तीन दमकल गाड़ियों पर निर्भर पूरा जिला, 2025 में आग से 1.82 करोड़ की क्षति

Updated at : 08 Apr 2026 5:23 PM (IST)
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तीन दमकल गाड़ियों पर निर्भर पूरा जिला, 2025 में आग से 1.82 करोड़ की क्षति

पाकुड़ जिले के प्रखंड मुख्यालयों में दमकल गाड़ियों की भारी कमी से आग लगने पर समय पर मदद नहीं मिल पाती है, जिससे लोगों की सुरक्षा खतरे में है। जिले में सिर्फ तीन दमकल गाड़ियां हैं जो पूरे इलाके की सेवा करती हैं, जो लाखों की आबादी के लिए अपर्याप्त है। आग की घटनाओं में देर से पहुंचने के कारण आर्थिक नुकसान भी बढ़ रहा है, जो वर्ष 2025 में लगभग 1 करोड़ 82 लाख रुपये पहुंच चुका है। प्रखंड मुख्यालयों की दूरी ज्यादा होने से आग बुझाने में देरी होती है। स्थानीय लोग और अधिकारी दोनों संसाधनों की कमी को गंभीर मुद्दा मानते हैं और प्रखंड स्तर पर दमकल गाड़ियों की उपलब्धता जरूरी बताते हैं ताकि समय पर राहत मिल सके और नुकसान कम हो सके।

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प्रखंड मुख्यालयों में दमकल गाड़ियों का अभाव, लोगों की सुरक्षा पर संकट

आग की घटनाओं में देर से पहुंचती मदद, बढ़ता नुकसान

राघव मिश्रा, पाकुड़

जिले के प्रखंड मुख्यालयों में दमकल की गाड़ियों का अभाव लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय है. लाखों की आबादी वाले इन क्षेत्रों में अग्निशामक वाहन न होना सुरक्षा और जीवन के लिए बड़ा जोखिम है. आग लगने की घटनाओं में समय पर नियंत्रण न मिल पाने से जान-माल की भारी हानि होती है. मुख्यालय से दूर स्थित प्रखंडों में आग लगने पर दमकल कर्मियों को समय पर पहुंचना मुश्किल होता है. जब तक गाड़ियां मौके पर पहुंचती हैं, तब तक लोग व्यापक क्षति झेल चुके होते हैं. यह स्थिति लोगों के जीवन और संपत्ति दोनों को असुरक्षित बना देती है.

आंकड़े बताते हैं नुकसान

अग्निशामक कार्यालय के अनुसार वर्ष 2025 में जनवरी से दिसंबर तक जिले में आग लगने की घटनाओं से लगभग 1 करोड़ 82 लाख 6 हजार रुपये का नुकसान हुआ है. यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि संसाधनों की कमी किस तरह लोगों को आर्थिक और सामाजिक संकट में डाल रही है. तीन गाड़ियों पर निर्भर पूरा जिला

जिले में वर्तमान में मात्र तीन दमकल गाड़ियां हैं. इन्हीं के सहारे जिला मुख्यालय समेत पांच प्रखंड मुख्यालयों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है. लाखों की आबादी वाले क्षेत्र के लिए यह व्यवस्था बेहद अपर्याप्त है. लोगों और अधिकारियों की राय

स्थानीय लोगों का मानना है कि जब तक संसाधन और बुनियादी ढांचे को मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक आग से होने वाले नुकसान को रोकना मुश्किल होगा. वहीं अग्निशमन कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि प्रखंड मुख्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में दमकल गाड़ियां उपलब्ध कराना शासन स्तर का मामला है.

कहते हैं अग्निशमन पदाधिकारी

प्रखंड मुख्यालयों में एक भी दमकल की गाड़ियां नहीं है. जिला मुख्यालय में तीन गाड़ियां हैं. प्रखंड स्तर पर गाड़ी उपलब्ध कराना शासन प्रशासन का काम है. प्रखंड मुख्यालय से सूचना मिलते ही इन्हीं तीन गाड़ियों से आग बुझाने का काम किया जाता है. यदि प्रखंड मुख्यालयों में गाड़ियां उपलब्ध हो जाती है तो प्रखंड मुख्यालयों में रहने वाले लोगों के लिए वरदान साबित होगा.अग्निशमन विभाग का यह प्रयास रहता है कि समय पर पहुंचे और आग पर काबू पाया जा सके. लेकिन जिला मुख्यालय से प्रखंड मुख्यालयों की दूरी अधिक होने के कारण समय लगता है. जिस कारण लोगों को व्यापक क्षति उठानी पड़ती है.

अजय कुमार सिंह, अग्निशमन पदाधिकारी

जिला मुख्यालय से प्रखंड मुख्यालय की दूरी

पाकुड़ से पाकुड़िया: 53 किलोमीटर,

पाकुड़ से अमड़ापाड़ा: 36 किलोमीटर,

पाकुड़ से लिट्टीपाड़ा: 30 किलोमीटर,

पाकुड़ से हिरणपुर: 18.9 किलोमीटरपाकुड़ से महेशपुर: 31 किलोमीटर

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