तोरपा में मसीही विश्वासियों ने खजूर पर्व मनाया

Updated at : 29 Mar 2026 6:17 PM (IST)
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तोरपा में मसीही विश्वासियों ने खजूर पर्व मनाया

प्रखंड में खजूर पर्व (पाम संडे) श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया.

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तोरपा. प्रखंड में खजूर पर्व (पाम संडे) श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया. इस अवसर पर आरसी चर्च तोरपा में विशेष प्रार्थना कार्यक्रम आयोजित किया गया. विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में मसीही समुदाय के लोग चर्च परिसर में एकत्रित हुए और प्रभु यीशु मसीह के येरुशलेम आगमन की स्मृति में खजूर की डालियों के साथ शोभायात्रा निकाली. शोभायात्रा चर्च परिसर से शुरू होकर तपकारा रोड, न्यू डॉन स्कूल होते हुए संत जोसेफ हाई स्कूल स्थित सागवान मैदान पहुंची. यहां से सभी विश्वासी पुनः चर्च परिसर लौटे. यहां विशेष प्रार्थना सभा हुई. खजूर रविवार के मौके पर मिस्सा के मुख्य अनुष्ठता लीवंस बुलाहट केंद्र के सहायक निदेशक फादर एमानुएल बुढ़ थे. उनकी अगुवाई में खजूर रविवार की धर्मविधि संपन्न की गयी. फादर एमानुएल बागे, पल्ली पुरोहित हीरालाल हुनीपुर्ती, फादर जॉन टोपनो, मनीष बरला, अजीत केरकेट्टा, दिक्कन जीवन कंडुलना ने धर्मविधि संपन्न कराने में सहयोग किया. गाना का संचालन फादर जेम्स धान की अगुवाई में युवा संघ के युवक और युवतियों ने किया. इस अवसर पर अपने संदेश में मुख्य अनुष्ठाता फादर एमानुएल बुढ़ ने कहा कि दुख, पीड़ा व खुशी हमारे जीवन का हिस्सा हैं, इसे स्वीकार करें. उन्होंने कहा कि खजूर पर्व प्रभु यीशु के येरुसलेम यात्रा की याद दिलाता है.जब प्रभु यीशु येरुसलेम में प्रवेश किये तो वहां लोगों ने उनका स्वागत खजूर डाली बिछा कर किया. उन्होंने कहा कि खजूर की हरी डाली जीवन व खुशी का प्रतीक है, यह डाली धीरे-धीरे सूख जाता है, जो मरण का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि मरण के बिना कोई जीवन नहीं पा सकता है. उन्होंने कहा कि खजूर पर्व हमें विनम्रता, प्रेम और त्याग का संदेश देता है. प्रभु को जब सूली पर चढ़ाया जाने लगा, तब भी वो विनम्र बने रहे. हमें भी सुख हो, दुख हो या पीड़ा का क्षण विनम्र और आशावान बने रहना चाहिए. प्रभु के जीवन से हमें यही प्रेरणा मिलती है. उन्होंने कहा कि आज से पुण्य सप्ताह की शुरुआत हो रही है. कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को खजूर पर्व की शुभकामनाएं दीं और समाज में प्रेम एवं सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया. कार्यक्रम को सफल बनाने में काथलिक सभा, युवा संघ, महिला संघ आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई.

दुख, पीड़ा व खुशी हमारे जीवन का अंग : फादर एमानुएल बुढ़

मसीही विश्वासियों ने खजूर की डालियों के साथ शोभायात्रा निकाली

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