‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स’ की 80वीं बरसी पर गोपाल मुखर्जी के साहस को नमन, शमिक भट्टाचार्य बोले- इतिहास को कभी न भूलें

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शमिक भट्टाचार्य और गोपाल मुखर्जी उर्फ गोपाल पांठा.

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Great Calcutta Killings 80 Years: ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स’ की 80वीं बरसी पर बंगाल बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने 1946 के नायक गोपाल मुखर्जी के साहस को नमन किया. लोगों से अपील की कि वर्तमान और भविष्य को सुरक्षित रखना है, तो अतीत को न भूलें.

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Great Calcutta Killings 80 Years: 16 अगस्त 1946 को हुए भयावह ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स’ (Direct Action Day) के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने इतिहास के इस काले पन्ने को याद करते हुए एक भावुक संदेश साझा किया. सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट में उन्होंने इस दिन को इतिहास से सीख लेने और आत्मचिंतन करने का अवसर बताया.

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इतिहास भूलने पर अस्तित्व संकट में पड़ता है : शमिक

शमिक भट्टाचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में लिखा- 16 अगस्त 1946 की अंधेरी रात हर भारतीय को याद दिलाती है कि समाज, संस्कृति और अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए इतिहास की भूलों को कभी भुलाना नहीं चाहिए.

गोपाल मुखर्जी को नमन, अतीत से सीखने की अपील

पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भट्टाचार्य ने उस भयानक संकट के दौरान निर्भीक होकर निहत्थे नागरिकों की रक्षा करने वाले ‘हिंदूवीर’ गोपाल मुखर्जी (गोपाल पांठा) के अदम्य साहस, आत्मत्याग और प्रतिरोध को नमन किया. उन्होंने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि अतीत में की गयी गलतियों का दोहराव भविष्य में कभी न हो. इतिहास याद रखना ही वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा की कुंजी है.

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क्या था ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स’?

16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग द्वारा अलग पाकिस्तान की मांग को लेकर घोषित ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ के बाद कोलकाता में भीषण सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी. इस नरसंहार में हजारों निर्दोष लोगों की जान चली गयी थी. संकट की इस घड़ी में गोपाल चंद्र मुखोपाध्याय (गोपाल पांठा) ने स्थानीय युवाओं को संगठित कर आत्मरक्षा व प्रतिरोध का नेतृत्व किया था.

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