श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिन वृंदावन से आये प्रियाबल्लभ कुंज ने कहा

Published at :31 Mar 2015 11:02 PM (IST)
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श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिन वृंदावन से आये प्रियाबल्लभ कुंज ने कहा

अकारण पेड़ न काटेंफोटो : 31 जाम 26 कथा सुनाते ललित बल्लभ, 27 उपस्थित भक्त गण प्रतिनिधि, विद्यासागर मलिया बागान में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह के द्वितीय दिन के कथा में प्रियाबल्लभ कुंज वृंदावन से आये. वे भागवत रत्न विभूषित हित ललित बल्लभ नागार्च ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मानव संस्कृति से […]

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अकारण पेड़ न काटेंफोटो : 31 जाम 26 कथा सुनाते ललित बल्लभ, 27 उपस्थित भक्त गण प्रतिनिधि, विद्यासागर मलिया बागान में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह के द्वितीय दिन के कथा में प्रियाबल्लभ कुंज वृंदावन से आये. वे भागवत रत्न विभूषित हित ललित बल्लभ नागार्च ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मानव संस्कृति से वृक्षों की संस्कृति पुरातन है. अकारण वृक्षों को कटना मानव हित में नहीं है. यदि वृक्ष नहीं होंगे तो मानव संस्कृति भी नहीं होगी. वहीं उन्होंने संतों की महिमा का भी बखान किया. देवर्षि नारद ने अपनी आत्मकथा में स्वयं बताया कि मैं पहले दासी पुत्र था. मेरी मां ने संतों की सेवा की. बचपन से ही सत्संग लाभ प्राप्त किया. नारद जी कहते हैं संतों की भाषा कितनी मधुर है यदि इनका भोजन किया हुआ अवशेष मुझे प्राप्त हो जाय तो मेरा कल्याण हो जायेगा. नारद ने संतों से उनकी जूठन मांगी लेकिन संतों ने मना कर दिया. नारद जी कहते हैं की झूठी पत्तल से शीश प्रसाद निकाल कर मुंह में डाल लिया. नारद जी कहते हैं यही एक कारण है कि मैं दासी पुत्र से ब्रम्हा जी का बेटा बन गया. नागार्च जी ने देवहुति करदम प्रसंग को श्रवण कराते हुए कपिल देव अवतार का प्रसंग श्रवण कराया और कटा माता देवहूति को कपिल देव जी ने दिव्य आत्मज्ञान प्रदान किया. कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित होकर धर्म लाभ ले रहे हैं. कथा पांच अपै्रल तक चलेगी. प्रात: काल मंे शिव मंदिर से वृंदावन से पधारे राधाबल्लभ संप्रदाय के नाद शाखा के आचार्य विष्णु मोहन नागार्च जी का अगुआई में प्रतिदिन भी निकाली जा रही है. श्रीमद्भागवत सेवा समिति ने श्रद्धालुओं से धर्मलाभ लेने का निवेदन किया है.

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