ब्लूमबर्ग का दावा, 2030 के बाद भी सत्ता में बने रहेंगे पीएम मोदी

Published by :Pritish Sahay
Published at :11 May 2026 7:51 PM (IST)
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PM Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फोटो- पीटीआई

PM Modi: ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी साल 2030 के बाद भी सत्ता में बने रह सकते हैं. हाल के चुनावी नतीजों में बीजेपी के बढ़े कद और पश्चिम बंगाल में मिली बंपर जीत के आधार पर ब्लूमबर्ग ने यह एनालाइसिस की है.

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PM Modi: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत ने साफ संकेत दे दिया है कि देश की राजनीति में बीजेपी का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है. 2026 के चुनाव में बंगाल में कमल सिर्फ खिला ही नहीं, बल्कि ऐसा भगवा लहराया जिसने टीएमसी की 15 साल पुरानी सत्ता को ध्वस्त कर दिया. वहीं, असम में लगातार तीसरी जीत और केरल-तमिलनाडु जैसे राज्यों में पार्टी की बढ़ती पकड़ ने भी यह साबित किया कि बीजेपी का जनाधार तेजी से विस्तार कर रहा है.

इन सफलताओं के केंद्र में कहीं न कहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और नेतृत्व शामिल है. यह न सिर्फ एनडीए की राजनीतिक मजबूती को दिखा रहा है, बल्कि यह भी संकेत दे रहा है कि देश की नब्ज पर पीएम मोदी की पकड़ अभी भी बेहद मजबूत है. बदलते वोटिंग ट्रेंड्स और राजनीतिक समीकरण इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि आने वाले सालों में भी पीएम मोदी भारतीय राजनीति के केंद्र में बने रह सकते हैं. ब्लूमबर्ग (Bloomberg) की एक रिपोर्ट ने भी इस आकलन को और मजबूती दी है.

2029 में बहुमत हासिल करने के रास्ते पर पीएम मोदी- ब्लूमबर्ग

पिछले सप्ताह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत और दक्षिण भारत के राज्यों तमिलनाडु और केरल में सत्ता परिवर्तन ने विपक्ष को झटका दिया है. इन नतीजों ने यह संकेत दिया है कि भारतीय जनता पार्टी का प्रभाव अब केवल हिंदी पट्टी या उत्तरी राज्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में भी तेजी से बढ़ रहा है. ब्लूमबर्ग (Bloomberg) के वोटिंग पैटर्न पर आधारित एक विश्लेषण के अनुसार 75 साल के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी उस राजनीतिक रणनीति को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रहे हैं, जिसका लक्ष्य 2029 में होने वाले अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को फिर से पूर्ण बहुमत दिलाना है.

2030 के बाद भी सत्ता में बने रह सकते हैं पीएम मोदी

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक फिर से मजबूत हुए मोदी ने 2030 के बाद भी भारत में सत्ता में बने रहने का रास्ता साफ कर दिया है. वोटिंग के रुझानों के विश्लेषण से पता चलता है कि बीजेपी के नेता हिंदू बहुसंख्यक आबादी को एकजुट करने में कामयाब हो रहे हैं. 2024 की भारत की झुलसा देने वाली गर्मियों में, राष्ट्रीय चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की थोड़ी सी लड़खड़ाहट ने यह संकेत दिया था कि उनका एक दशक लंबा शासन शायद अब खत्म होने वाला है. लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि वह अगले दशक तक भी सत्ता में बने रहने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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