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बालू घाटों की नीलामी नहीं, हो रहा है अवैध उत्खनन

Updated at : 21 Nov 2024 7:57 PM (IST)
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बालू घाटों की नीलामी नहीं, हो रहा है अवैध उत्खनन

सरकार द्वारा बालू घाटों के नीलामी नहीं किये जाने का लाभ बालू माफिया उठा रहे है़ं अवैध रूप से बालू उत्खनन कर महंगे दाम पर बेचा जा रहा है़ प्रखंड के तमाय, धरेयडीह, सुगाशाख, योगियाटिल्हा, तिलोकरी, परसाबाद दुमदमा, लतवेधवा, सतडीहा, बिहारो, चंद्रपुर, बिगहा सहित बराकर नदी के दर्जनों घाट पर अवैध रूप से बालू का उठाव हो रहा है.

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जयनगर. सरकार द्वारा बालू घाटों के नीलामी नहीं किये जाने का लाभ बालू माफिया उठा रहे है़ं अवैध रूप से बालू उत्खनन कर महंगे दाम पर बेचा जा रहा है़ प्रखंड के तमाय, धरेयडीह, सुगाशाख, योगियाटिल्हा, तिलोकरी, परसाबाद दुमदमा, लतवेधवा, सतडीहा, बिहारो, चंद्रपुर, बिगहा सहित बराकर नदी के दर्जनों घाट पर अवैध रूप से बालू का उठाव हो रहा है. सुगाशाख घाट पर बालू डंप कर ट्रैक्टर वालों के पास बेचा जा रहा है, जिससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है़ धर पकड़ के मामले में प्रशासनिक चुप्पी से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. लोगों की माने तो इस अवैध कारोबार में परिवहन विभाग, खनन विभाग और अंचल प्रशासन की मिलीभगत है़ इन घाटों से प्रतिदिन 500 ट्रैक्टर बालू का अवैध उत्खनन हो रहा है़ ट्रैक्टर में बालू लोड़ करने के लिए जेसीबी जैसी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है़ 1200 रुपये में खरीदा गया बालू शहरों में तीन से पांच हजार रुपये ट्रैक्टर की दर से बेचा जा रहा है़ यह काम अहले सुबह से शुरू हो जाता है और जिन रास्तों से बालू लदे ट्रैक्टर गुजरते हैं, वहां रहने वाले लोगों की नींद हराम हो गयी है. साथ ही सड़कों की हालत भी खराब हो गयी है़ पहले जब अंचल में प्रभारी सीओ थे, तो कहा जाता था कि सीओ और बीडीओ का कार्य एक ही व्यक्ति को देखना है, इस वजह से व्यस्तता रहती है. मगर स्थायी सीओ बहाली के बाद एक बार भी किसी घाट पर छापेमारी नहीं की गयी. तड़के तीन से अवैध तरीके से बालू की ढुलाई शुरू हो जाती है. महंगे दर पर बालू बिकने के कारण अबुआ आवास के गरीब लाभुकों को का काफी परेशानी रही है़

नदियों का स्वरूप बिगड़ा

बालू के अवैध उत्खनन नदियों का स्वरूप बिगड़ गया है़ नदियां की शक्ल नाले जैसी हो गयी है़ बराकर नदी तमाय घाट के किनारे बड़ी संख्या में किसान गेहूं की खेती किया करते थे़ इसके अलावे अन्य फसलें भी लगाते थे. नदी के पानी से फसल की पटवन करते थे. मगर वर्तमान में इस घाट के किनारे दूर-दूर तक मिट्टी नहीं दिखती. सिर्फ बालू ही बालू नजर आता है़ इस वजह से किसानों ने खेती करनी छोड़ दी है़ बालू के अवैध उत्खनन से आसपास के गांवों का जलस्तर नीचे चला गया है. चापानल व कुएं सूख रहे हैं. प्रदूषण का प्रभाव भी दिखने लगा है. उल्लेखनीय है कि प्रशासनिक महकमा के चुनाव कार्य में व्यस्त रहने का लाभ भी बालू माफिया उठा रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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