क्या है वीबी-जी राम जी अधिनियम? किस तरह लेगा यह मनरेगा की जगह

Published by :ArbindKumar Mishra
Published at :11 May 2026 9:41 PM (IST)
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VB-G Ram Ji

काम करते मजदूर, फोटो एक्स

VB-G Ram Ji Act: केंद्र सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि नया विकसित भारत रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 देशभर में एक जुलाई से लागू होगा. यह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह ले लेगा.

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VB-G Ram Ji Act: सरकार के अनुसार इस कानून के तहत ग्रामीण रोजगार गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन प्रति वर्ष की जाएगी. हालांकि, विपक्षी दलों और श्रम अधिकार कार्यकर्ताओं ने मनरेगा को समाप्त करने पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि यह अधिकारों पर आधारित सामाजिक सुरक्षा योजना थी और नए अधिनियम में डिजिटल प्रक्रिया, चेहरे का सत्यापन और प्रशासनिक बदलाव श्रमिकों के लिए समस्याएं पैदा कर सकते हैं.

नए कानून से क्या बदलेगा?

नए कानून के तहत ऐसे हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी प्राप्त होगी. पहले यह सीमा 100 दिन की थी. केंद्र सरकार ने कहा कि यह योजना चार व्यापक कार्य श्रेणियों पर केंद्रित होगी, जिनमें जल संरक्षण परियोजनाएं; बुनियादी ग्रामीण ढांचा परियोजनाएं; आजीविका से संबंधित परियोजनाएं; और मौसम संबंधी चुनौतियों से निपटने की परियोजनाएं शामिल हैं. इस कानून में विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) शामिल की गई है. इसके तहत ग्राम पंचायतें अपने इलाके के विकास के लिए एक संयुक्त योजना तैयार करेंगी, और इस योजना को ग्राम सभा की मंजूरी लेनी होगी. सरकार के अनुसार, इस कानून के तहत सभी काम इन्हीं ग्राम विकास योजनाओं के आधार पर ही किए जाएंगे. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास कार्य लोगों की जरूरतों के हिसाब से हों और हर क्षेत्र का संपूर्ण व संतुलित विकास किया जा सके.

नए कानून का कार्यान्वयन कैसे होगा?

केंद्र ने कहा है कि मनरेगा की जगह नए कानून का कार्यान्वयन सुचारु और निर्बाध होगा. मौजूदा मनरेगा कार्य जारी रहेंगे और उन्हें नए कानून के तहत उन्हें ढाला जाएगा. सरकार ने कहा है कि अधूरे सार्वजनिक कार्य और परियोजनाएं पूरी करने को प्राथमिकता दी जाएगी. जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं किए जाते तब तक उन श्रमिकों के लिए जॉब कार्ड अस्थायी रूप से मान्य रहेंगे, जिनकी ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है.

क्या चीजें अपरिवर्तित रहेंगी?

रोजगार की मांग करने के 15 दिन के अंदर रोजगार देना अनिवार्य रहेगा, ऐसा न करने पर श्रमिक राज्य सरकारों की ओर से दिए जाने वाले बेरोजगारी भत्ते के पात्र होंगे. मजदूरी का भुगतान बैंक या डाकघर खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से जारी रहेगा और यह साप्ताहिक या ‘मस्टर रोल’ बंद होने के बाद 15 दिन के अंदर करना होगा. ‘मस्टर रोल’ एक आधिकारिक रजिस्टर या हाजिरी रिकॉर्ड होता है जिसमें किसी काम पर लगे मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जाती है. इस कानून में यह प्रावधान भी बनाए रखा गया है कि यदि मजदूरी का भुगतान देर से होता है, तो श्रमिकों को उसका मुआवजा (क्षतिपूर्ति) दिया जाएगा.

नए प्रशासनिक प्रावधान क्या हैं?

कार्यस्थलों पर उपस्थिति दर्ज करने के लिए अब चेहरे की पहचान पर आधारित प्रणाली उपयोग की जाएगी. हालांकि सरकार ने यह भी कहा है कि जहां खराब इंटरनेट सुविधा, तकनीकी समस्या या अन्य वास्तविक कठिनाइयां होंगी, वहां छूट दी जाएगी. कृषि सीजन के चरम पर होने (जैसे बुवाई और कटाई के समय) के दौरान दूसरे काम करने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. यह अवधि राज्य सरकारें तय करेंगी, ताकि खेती के समय मजदूरों की कमी न हो.

वित्तपोषण कैसे होगा?

इस योजना के तहत राज्यों को मिलने वाला फंड अलग-अलग होगा. उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य का अनुपात 90:10 रहेगा. अन्य राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह 60:40 होगा. जबकि बिना विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्र सरकार से शत प्रतिशत से फंड मिलेगा. इसके अलावा, जिला स्तर पर सामग्री से जुड़े खर्च को 40 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है. पहले मनरेगा के तहत मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, जबकि सामग्री का खर्च केंद्र और राज्यों के बीच 75:25 के अनुपात में साझा होता था.

सरकार की नजर में नया कानून क्यों जरूरी है?

सरकार का कहना है कि यह नयी व्यवस्था ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, क्योंकि इसमें आजीविका सहायता, बुनियादी ढांचा निर्माण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता को एकीकृत किया गया है. अधिकारियों के अनुसार, यह कानून केवल मांग आधारित मजदूरी कार्यक्रम से आगे बढ़कर एक ऐसा विकास मॉडल खड़ा करेगा जिसमें ग्राम स्तर पर बेहतर योजना और समन्वय होगा. सरकार यह भी कहती है कि इसमें मौसम संबंधी चुनौतियों (जैसे बाढ़, सूखा आदि) से निपटने की व्यवस्था को शामिल करना ग्रामीण भारत की बढ़ती जलवायु चुनौतियों का समाधान है.

क्या चिंताएं जताई जा रही हैं?

विपक्षी दलों और अधिकार कार्यकर्ताओं ने मनरेगा को पूरी तरह समाप्त करने के फैसले पर सवाल उठाए हैं, और मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय खत्म करने पर आपत्ति जताई है. मनरेगा एक मांग-आधारित योजना है, जिसका मतलब है कि अगर काम की मांग हुई तो सरकार को अतिरिक्त धन आवंटित करना पड़ता है. वीबी-जी राम जी विधेयक में राज्यों को तय धनराशि देने का प्रावधान है, और उससे अधिक खर्च का बोझ राज्यों को उठाना होगा. कुछ कार्यकर्ताओं को आशंका है कि अनिवार्य चेहरा सत्यापन उपस्थिति प्रणाली से दूरदराज के क्षेत्रों के वे मजदूर योजना से बाहर हो सकते हैं, जहां डिजिटल कनेक्टिविटी कमजोर है. उनका मानना है कि इससे वे बुजुर्ग भी योजना से बाहर हो सकते हैं, जिनकी पहचान के सत्यापन में समस्या आती है.

भूमिहीन मजदूरों की कमाई के अवसर घटने की आशंका

यह भी आशंका जताई गई है कि कृषि सीजन के चरम पर होने के दौरान दूसरे काम पर प्रतिबंध लगाने से भूमिहीन मजदूरों की कमाई के अवसर घट सकते हैं. आलोचकों ने यह भी स्पष्ट करने की की मांग की है कि क्या 125 दिन के गारंटीशुदा रोजगार के लिए पर्याप्त बजट आवंटन होगा, क्योंकि पहले से ही मनरेगा के तहत मजदूरी के भुगतान और फंड जारी करने में देरी जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं.

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ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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