11.1 C
Ranchi

लेटेस्ट वीडियो

झारखंड के बिदू-चांदान की प्रेम कहानी ने संताली समाज को दी ओलचिकी लिपि, अब होती है पूजा

Valentine Day Special: झारखंड के बिदू-चांदाना की प्रेम कहानी ने संताली समाज को ओलचिकी लिपी की सौगात दी. कभी समाज उनके प्रेम का विरोधी था. आज लोग इन्हें विद्या की देवी और देवता के रूप में पूजते हैं.

Valentine Day Special| जमशेदपुर, दशमत सोरेन : 14 फरवरी को दुनिया वेलेंटाइन डे मनाती है. प्रेम के प्रतीक संत वेलेंटाइन की स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है. दुनिया को प्रेम का संदेश देने के लिए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी. ऐसी ही एक अमर प्रेम कहानी आदिवासी संताल समुदाय में बिदू-चांदान की कहानी काफी प्रचलित है. यह समुदाय विद्या के देवी-देवता के रूप में चांदान और बिदू की पूजा-अर्चना करते हैं.

बिदू-चांदान की प्रेम कहानी

बिदू-चांदान को भी दुनिया वाले कभी एक होने नहीं देना चाहते थे, लेकिन प्रेम को कभी कोई रोक पाया है भला? वे एक-दूसरे से दूर रहकर भी मुलाकात और बातचीत कर लेते थे. जब उनकी मुलाकात नहीं हो पाती थी, तो वे चित्र लिपि में लिखकर बातचीत कर लेते थे. वे अपनी बातें पेड़ या पत्थर पर चित्र लिपि (सांकेतिक लिपि) में उकेर देते थे. उस चित्र लिपि को उनके अलावा दूसरा कोई नहीं समझ पाता था. बाद में यही चित्र लिपि संतालों की ओलचिकी लिपि बनी और उनकी आंखें खोल दी.

Valentines Day Ol Chiki Lipi 1
सरायकेला-खरसावां के राजनगर प्रखंड के जामजोड़ा बाहा डुंगरी में विद्या के देवी-देवता चांदान-बिगू की पूजा-अर्चना करते संताली समुदाय के लोग. फोटो : प्रभात खबर

जिस तरह संत वेलेंटाइन ने अपनी अंधी प्रेमिका को अपनी आंखें दान करके उसे पूरी दुनिया दिखा दी, उसी तरह बिदू-चांदान की प्रेम कहानी में उकेरी गयी चित्र लिपि ने पूरे संताल समुदाय को एक लिपि दी. संताल समाज के लिए गौरव की बात है कि आज उनकी मातृभाषा संताली की लिपि, चित्र लिपि से शुरू होकर ओलचिकी बनने तक का सफर तय किया और भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में भी शामिल हो गया.

सामाजिक बदलाव का प्रतीक और पहचान बनी बिदू-चांदान की प्रेम कहानी

बुजुर्गों की मान्यताओं के अनुसार, आदिवासी समाज के दो प्रमुख गढ़, चायगाढ़ और मानगाढ़ की पुरानी दुश्मनी को समाप्त करने के लिए लिटा गोसाई ने बोंगा दिशोम (देव लोक) से बिदू और चांदान को धरती पर भेजा. बिदू का जन्म बाहागढ़ के घने जंगलों में हुआ, जबकि चांदान चायगाढ़ के मांझी बाबा के घर पैदा हुईं. एक दिन बिदू घूमते-फिरते चायगाढ़ पहुंचा और वहां के सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल हुआ. इसी दौरान, बिदू और चांदान के बीच प्रेम हो गया, लेकिन चायगाढ़ के लोगों और चांदान के पिता को यह रिश्ता स्वीकार नहीं था. उन्होंने बिदू की पिटाई कर दी. किसी तरह बिदू उनके चंगुल से बचकर जंगल की ओर भाग निकला.

झारखंड की ताजा खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

चायगाढ़ के लोगों ने उसका पीछा किया, लेकिन वह दिखाई नहीं दिया. लोगों ने मान लिया कि वह मर चुका है. जबकि, भागते हुए बिदू ने पत्थरों पर एक विशेष लिपि में संदेश लिखा कि वह सुरक्षित है और कहां छिपा है. यह लिपि केवल चांदान समझ सकती थी, क्योंकि दोनों ने अपनी बातचीत और विचारों के आदान-प्रदान के लिए इस लिपि का आविष्कार किया था. जब चांदान ने पत्थरों पर लिखे संकेत पढ़े, तो वह समझ गयी कि बिदू जीवित है और कहां पर है. इसके बाद दोनों का पुनर्मिलन हुआ और इसी ऐतिहासिक घटना से संताल आदिवासी समाज में ओलचिकी लिपि की शुरुआत हुई. यह प्रेम कहानी न केवल सामाजिक बदलाव का प्रतीक बनी, बल्कि आदिवासी समाज को अपनी पहली मौलिक लिपि भी प्रदान की, जो आज भी उनकी पहचान बनी हुई है.

ओलचिकी के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू बिदू-चांदान की करते थे पूजा

ओलचिकी के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू विद्या के देवी-देवता के रूप में चांदान और बिदू की पूजा करते थे. उन्होंने बिदू-चांदान के द्वारा उकेरी गयी चित्र लिपि का विस्तार कर ओलचिकी लिपि का अविष्कार किया. उन्होंने संताली भाषा की ओलचिकी लिपि को आगे बढ़ाने व जन-जन तक पहुंचाने के लिए काम किया. उन्होंने अनेकों किताबें लिखी, जिसमें अल चेमेद, परसी पोहा, रोनोड़, ऐलखा हितल, बिदू चांदान, खेरबाड़ वीर आदि प्रमुख हैं. गुरू गोमके ने ओलचिकी लिपि जन-जन तक पहुंचाने के लिए इतुन आसड़ा (शिक्षण केंद्र) की स्थापना की.

राजनगर के जामजोड़ा बाहा डुंगरी में हुई बिदू-चांदान की पूजा

गुरू गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू का मानना था कि विद्या के देवी-देवता चांदान-बिदू की प्रेरणा से ही उन्होंने संतालों की मातृभाषा संताली की लिपि ओलचिकी की खोज की. संताल समाज के लोगों ने गुरू गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू के बताये व दिखाये मार्ग का अनुसरण किया. वे भी विद्या के देवी-देवता के रूप में बिदू-चांदान की पूजा-अर्चना करते हैं. सरायकेला जिले के राजनगर प्रखंड अंतर्गत जामजोड़ा बाहा डुंगरी में मंगलवार को माघ पूर्णिमा के दिन संताल समुदाय के लोगों का महाजुटान हुआ. संतालों ने पारंपरिक रीति-रिवाज से अपने विद्या के देवी-देवता बिदू-चांदान की सामूहिक पूजा-अर्चना की. यहां प्रतिवर्ष विद्या के देवी-देवता बिदू-चांदान की माघ पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना की जाती है. जामजोड़ा में तीन दिवसीय सामूहिक पूजा-अर्चना व गोष्ठी समेत अन्य कार्यक्रमों का आयोजन होता है.

इसे भी पढ़ें

राजधानी एक्सप्रेस का समय बदला, रांची से चलने वाली इन ट्रेनों को कर दिया गया रद्द, यहां देखें लिस्ट

झारखंड में मंत्री के काफिले की 3 गाड़ियां आपस में टकरायी, बीडीओ समेत 5 घायल

दुनिया के सबसे प्रेरणादायक लोगों में शुमार हुईं सिस्टर लूसी कुरियन, ‘कॉल 100’ की लिस्ट में 7वें नंबर पर

गालूडीह में मां की डांट से नाराज 7वीं के छात्र ने ट्रेन से कटकर दे दी जान, माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल

Mithilesh Jha
Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

संबंधित ख़बरें

Trending News

जरूर पढ़ें

वायरल खबरें

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel