तीसरे बड़े मंगल पर करें हनुमान की चालीसा और आरती, दूर होंगे सभी कष्ट
Published by : Neha Kumari Updated At : 19 May 2026 8:13 AM
भगवान हनुमान
Bada Mangal 2026: बड़ा मंगल भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है. इस दिन भगवान हनुमान की पूजा करते समय हनुमान चालीसा और आरती का पाठ अवश्य करना चाहिए. मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. साथ ही मानसिक तनाव, मंगल दोष और शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती का प्रभाव भी कम होता है.
Bada Mangal 2026: सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास के मंगलवार का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है. इस महीने में आने वाले सभी मंगलवार को ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ कहा जाता है. आज यानी 19 मई 2026 को ज्येष्ठ महीने का तीसरा बड़ा मंगल है. यह दिन संकटमोचन भगवान हनुमान की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है.
इस वर्ष 2026 में ज्येष्ठ माह बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इस बार अधिकमास पड़ने के कारण 4 या 5 नहीं, बल्कि कुल 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं. मान्यता है कि बड़े मंगल के दिन जो भी भक्त सच्चे मन से बजरंगबली की पूजा करता है, भगवान हनुमान उसके जीवन के सभी कष्ट और दुख दूर कर देते हैं. इस दिन पूजा के दौरान हनुमान चालीसा और आरती का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है.
भगवान हनुमान चालीसा
दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि.
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि..
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार.
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार..
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर.
जय कपीस तिहुं लोक उजागर..
रामदूत अतुलित बल धामा.
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा..
महाबीर बिक्रम बजरंगी.
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै.
कांधे मूंज जनेऊ साजै.
संकर सुवन केसरीनंदन.
तेज प्रताप महा जग बन्दन..
विद्यावान गुनी अति चातुर.
राम काज करिबे को आतुर..
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया.
राम लखन सीता मन बसिया..
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा.
बिकट रूप धरि लंक जरावा..
भीम रूप धरि असुर संहारे.
रामचंद्र के काज संवारे..
लाय सजीवन लखन जियाये.
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये..
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई.
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई..
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं.
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं..
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा.
नारद सारद सहित अहीसा..
जम कुबेर दिगपाल जहां ते.
कबि कोबिद कहि सके कहां ते..
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा.
राम मिलाय राज पद दीन्हा..
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना.
लंकेस्वर भए सब जग जाना..
जुग सहस्र जोजन पर भानू.
लील्यो ताहि मधुर फल जानू..
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं.
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं..
दुर्गम काज जगत के जेते.
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते..
राम दुआरे तुम रखवारे.
होत न आज्ञा बिनु पैसारे..
सब सुख लहै तुम्हारी सरना.
तुम रक्षक काहू को डर ना..
आपन तेज सम्हारो आपै.
तीनों लोक हांक तें कांपै..
भूत पिसाच निकट नहिं आवै.
महाबीर जब नाम सुनावै..
नासै रोग हरै सब पीरा.
जपत निरंतर हनुमत बीरा..
संकट तें हनुमान छुड़ावै.
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै..
सब पर राम तपस्वी राजा.
तिन के काज सकल तुम साजा.
और मनोरथ जो कोई लावै.
सोइ अमित जीवन फल पावै..
चारों जुग परताप तुम्हारा.
है परसिद्ध जगत उजियारा..
साधु-संत के तुम रखवारे.
असुर निकंदन राम दुलारे..
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता.
अस बर दीन जानकी माता..
राम रसायन तुम्हरे पासा.
सदा रहो रघुपति के दासा..
तुम्हरे भजन राम को पावै.
जनम-जनम के दुख बिसरावै..
अन्तकाल रघुबर पुर जाई.
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई..
और देवता चित्त न धरई.
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई..
संकट कटै मिटै सब पीरा.
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा..
जै जै जै हनुमान गोसाईं.
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं..
जो सत बार पाठ कर कोई.
छूटहि बंदि महा सुख होई..
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा.
होय सिद्धि साखी गौरीसा..
तुलसीदास सदा हरि चेरा.
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा..
दोहा
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप.
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप..
हनुमान जी की आरती
श्री हनुमंत स्तुति ॥
मनोजवं मारुत तुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥
वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं,
श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥
॥ आरती ॥
आरती कीजै हनुमान लला की .
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
जाके बल से गिरवर काँपे .
रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई .
संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥
दे वीरा रघुनाथ पठाए .
लंका जारि सिया सुधि लाये ॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई .
जात पवनसुत बार न लाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥
लंका जारि असुर संहारे .
सियाराम जी के काज सँवारे ॥
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे .
लाये संजिवन प्राण उबारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥
पैठि पताल तोरि जमकारे .
अहिरावण की भुजा उखारे ॥
बाईं भुजा असुर दल मारे .
दाहिने भुजा संतजन तारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥
सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें .
जय जय जय हनुमान उचारें ॥
कंचन थार कपूर लौ छाई .
आरती करत अंजना माई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥
जो हनुमानजी की आरती गावे .
बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥
लंक विध्वंस किये रघुराई .
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की .
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
क्यों कहा जाता है इसे ‘बुढ़वा मंगल’?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास के मंगलवार को ही भगवान हनुमान की मुलाकात प्रभु श्री राम से हुई थी. इसके अलावा, महाभारत काल में भीम का घमंड चूर करने के लिए हनुमान जी ने इसी दिन एक वृद्ध वानर का रूप धारण किया था. यही वजह है कि इसे ‘बुढ़वा मंगल’ भी कहा जाता है और इस दिन संकटमोचन के वृद्ध स्वरूप की पूजा की जाती है.
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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.
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