कोडरमा के डगरनवां में एक ही गड्ढे से पानी पीते हैं आदमी और सूअर, सीएम हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान

कोडरमा के डगरनंवा पंचायत में एक ही गड्ढे से पानी निकालतीं ग्रामीण महिलाएं और उसी से पानी पीता जंगली सूअर. फोटो: साभार एक्स
Ranchi News: कोडरमा के मरकच्चो प्रखंड स्थित डगरनवां पंचायत में ग्रामीण और जंगली सूअर एक ही गड्ढे का पानी पीने को मजबूर हैं. सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को जांच कर प्रभावित ग्रामीणों को जल्द सहायता पहुंचाने का निर्देश दिया है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
रांची से सुनील चौधरी की रिपोर्ट
Ranchi News: झारखंड के कोडरमा जिले से मानवता को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है. मरकच्चो प्रखंड के डगरनवां पंचायत स्थित कारी पहाड़ी और चटनिया दह गांवों में लोग पिछले करीब 20 वर्षों से पीने के पानी के लिए बेहद बदहाल स्थिति में जीवन गुजार रहे हैं. यहां ग्रामीण और जंगली सूअर एक ही गड्ढे का पानी इस्तेमाल करने को मजबूर हैं. यह मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तुरंत संज्ञान लिया है. मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कोडरमा के उपायुक्त को मामले की जांच कर प्रभावित लोगों को जल्द राहत पहुंचाने का निर्देश दिया है.
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा- स्थिति स्वीकार्य नहीं
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक्स पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की स्थिति बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने उपायुक्त को निर्देश देते हुए कहा कि मामले की तत्काल जांच कर ग्रामीणों को शीघ्र सहायता उपलब्ध कराई जाए और कार्रवाई की जानकारी भी साझा की जाए. मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है. अब उम्मीद जताई जा रही है कि लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं से वंचित ग्रामीणों को जल्द राहत मिल सकती है.
20 वर्षों से गड्ढे का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण
सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, डगरनवां पंचायत के कारी पहाड़ी और चटनिया दह गांवों में लगभग 100 लोग बीते दो दशकों से साफ पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं. ग्रामीणों के पास पानी का कोई स्थायी स्रोत नहीं है. लोग जोरिया, डोभा और नदी के किनारे गड्ढा खोदकर पानी निकालते हैं और उसी का उपयोग पीने के लिए करते हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस पानी का इस्तेमाल ग्रामीण करते हैं, उसी में जंगली सुअर भी नहाते और पानी पीते हैं.
आदिवासी परिवारों की बदहाल जिंदगी
गांव में रहने वाले अधिकांश परिवार आदिवासी समुदाय से जुड़े हैं. ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आज तक शुद्ध पेयजल की सुविधा नहीं मिल सकी. कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है. दूषित पानी के कारण लोगों के बीमार पड़ने का खतरा बना रहता है, लेकिन मजबूरी में वही पानी पीना पड़ता है.
स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव
डगरनवां पंचायत के इन गांवों में केवल पेयजल ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुविधाओं की भी भारी कमी है. ग्रामीणों ने बताया कि आसपास कोई समुचित स्वास्थ्य केंद्र नहीं है. बीमारी की स्थिति में लोगों को दूर-दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है. दूषित पानी के कारण कई तरह की बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है.
ग्रामीणों ने सरकार से लगाई मदद की गुहार
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से गांव में जल्द शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं. गांव के लोगों ने यह भी कहा कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए. ग्रामीणों की मांग है कि गांव में पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जाए और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाए.
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प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी लोगों की नजर
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब लोगों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है. ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि वर्षों पुरानी इस समस्या का समाधान जल्द निकलेगा और उन्हें इंसानों जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल सकेंगी.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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