महाभंडारा के साथ सात दिवसीय श्रीराम कथा का समापन

Updated at : 18 Mar 2026 6:46 PM (IST)
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महाभंडारा के साथ सात दिवसीय श्रीराम कथा का समापन

सियाराम सत्संग समिति द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा का भव्य समापन सातवें दिन श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ.

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प्रतिनिधि, झुमरीतिलैया सियाराम सत्संग समिति द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा का भव्य समापन सातवें दिन श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ. अंतिम दिन प्रातःकाल विधिवत हवन-पूजन कर कथा का समापन किया गया तथा इसके पश्चात श्रद्धालुओं के लिए भव्य भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया. पूजन का कार्य पंडित अरविंद पांडेय एवं विकास पांडेय ने विधि-विधान के साथ संपन्न कराया. यजमान के रूप में सुजाता जोशी, मनोज जोशी तथा अजय एवं रूबी बर्णवाल उपस्थित रहे. प्रातः 9 बजे आचार्य पंडित रामकरण सहल के सानिध्य में हवन-पूजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति देकर भगवान श्रीराम से सुख-समृद्धि, शांति और मंगलमय जीवन की कामना की. रावण वध और राम के राज्याभिषेक का भावपूर्ण वर्णन कथावाचक पंडित रामकरण सहल ने सातवें दिन की कथा में भगवान श्रीराम के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों-रावण वध और राम के राज्याभिषेक-का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया. उन्होंने वनवास काल के दौरान जटायु और अहिल्या जैसे जीवों के उद्धार की कथा सुनायी. जटायु के प्रति श्रीराम की करुणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान ने स्वयं उनका अंतिम संस्कार कर मानवता और करुणा का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया. कथा के दौरान हनुमान जी के लंका गमन का प्रसंग भी रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया. अशोक वाटिका में माता सीता की खोज, फलाहार करना, राक्षसों का संहार, बंदी बनना और पूंछ में आग लगने के बाद लंका दहन का सजीव चित्रण कर कथावाचक ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. इस प्रसंग पर पूरा पंडाल “जय श्रीराम” और “जय सियाराम” के जयघोष से गूंज उठा. इसके उपरांत राम-रावण युद्ध का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि अंततः अधर्म पर धर्म की विजय हुई और रावण का वध हुआ. भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे, जहां दीपोत्सव जैसा उल्लास छा गया. राज्याभिषेक के भव्य दृश्य का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि गुरुजनों और ऋषि-मुनियों की उपस्थिति में भगवान श्रीराम और माता सीता का तिलक कर उन्हें अयोध्या का राजा-रानी बनाया गया. कथा श्रवण करने वालों में अनुप जोशी, प्रदीप केडिया, हरि भाई, अरुण मोदी, मनोज केडिया, चन्द्रशेखर जोशी, गिरधारी सोमानी, बबीता केडिया, माला दारूका, अमित खेतान, भूनंदन मोदी, चन्द्रशेखर सोनकर, आशा बर्णवाल, नीलम जोशी, मंजु मोदी सहित भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे.

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VIKASH NATH

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