क्या 2026 में दुनिया पर मंडरा रहा है आर्थिक मंदी और वैश्विक संकट का बड़ा खतरा? पढ़ें ज्योतिषीय भविष्यवाणी

Published by : Radheshyam Kushwaha Updated At : 18 May 2026 3:11 PM

विज्ञापन

ज्योतिषीय भविष्यवाणी

Astrology Prediction: क्या 2026 के मध्य में ग्रहों की खतरनाक चाल दुनिया को आर्थिक संकट, युद्ध और राजनीतिक उथल-पुथल की ओर धकेल सकती है? जानिए ज्योतिषीय संकेत क्या चेतावनी दे रहे हैं. पढ़ें काशी के ज्योतिषाचार्य की भविष्यवाणी

विज्ञापन

Astrology Prediction: साल 2026 का मध्यकाल केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय संकेतों के अनुसार भी बेहद अशांत और भयावह माना जा रहा है. दुनिया भर में बढ़ते कर्ज, युद्ध जैसे हालात, तेल संकट, व्यापारिक टकराव और आर्थिक अस्थिरता के बीच अब ग्रहों की खतरनाक चाल चिंता और बढ़ा रही है. इस दौरान देवगुरु बृहस्पति का अस्त होना, मंगल और सूर्य की उग्र स्थिति तथा राहु-केतु के प्रभाव के बीच सूर्य ग्रहण वैश्विक स्तर पर बड़े आर्थिक भूचाल, राजनीतिक उथल-पुथल और अचानक संकटों के संकेत दे रहा है. आइए जानते है काशी के ज्योतिषाचार्य पं. प्रशांत पाण्डेय से कि ग्रहों की यह स्थिति देश दुनिया के लिए कितना भयावह साबित हो सकता है.

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में वित्तीय संकट की चेतावनी

भारत के प्रधानमंत्री Sri Narendra Modi तथा भारत सरकार की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट से लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं तक ने संभावित वैश्विक मंदी और बड़े वित्तीय संकट की चेतावनी दी है. ऐसे समय में जब आम लोगों की बचत, रोजगार और बाजार व्यवस्था पहले से दबाव में हैं, तब आकाश में बनने वाले दुर्लभ ग्रह योग चिंता को और बढ़ा रहे हैं. 2 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में उच्च अवस्था में प्रवेश करेंगे, लेकिन इसके तुरंत बाद 14 जुलाई से 13 अगस्त तक गुरु अस्त हो जाएंगे. गुरु का अस्त होना ज्ञान, अर्थव्यवस्था, बैंकिंग व्यवस्था और वैश्विक स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाला माना जाता है. ज्योतिषीय गणनाएं बता रही हैं कि यह समय दुनिया के लिए बेहद निर्णायक और भयावह साबित हो सकता है.

अस्त देव गुरु बृहस्पति का प्रभाव होगा कम

14 जुलाई 2026 से 13 अगस्त 2026 तक गुरु अस्त रहेंगे. ज्योतिष में यह वह अवस्था मानी जाती है, जब गुरु ग्रह सूर्य के अत्यधिक निकट होते है. यह अवधि मुख्यतः पुष्य नक्षत्र में घटित होगी. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस समय विवाह, बड़े निवेश, नए कार्यों की शुरुआत तथा दीर्घकालिक आर्थिक निर्णयों से बचने की सलाह दी जाती है. इसके बाद इसी कर्क राशि में, आश्लेषा नक्षत्र के अंतर्गत, पूर्ण सूर्य ग्रहण की स्थिति बनेगी. कूर्म चक्र (Koorma Chakra) ज्योतिष के अनुसार इस ग्रहण का प्रभाव विशेष रूप से पश्चिमी यूरोप, नॉर्डिक देशों तथा अटलांटिक क्षेत्र से जुड़े राष्ट्रों पर अधिक माना जा रहा है, जबकि भारत में यह सूर्य ग्रहण दृश्य नहीं होगा.

आर्थिक अस्थिरता और वैश्विक तनाव के संकेत

ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार, जब-जब पाप ग्रहों के प्रभाव के बीच ग्रह अस्त एवं सूर्य ग्रहण जैसी घटनाएं बनी हैं, तब-तब विश्व स्तर पर अस्थिरता और बड़े संकट देखने को मिले हैं. कुछ ज्योतिषीय गणनाएं कोरोना महामारी, ईरान–अमेरिका/इजराइल तनाव तथा पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्षों को भी इसी प्रकार के ग्रह योगों से जोड़कर देखते हैं. वर्तमान गोचर में कर्क राशि, जहां सूर्य ग्रहण एवं गुरु अस्त जैसी महत्वपूर्ण स्थितियां बनने जा रही हैं, उसके अष्टम भाव के समीप शनि एवं राहु का प्रभाव दिखाई देता है. वैदिक ज्योतिष में यह योग अचानक उथल-पुथल, अप्रत्याशित घटनाओं, आर्थिक अस्थिरता तथा वैश्विक तनाव का संकेत माना जाता है. इसके अतिरिक्त, कुछ महीनों बाद गुरु पर शनि एवं राहु-केतु अक्ष का षष्ठ एवं अष्टम भाव से प्रभाव और अधिक प्रबल होगा. यह स्थिति एक विशेष प्रकार के पापकर्तरी योग जैसी परिस्थिति निर्मित कर सकती है, जिसके कारण कर्क राशि में बनने वाले सूर्य ग्रहण एवं गुरु अस्त के बाद वैश्विक परिस्थितियां और अधिक गंभीर रूप ले सकती हैं.

1970 के दशक जैसा बन रहा है खतरनाक ग्रह संयोग

यदि हाल के इतिहास को भारत के दृष्टिकोण से देखा जाए, तो कर्क–मकर अक्ष पर पाप ग्रहों के प्रभाव के दौरान भारत–चीन संबंधों में तनाव अथवा संघर्षपूर्ण परिस्थितियां कई बार देखने को मिली हैं. यद्यपि मंगल इस अक्ष में प्रत्यक्ष रूप से स्थित नहीं होगा, फिर भी उसका पाप वेध प्रभाव तनाव, सामरिक विवाद और अप्रत्याशित परिस्थितियों को बढ़ाने वाला माना जा सकता है. इन आगामी कठिन ग्रह गोचरों का प्रभाव जुलाई 2026 के मध्य से वैश्विक स्तर पर दिखाई देना प्रारंभ हो सकता है. ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय विश्व को अगले 1–2 वर्षों तक आर्थिक, राजनीतिक और सामरिक संघर्षों की ओर ले जा सकता है. कुछ संकेत 1970 के दशक जैसी वैश्विक आर्थिक मंदी की परिस्थितियों की ओर भी इशारा करते हैं.

उथल-पुथल के बीच शुक्र बनेंगे सुख और धन के रक्षक

हालांकि राहत का पक्ष यह है कि शुक्र ग्रह अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में रहेगा. यद्यपि उस पर पाप ग्रहों का प्रभाव अवश्य रहेगा, फिर भी बड़े स्तर पर वैश्विक वित्तीय संस्थानों के पूर्ण ध्वस्त होने जैसी संभावना अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है. एक अत्यंत महत्वपूर्ण बात, जो हमारा ध्यान आकर्षित करती है, वह यह है कि वैदिक ज्योतिष में ग्रह अस्त एवं ग्रहण जैसी घटनाओं का कोई पूर्ण निवारण वर्णित नहीं है. शास्त्रों में जप, दान, तप, पूजा एवं साधना जैसे उपायों को मानसिक स्थिरता, आध्यात्मिक बल तथा सकारात्मक संकल्प को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है.

Also Read: पीली सरसों से पांच दिनों तक करें ये उपाय, दूर होगी नकारात्मक ऊर्जा और घर में आएगी सुख-शांति

विज्ञापन
Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola