कभी था मजदूर, आज है जिला का अव्वल मत्स्य बीज पालक

मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता था प्रेमानंद मत्स्य विभाग से जुड़ कर जीरा उत्पादन का प्रशिक्षण लिया खूंटी : मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर अड़की प्रखंड अंतर्गत सिंदरी निवासी प्रेमानंद मछुआ मत्स्य विभाग खूंटी से जुड़ने के बाद वर्तमान में मत्स्य बीज उत्पादक के रूप में जाने जाते हैं. जानकारी के अनुसार […]
मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता था प्रेमानंद
मत्स्य विभाग से जुड़ कर जीरा उत्पादन का प्रशिक्षण लिया
खूंटी : मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर अड़की प्रखंड अंतर्गत सिंदरी निवासी प्रेमानंद मछुआ मत्स्य विभाग खूंटी से जुड़ने के बाद वर्तमान में मत्स्य बीज उत्पादक के रूप में जाने जाते हैं. जानकारी के अनुसार प्रेमानंद की आर्थिक स्थिति दयनीय थी. खेत नहीं होने के कारण वह दूसरे के खेत में मजदूरी व तालाबों में जाकर मछली पकड़ने का कार्य करता था. इससे प्राप्त मजदूरी से अपने परिवार का भरण-पोषण बहुत मुश्किल से कर पाता था.
वर्ष 2009 में वह मत्स्य विभाग से जुड़ कर मत्स्य बीज उत्पादन का प्रशिक्षण प्राप्त किया. उसने मत्स्य मित्र के रूप में काम करना आरंभ किया. वह गांवों में जाकर लोगों के तालाब का सर्वे करने लगा. साथ ही बैठक कर लोगों को मत्स्य पालन के प्रति जागरूक कर प्रशिक्षण के लिए जिला मुख्यालय भेजने का काम करना शुरू कर दिया. कालांतर में वह मत्स्य बीज उत्पादन करना आरंभ किया. उसने मत्स्य बीज तैयार कर उचित मूल्य पर लोगों को उपलब्ध कराने लगा. इससे उसे आमदनी हाेने लगी. उसकी पहचान लोगों के बीच मत्स्य बीज उत्पादक के तौर पर हो गया.
नये लाभुक स्वयं उसके पास आकर मत्स्य बीज की खरीदारी कर मत्स्य पालन कर रहे हैं. प्रेमानंद मछुआ के पास एक भी तालाब नहीं था. पर आज उसके पास लीज के 12 तालाब हैं. इन तालाबों में वह मछली पालन करने के साथ मत्स्य बीज का उत्पादन भी कर रहा है.
वर्ष 2018-19 में मत्स्य विभाग खूंटी ने उसे टेंपो क्रय करने लिए अनुदान दिया. टेंपो क्रय करने के बाद मछली व मत्स्य बीज को बेचने के लिए अड़की से बाहर आने-जाने की सुविधा मिल गयी. फिलवक्त, मत्स्य विभाग खूंटी से जुड़ने के बाद उसकी आर्थिक स्थिति लगातार सुदृढ़ हो रही है. वह वर्तमान में 15 हजार रुपये से अधिक प्रत्येक महीने कमाने लगा है.
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