लातेहार के छिपादोहर में स्टेशन हटाने पर भड़के ग्रामीण, धरना-प्रदर्शन कर बंद कराया बाजार

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 14 May 2026 4:45 PM

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छिपादोहर स्टेशन के बंद करने के फैसले के विरोध में प्रदर्शन करते लोग. फोटो: प्रभात खबर

Latehar News: लातेहार के छिपादोहर और हेहेगड़ा रेलवे स्टेशन हटाने के फैसले के खिलाफ ग्रामीणों ने बड़ा धरना-प्रदर्शन किया. व्यापारियों ने बाजार बंद रखकर आंदोलन का समर्थन किया. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि फैसला वापस नहीं हुआ तो आंदोलन उग्र होगा. विधायक रामचंद्र सिंह भी प्रदर्शन में शामिल हुए. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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लातेहार से चंद्रप्रकाश सिंह की रिपोर्ट

Latehar News: झारखंड के लातेहार जिले में छिपादोहर और हेहेगड़ा रेलवे स्टेशन को हटाने के प्रस्ताव के खिलाफ जनआक्रोश फूट पड़ा है. रेलवे प्रशासन के फैसले के विरोध में बुधवार को विस्थापन संघर्ष समिति के बैनर तले छिपादोहर रेलवे स्टेशन परिसर में विशाल एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया. आंदोलन में हजारों ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और व्यापारियों ने हिस्सा लेकर रेलवे प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. ग्रामीणों ने साफ कहा कि यदि रेलवे प्रशासन ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है.

स्टेशन हटाने के फैसले के खिलाफ एकजुट हुए ग्रामीण

धरना-प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि छिपादोहर और हेहेगड़ा रेलवे स्टेशन केवल यातायात का साधन नहीं हैं, बल्कि पूरे इलाके की जीवनरेखा हैं. इन स्टेशनों के माध्यम से हजारों लोग रोजाना रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं. ग्रामीणों का कहना था कि स्टेशन हटाने का फैसला क्षेत्र के विकास को रोकने वाला कदम है. लोगों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा.

विधायक रामचंद्र सिंह ने दिया समर्थन

आंदोलन में स्थानीय विधायक रामचंद्र सिंह भी शामिल हुए. उन्होंने ग्रामीणों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी कीमत पर स्टेशन को हटाने नहीं दिया जाएगा. विधायक ने कहा कि वह जनता के साथ खड़े हैं और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा. उन्होंने कहा कि रेलवे प्रशासन को जनता की भावनाओं और क्षेत्र की जरूरतों को समझना चाहिए. बिना जनसहमति के ऐसा फैसला लेना उचित नहीं है.

विस्थापन संघर्ष समिति ने दी चेतावनी

विस्थापन संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि रेलवे प्रशासन ग्रामीणों की राय लिए बिना स्टेशन हटाने का निर्णय नहीं ले सकता. समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि यह फैसला सीधे तौर पर ग्रामीण विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा. समिति ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल शुरुआत है. यदि जल्द फैसला वापस नहीं लिया गया, तो चक्का जाम और बड़े जनआंदोलन की रणनीति अपनायी जाएगी.

बाजार बंद कर व्यापारियों ने जताया विरोध

रेलवे के फैसले के विरोध में छिपादोहर बाजार के व्यापारियों ने भी आंदोलन का समर्थन किया. स्थानीय दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखीं. पूरे बाजार में सन्नाटा पसरा रहा. व्यापारियों का कहना है कि रेलवे स्टेशन क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ है. स्टेशन हटने से कारोबार बुरी तरह प्रभावित होगा और हजारों परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा. स्थानीय लोगों ने कहा कि स्टेशन बंद होने से छोटे व्यापारियों, मजदूरों और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.

पलामू टाइगर रिजर्व से गुजरती है रेलवे लाइन

जानकारी के अनुसार यह रेलवे लाइन पलामू टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से होकर गुजरती है. रेलवे की ओर से यहां थर्ड लाइन निर्माण का कार्य कराया जा रहा है. हालांकि छिपादोहर से हेहेगड़ा तक निर्माण कार्य पिछले छह वर्षों से अधिक समय से रुका हुआ है. बताया जा रहा है कि वन विभाग ने रेलवे लाइन हटाने का प्रस्ताव दिया था. इसके बाद रेलवे और वन विभाग के उच्च अधिकारियों के बीच हुई बैठक में रेलवे लाइन को डायवर्ट करने पर सहमति बनी.

मालगाड़ी के लिए थर्ड लाइन का प्रस्ताव

सूत्रों के अनुसार रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित थर्ड लाइन से केवल मालगाड़ियों का परिचालन किया जाएगा, जबकि पैसेंजर ट्रेनों का संचालन पहले की तरह जारी रहेगा. इसके बावजूद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है. ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे लाइन डायवर्ट होने और स्टेशन हटने से भविष्य में पैसेंजर ट्रेनों पर भी असर पड़ सकता है. यही वजह है कि लोग रेलवे प्रशासन के आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं.

रेलवे बोर्ड से मिल चुकी है मंजूरी

जानकारी के मुताबिक रेलवे लाइन डायवर्ट करने के प्रस्ताव को रेलवे बोर्ड की केंद्रीय मंजूरी भी मिल चुकी है. इसके बाद इलाके में विरोध और तेज हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे बोर्ड को क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का आकलन करना चाहिए था. लोगों का मानना है कि यदि स्टेशन हटे, तो इसका सीधा असर पूरे इलाके की कनेक्टिविटी और विकास पर पड़ेगा.

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सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे

धरना-प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया. छिपादोहर थाना पुलिस, आरपीएफ और बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था. पूरे धरना स्थल की घेराबंदी कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी गई. हालांकि पुलिस प्रशासन की निगरानी में प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन ग्रामीणों ने साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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