फूलो झानो आशीर्वाद अभियान ने बदली बिटिधन की कहानी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 24 May 2026 6:04 PM
महेशपुर प्रखंड के बड़कियारी गांव की बिटिधन मरांडी ने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) की योजना “फूलों झानों आशीर्वाद” के तहत ब्याज मुक्त 40 हजार रुपये की सहायता पाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी। पहले हड़िया बेचकर जीविका चलाने वाली बिटिधन ने राशन और कॉस्मेटिक दुकान शुरू कर माहाना 17-18 हजार रुपये कमा रही हैं। अब वे सम्मानित जीवन जी रही हैं और गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
प्रतिनिधि, महेशपुर झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) से जुड़ने के बाद महेशपुर प्रखंड के बड़कियारी गांव की महिलाओं की तस्वीर बदल गई है. महेशपुर प्रखंड के बड़कियारी गांव में आजीविका के सीमित साधनों के कारण कई महिलाएं पलायन करती हैं, लेकिन बिटिधन मरांडी ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने परिवार को संभालने का प्रयास जारी रखा हुआ है. इनके परिवार में केवल बिटिधन मरांडी के अलावा एक बेटी है, जो पढ़ाई कर रही है. पति सेकेन हेंब्रम का निधन कई वर्षों पहले हो चुका है. जेएसएलपीएस से जुड़ने से पहले बड़कियारी गांव निवासी बिटिधन मरांडी चौक-चौराहों पर हड़िया बेचकर अपने परिवार की आजीविका चलाती थीं. इस कार्य से प्रतिदिन लगभग 250 से 300 रुपये तक की आय होती थी, लेकिन समाज में उन्हें सम्मान नहीं मिलता था. बिटिधन मरांडी इस कार्य को छोड़कर सम्मानजनक जीवन जीना चाहती थीं. ऐसे समय में झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “फूलों झानों आशीर्वाद अभियान” उनके जीवन में एक नई उम्मीद बनकर आई. वर्ष 2022 में जेएसएलपीएस के कर्मियों के सहयोग से उन्हें इस योजना का लाभ मिला. योजना के तहत अब तक उन्हें दो किस्तों में कुल 40 हजार रुपये की ब्याज मुक्त सहायता राशि प्राप्त हुई. प्रथम किस्त के रूप में प्राप्त 10 हजार रुपये का सही उपयोग करते हुए बिटिधन मरांडी ने अपने गांव में एक छोटी राशन दुकान शुरू की. धीरे-धीरे दुकान से अच्छी आय होने लगी, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया. दूसरी किस्त प्राप्त होने के बाद उन्होंने किराना दुकान के साथ एक कॉस्मेटिक दुकान भी शुरू की. आज बिटिधन मरांडी अपनी राशन एवं कॉस्मेटिक दुकान से प्रतिमाह लगभग 17 से 18 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं. पहले की तुलना में अब बिटिधन मरांडी काफी खुश हैं और सम्मानपूर्वक जीवन जी रही हैं. वे अपनी सफलता का श्रेय जेएसएलपीएस संस्था को देती हैं. आज वे अपने गांव एवं समाज की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं.
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