वंदे मातरम विवाद : बंकिम चंद्र के वंशज ने सोनिया गांधी से की बिना शर्त माफी की मांग, शुभेंदु बोले- यह राष्ट्रवाद का अपमान

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सुमित्रो चटर्जी और सोनिया गांधी.

Vande Mataram Controversy: कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के गायन से जुड़े विवाद पर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी से बिना शर्त माफी की मांग की है. शुभेंदु अधिकारी ने इसे राष्ट्रवाद और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का अपमान करार दिया है.

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Vande Mataram Controversy: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नयी दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के गायन से जुड़े कथित विवाद पर राजनीति गरमा गयी है. बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर इस घटना पर बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि ‘वंदे मातरम्’ के गायन पर सोनिया गांधी की ओर से जतायी गयी आपत्ति राष्ट्रवाद और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का अपमान है.

सुमित्रो चटर्जी बोले- वंदे मातरम से असहज दिखीं सोनिया गांधी

बंकिम चंद्र के वंशज सुमित्रो चटर्जी नैहाटी से विधायक भी हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि 15 अगस्त को 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाये जाने के दौरान शीर्ष नेतृत्व में असहजता देखी गयी. इसे बीच में ही रोकने के प्रयास किये गये.

ऐतिहासिक भूलों का शर्मनाक दोहराव : सुमित्रो

सोनिया गांधी को भेजे गये पत्र में सुमित्रो चटर्जी ने राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व का विवरण देते हुए कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाये. उन्होंने लिखा- स्वतंत्र भारत में ‘वंदे मातरम्’ को पूरा गाने में हिचक दिखाना खुदीराम बोस, बाल गंगाधर तिलक और उन तमाम शहीदों के बलिदान का अपमान है, जिन्होंने इस मंत्र को गाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिये.

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चटर्जी ने 1937 का दिया उदाहरण

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की यह नीति नयी नहीं है. वर्ष 1937 में भी पार्टी मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुक गयी थी और गीत को छोटा कर दिया गया था. आज फिर वही रवैया दोहराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ किसी एक पार्टी की संपत्ति नहीं, बल्कि देश की सामूहिक चेतना और बंकिम चंद्र की अमर विरासत है. इस घटना से पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है.

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इतिहास का हवाला देकर कांग्रेस को घेरा

सुमित्रो चटर्जी ने पत्र में उल्लेख किया कि वर्ष 1896 के कलकत्ता अधिवेशन में स्वयं रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे गाया था. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी ने इसे प्रस्तुत किया था. उन्होंने सवाल उठाया कि जब बंगाल में कांग्रेस की छात्र इकाई (छात्र परिषद) अपने नारे में ‘वंदे मातरम्’ का इस्तेमाल करती है, तो दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व को इससे असहजता क्यों होती है?

इतिहास किसी को माफ नहीं करता : चटर्जी

सुमित्रो चटर्जी ने चेतावनी दी कि ‘इतिहास किसी को माफ नहीं करता’. कांग्रेस की सर्वोच्च नेता सोनिया गांधी को इस घटना पर आत्ममंथन करते हुए देशवासियों और बंगाल की जनता से तुरंत माफी मांगनी चाहिए.


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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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