. उन्होंने कई पीढ़ियों को परिवार के महत्व का पाठ सिखाया. सात अविवाहित बच्चों की परवरिश के साथ संयुक्त परिवार को आगे बढ़ाने की बड़ी चुनौती उनके सामने थी.
गिन्नी देवी के पांच पुत्रों में बसंत हेतमसरिया मैकेनिकल इंजीनियर और लेखक, आनंद वकील, दीपक और प्रमोद व्यवसायी और प्रकाश चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं. इस परिवार में पांच बहुएं भी झारखंड और बिहार के अलग-अलग शहरों और घरेलू परिवेश से आई. समय के साथ भाइयों और बहनों की शादी हुई, बच्चे हुए और परिवार का विस्तार होता गया. बच्चे पढ़ाई के लिए देश और विदेश गए. रामगढ़ के साथ-साथ विदेशों में भी नौकरी करने लगे. बाद में उन बच्चों का भी विवाह हुआ. बदलते परिवेश में भी गिन्नी देवी ने परिवार को एकजुट रखकर उदाहरण प्रस्तुत किया है. वर्तमान में सभी सदस्य साथ हैं और परिवार आज भी संयुक्त बना हुआ है. परिवार में सात इंजीनियर, पांच सीए और तीन एमबीए हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में अलग मुकाम हासिल किया है. परिवार की नई पीढ़ी के कई सदस्य सिंगापुर, इंग्लैंड और अमेरिका में भी रह रहे हैं.परंपरागत परिवेश और आधुनिक युग का समावेश, खान-पान, सोच और रहन-सहन इस संयुक्त परिवार में साफ दिखाई देता है. परिवार के सदस्यों की गलतियों को कभी मुद्दा नहीं बनाया गया. परिवार के मुखिया की भूमिका निर्णय सुनाने के बजाय सलाहकार की रही है. सभी बहुओं ने रसोई में कभी पारी-पारी का फार्मूला नहीं अपनाया. सभी मिलकर घर के कामों में एक-दूसरे का हाथ बंटाते हैं. नई पीढ़ी भी परिवार की इन खूबियों को मजबूती से थामे हुए है.

हर सदस्य की भूमिका को महत्व देता है यह परिवार
बसंत हेतमसरिया के घर की बनावट ही संयुक्त परिवार में रह रहे प्रत्येक सदस्य के महत्व को दर्शाती है. मां गिन्नी देवी 92 वर्ष की उम्र में भी काफी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. वह अहले सुबह 3:30 बजे उठ जाती हैं, सुबह छह बजे मंदिर जाती हैं और दिन में बिना चश्मा लगाए सिलाई-कढ़ाई का काम करती हैं. हर दिन दोपहर तीन बजे से शाम छह बजे तक घर के सामने स्थित दवा दुकान का काउंटर भी संभालती हैं. घर की चारों बहुएं एक साथ रसोई और घर के अन्य कामों में हाथ बंटाती हैं. पर्व-त्योहार और विशेष अवसरों पर सभी पारिवारिक आयोजन संयुक्त रूप से होते हैं. व्यक्तिगत कार्यक्रमों और आर्थिक सहयोग की जगह सामूहिक सहभागिता को प्राथमिकता दी जाती है. परिवार के सदस्य बसंत हेतम सरिया ने बताया कि परिवार के सदस्य देश दुनिया जहां भी रहे लेकिन सभी सदस्यों का आशियाना इस घर में सुरक्षित है.
यह भी पढ़ें: Ramgarh: शहर के कई पेट्रोल पंपों पर तेल की कमी, कहीं ड्राई तो कहीं लंबी कतार
यह भी पढ़ें: चोरों ने रेलवे के लाखों के माल पर हाथ किया साफ, आरपीएफ ने सामान किया बरामद
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Priya Gupta
प्रिया गुप्ता डिजिटल मीडिया में कंटेंट राइटर हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हैं. वह पिछले एक साल से कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. इससे पहले वह नेशनल प्रिंटर और लोकल चैनलों में काम कर चुकी हैं. अभी वह झारखंड की खबरों पर काम करती हैं और SEO के अनुसार कंटेंट लिखती हैं. प्रिया आसान और साफ भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाने में विश्वास रखती हैं. वह ट्रेंडिंग खबरों, झारखंड से जुड़े मुद्दों और लोगों से जुड़ी खबरों पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सही और भरोसेमंद जानकारी सरल शब्दों में मिले.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










