अपहरण कर हत्या करने के आरोपी को आजीवन कारावास, राकेश चंद्रा की अदालत ने सुनाई सजा

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 16 May 2026 5:58 PM

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प्रतीकात्मक तस्वीर

Koderma News: कोडरमा अदालत ने अपहरण कर हत्या और शव छिपाने के मामले में आरोपी सूरज राणा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने हत्या, अपहरण और साक्ष्य मिटाने के आरोप में दोषी पाते हुए जुर्माना भी लगाया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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कोडरमा से विकास कुमार की रिपोर्ट

Koderma News: अपहरण कर हत्या करने और साक्ष्य छुपाने की नीयत से शव को बंद खदान में फेंक देने के मामले में कोडरमा की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोडरमा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय राकेश चंद्रा की अदालत ने आरोपी सूरज राणा को दोषी करार देते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने आरोपी पर अलग-अलग धाराओं के तहत जुर्माना भी लगाया है.

हत्या और अपहरण मामले में दोषी करार

अदालत ने सिंगलोडीह डोमचांच निवासी 29 वर्षीय सूरज राणा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी पाते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई. इसके साथ ही 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया. अदालत ने स्पष्ट किया कि जुर्माना नहीं देने पर आरोपी को तीन माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. इसके अलावा न्यायालय ने धारा 364 आईपीसी के तहत भी आरोपी को दोषी मानते हुए आजीवन सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. जुर्माना नहीं देने की स्थिति में तीन माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. वहीं, साक्ष्य मिटाने के मामले में अदालत ने आरोपी को धारा 201 आईपीसी के तहत दोषी पाते हुए दो वर्ष की सजा सुनाई. अदालत ने कहा कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी.

वर्ष 2023 में दर्ज हुआ था मामला

जानकारी के अनुसार यह मामला वर्ष 2023 का है. मृतक प्रदीप पंडित की पत्नी सुनीता देवी ने तिलैया थाना में कांड संख्या 258/23 दर्ज कराया था. अपने आवेदन में सुनीता देवी ने बताया था कि 21 अक्टूबर 2023 को उनके पति को लेकर दलजीत सिंह कोडरमा गए थे. उन्होंने कहा था कि उनके पति दलजीत सिंह के यहां ड्राइवर के रूप में काम करते थे. उस दिन के बाद से उनके पति घर वापस नहीं लौटे और उनका मोबाइल फोन भी बंद आने लगा. आवेदन में उन्होंने आशंका जताई थी कि उनके पति के अपहरण में दलजीत सिंह का हाथ हो सकता है.

जांच में सामने आया सोने की अवैध खरीद-बिक्री का मामला

मामले की जांच के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले. पुलिस जांच में सामने आया कि पूरा मामला सोने की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़ा हुआ था. इसी जांच के दौरान सूरज राणा सहित कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई. जांच एजेंसियों ने तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ीं. पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि हत्या के बाद शव को छुपाने के उद्देश्य से बंद खदान में फेंक दिया गया था, ताकि साक्ष्य मिटाए जा सकें.

अदालत में चली लंबी सुनवाई

मामला अदालत पहुंचने के बाद अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक प्रवीण कुमार सिंह ने पैरवी की. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में कई गवाहों का परीक्षण कराया और घटना से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत किए. लोक अभियोजक ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की. उन्होंने अदालत को बताया कि यह सुनियोजित अपराध था, जिसमें हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने की भी कोशिश की गई.

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बचाव पक्ष ने भी रखी दलील

वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अनवर हुसैन ने आरोपी का पक्ष रखते हुए कई दलीलें पेश कीं. हालांकि अदालत ने सभी गवाहों, दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों का गहन अवलोकन करने के बाद आरोपी सूरज राणा को दोषी करार दिया. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयान आरोपी की संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त हैं. इसके बाद अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए जुर्माना भी लगाया.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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