जेपीएससी के 22 आवेदकों को हाईकोर्ट से राहत, उम्र सीमा में मिली छूट

Updated at : 13 Feb 2026 8:32 AM (IST)
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Jharkhand High Court

झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो.

JPSC Exam: जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2025 में उम्र सीमा को लेकर 22 अभ्यर्थियों को झारखंड हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है. अदालत ने ऑफलाइन आवेदन स्वीकार करने का निर्देश दिया है. हालांकि रिजल्ट कोर्ट की अनुमति के बिना जारी नहीं होगा. अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद निर्धारित की गई है. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

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JPSC Exam: झारखंड हाइकोर्ट से संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के 22 अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है. उम्र सीमा में छूट को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अंतरिम आदेश जारी किया है. अदालत के इस फैसले से अभ्यर्थियों को फिलहाल ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भरने का मौका मिल गया है.

जस्टिस आनंद सेन की अदालत में सुनवाई

झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई. अदालत ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुना और पाया कि मामले में प्रथम दृष्टया विचार योग्य बिंदु हैं. इसके बाद अदालत ने प्रार्थियों को अंतरिम राहत देते हुए परीक्षा फॉर्म भरने की अनुमति प्रदान कर दी. अदालत ने झारखंड लोकसेवा आयोग को निर्देश दिया कि संबंधित अभ्यर्थियों का ऑफलाइन आवेदन स्वीकार किया जाए. हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इन अभ्यर्थियों का रिजल्ट बिना न्यायालय की अनुमति के प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

राज्य सरकार और जेपीएससी से मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार और जेपीएससी को इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. साथ ही अगली सुनवाई के लिए आठ सप्ताह बाद की तिथि निर्धारित करने को कहा गया है. इससे पहले याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने दलीलें पेश कीं. उन्होंने अदालत को बताया कि इससे पहले आयोजित दो सिविल सेवा परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को अधिकतम उम्र सीमा में छूट दी गई थी.

पिछली परीक्षाओं में दी गयी थी उम्र सीमा में छूट

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वर्ष 2016 और 2017 की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाओं में अधिकतम उम्र सीमा में छूट दी गई थी. इसके अलावा, वर्ष 2021 की नियमावली में भी ऊपरी उम्र सीमा में छूट देने का प्रावधान है. अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वर्ष 2025 की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में उम्र सीमा में छूट नहीं देना समान अवसर के सिद्धांत के विपरीत है. उनका कहना था कि अधिकतम उम्र सीमा की गणना के लिए कट-ऑफ वर्ष 2018 होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि जेपीएससी नियमावली में प्रत्येक वर्ष सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करने और आवश्यक स्थिति में उम्र सीमा में छूट देने का प्रावधान है. ऐसे में वर्तमान परीक्षा में छूट नहीं देना अनुचित है.

अदालत में जेपीएससी ने क्या कहा

वहीं, आयोग की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और अधिवक्ता प्रिंस कुमार ने पक्ष रखा. उन्होंने अदालत के समक्ष आयोग का रुख स्पष्ट किया. हालांकि, अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय सुरक्षित रखने का संकेत दिया है. प्रार्थी किशोर कुमार मंडल सहित कुल 22 अभ्यर्थियों ने याचिका दायर की है. सभी ने संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2025 में उम्र सीमा में छूट देने की मांग की है.

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14 फरवरी तक फॉर्म भरने की अंतिम तिथि

आयोग की ओर से विज्ञापन संख्या 01/2026 जारी किया गया है. इसके तहत संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2025 के लिए आवेदन आमंत्रित किये गये हैं. परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 14 फरवरी निर्धारित की गयी है. अदालत के अंतरिम आदेश के बाद संबंधित 22 अभ्यर्थी अब ऑफलाइन माध्यम से आवेदन जमा कर सकेंगे. हालांकि उनका परिणाम अंतिम रूप से अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा. इस आदेश ने अन्य अभ्यर्थियों के बीच भी चर्चा तेज कर दी है. अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि उम्र सीमा में छूट को लेकर अंतिम फैसला क्या होगा.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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