गुमला के दुंदुरिया बाल गृह कांड: बंगाल में मिले 3 बच्चे, चौथे की तलाश में उड़े झारखंड पुलिस के होश

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धनबाद से गायब हुआ एक बच्चा जो गुमला के अपने तीन साथियों से बिछड़ गया

Gumla Child Missing Case: गुमला के दुंदुरिया बाल गृह से फरार 4 बच्चों में से 3 बांकुड़ा (बंगाल) में मिले हैं. उन तीनों को लाने 25 जून को टीम रवाना होगी, जबकि धनबाद से लापता चौथे बच्चे की तलाश जारी है.

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गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट

Gumla Child Missing Case, गुमला: गुमला के दुंदुरिया स्थित बाल गृह (Child Care Institution) से चार बच्चों के सनसनीखेज तरीके से फरार होने के मामले में प्रशासन को बड़ी सफलता मिली है. पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में तीन बच्चों का पता चल चुका है और उन्हें वापस गुमला लाने की तैयारी तेज कर दी गई है. इसके लिए 25 जून को गुमला से एक विशेष टीम दोबारा बांकुड़ा के लिए रवाना होगी. लेकिन इन सबके बीच, चौथे बच्चे का अब तक कोई ठोस सुराग हाथ न लगना गुमला पुलिस और बाल संरक्षण विभाग के लिए सबसे बड़ी पहेली और चुनौती बन गया है.

कागजी कार्रवाई के फेर में फंसा था मामला

इससे पहले भी गुमला पुलिस और बाल संरक्षण विभाग की एक संयुक्त टीम पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा पहुंची थी. लेकिन अंतर्राज्यीय कानूनी अड़चनों, संस्थागत प्रक्रियाओं और आवश्यक दस्तावेजों (Formalities) के पूरा न होने के कारण बच्चों को उस वक्त साथ लाना संभव नहीं हो सका था. अब प्रशासन ने सभी जरूरी कानूनी कागजात दुरुस्त कर लिए हैं, जिसके बाद विशेष टीम दोबारा बंगाल जाकर तीनों बच्चों को गुमला वापस ले आएगी.

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धनबाद के पास अलग हुआ था चौथा बच्चा

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सस्पेंस और डर चौथे बच्चे को लेकर है, जिसका अब तक कुछ पता नहीं चल पाया है. प्रारंभिक जांच और बरामद बच्चों से मिली जानकारी के अनुसार चारों बच्चे बाल गृह से भागने के बाद एक साथ ही सफर कर रहे थे. लेकिन धनबाद के आसपास किसी स्टेशन या स्थान पर चौथा बच्चा अपने साथियों से अलग हो गया. पुलिस की टीमें झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के संभावित ठिकानों पर खाक छान रही हैं. प्रमुख रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और सार्वजनिक स्थानों पर बच्चे की तस्वीरें भेजकर तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) के जरिए उसे ट्रैक करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन फिलहाल सफलता हाथ नहीं लगी है.

बंगाल कैसे पहुंचे बच्चे? मददगारों की तलाश में जुटी एजेंसियां

तीन बच्चों के मिल जाने के बाद भी जांच एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम की तह तक जाने में जुटी हैं. पुलिस और बाल संरक्षण विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि आखिर इतनी कम उम्र के बच्चे गुमला से बिना किसी बड़ी मदद के पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा तक कैसे पहुंच गए? यात्रा के दौरान उन्हें टिकट किसने दिलाई, रास्ते में उन्हें किसने सहयोग किया और वे किन-किन संदिग्ध स्थानों पर रुके- इन सभी गंभीर बिंदुओं पर तफ्तीश जारी है.

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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