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Ground Report: पाकुड़ के तारानगर-इलामी-नवादा गांव में 24 घंटे पुलिस तैनात, अब तक घर नहीं लौटा 10 परिवार

Updated at : 05 Aug 2024 11:27 AM (IST)
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पाकुड़ में हिंसा वाले दिन ऐसे थे हालात.

Ground Report|Pakur Violence|झारखंड के पाकुड़ जिले के तारानगर गांव में 18 जुलाई को हुई हिंसा के बाद नौ परिवार आज भी अपने घरों में नहीं लौटे हैं.

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Ground Report|Pakur Violence|झारखंड के पाकुड़ जिले के तारानगर गांव में 18 जुलाई को हुई हिंसा के बाद नौ परिवार आज भी अपने घरों में नहीं लौटे हैं. वहीं कई परिवार अब अपने घरों को लौट चुके हैं. हिंदू दुकानदार अपनी दुकान भी चला रहे हैं. भाजपा के गंधाईपुर मंडल के अध्यक्ष मनोरंजन सरकार बताते हैं कि 18 जुलाई को हुई हिंसा के बाद कई परिवार अपने घरों को छोड़कर दूसरे जगह चले गये थे.

तारानगर गांव में 300 की आबादी में 35 घर हिंदुओं के

उनमें से कई परिवार अब अपने घर में रहने लगे हैं. 10 परिवार आज भी अपने घरों में नहीं रह रहे हैं. उन्होंने बताया कि तारानगर गांव में कुल 35 घर हिंदुओं का हैं. बच्चे-बूढ़ों को मिलाकर करीब 300 की आबादी है. इनमें से कर्मकार के 4-5 घर और मछुवारों के 3-4 घरों के लोग बाहर रह हैं.

हिंसा के दौरान तोड़ दी गई थी कुछ दुकानें

उन्होंने बताया कि पाकुड़ के इन गांवों में हुई हिंसा के दौरान कुछ दुकानों को तोड़ दिया था. पक्के के मकान में स्थित किराना दुकानदार दुकान खोल रहे हैं. वहीं, गुमटी और नाश्ता दुकानों को तोड़ देने के कारण दुकान नहीं खुल रहा है. वहीं, इलामी गांव के महादेव दास ने बताया कि ईलामी गांव में करीब 60-65 हिंदू परिवार रहते हैं. गांव में शांति है. सभी परिवार गांव में ही है.

शांति स्थापित करने के लिए हुई शांति समिति की बैठक

उन्होंने बताया कि गांव में शांति स्थापित करने के लिए गांव में शांति समिति की बैठक भी आयोजित की गयी है, जिसमें सभी लोगों को मिलजुल कर रहने की बात हुई है. यदि कोई गलत काम करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी बात कही गयी है.

मुखिया कर रहे हैं सभी लोगों से गांव लौटने की अपील

वहीं, तारानगर गांव के मुखिया अजमल शेख ने बताया कि गांव में अधिकांश हिंदू परिवार रह रहे हैं. चार-पांच परिवार ही बाहर रह रहे हैं. सभी परिवारों को गांव आने के लिए कहा जा रहा है. हिंदू परिवारों में डर नहीं रहे इसके लिए गांव के लोगों के बीच शांति समिति की बैठक की गयी.

दिक्कत हो तो करें लिखित शिकायत, होगी कार्रवाई

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि गांव के किसी भी परिवार या आदमी को कोई व्यक्ति परेशान करता है, तो उसके खिलाफ पुलिस-प्रशासन में लिखित शिकायत दर्ज करायी जायेगी. इसीलिए जो परिवार गांव नहीं आ रहे हैं, उनसे भी निवेदन है कि वे गांव आएं और रहें, उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी.

शिफ्ट में लगाई जा रही पुलिसकर्मियों की ड्यूटी

मुफ्फसिल थाना प्रभारी संजीव झा ने बताया कि तारानगर, इलामी और नवादा गांव के साथ गोपीनाथपुर गांव में 24 घंटे पुलिस तैनात रहती है. सभी गांवों में शिफ्ट में पुलिसकर्मियों को लगाया जाता है ताकि सभी समय गांव में पुलिस की मौजूदगी रहे. गांव में हिंदू परिवार रह रहे हैं. कुछ परिवार यदि नहीं रह रहे हैं तो वे आकर रहें, उन्हें सुरक्षा संबंधी कोई परेशानी नहीं होगी.

प्राथमिकी के कारण कुछ लोग गांव से बाहर हैं : एसपी

एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि हिंसा के बाद तारानगर से कई परिवार गांव छोड़कर गये थे. पुलिस और प्रशासन के प्रयास के बाद गांव में शांति बहाल की गयी, जिसके बाद कई परिवार गांव लौट गये. कुछ परिवार के लोगों का नाम प्राथमिकी में दर्ज है, जिसके कारण वे गांव से बाहर हैं. वहीं, कुछ परिवार के लोग अपने रोजगार को लेकर भी बाहर रह रहे हैं. तारानगर, इलामी और नवादा गांव में पुलिस 24 घंटे मौजूद हैं. पूरे जिलेवासियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पाकुड़ पुलिस की है, किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है.

लोगों को सुरक्षा देने पर हो ठोस पहल : ओझा

पाकुड़ दौरे पर आये राजमहल विधायक अनंत ओझा ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपने ही राज्य के अपने ही जिले के अपने ही प्रखंड के अपने गांव को छोड़कर लोगों को पलायन करना पड़ रहा है. मैंने विधानसभा में यह मामला उठाया था, मैंने मुख्यमंत्री से मांग की थी अपने लोगों को सुरक्षा दी जायेगी. ऐसा वातावरण तैयार किया जाये कि वे निर्भिक हो कर रह सके. उन्हें सुरक्षा देना राज्य प्रशासन और जिला प्रशासन का है, इस दिशा में ठोस कदम उठाया जाना चाहिए.

तारानगर में परिवारों की हो रही है जांच

तारानगर गांव में हुई हिंसा के कारण कई परिवारों के लोगों के अब तक बाहर रहने की सूचना मिलने पर जिला प्रशासन मामले की जांच करवा रही है. डीसी के निर्देश पर बीडीओ ने पंचायत सचिव को तारानगर गांव भेजा है. तारानगर गांव में रह रहे हिंदू परिवारों की गिनती की जा रही है कि कितने हिंदू परिवार गांव में रह रहे हैं और कितने परिवार गांव से बाहर है. ये भी जांच की जा रही है कि वे किस कारण गांव से बाहर हैं. डीसी मृत्युंजय कुमार बरनवाल ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है. जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जायेगी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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