वैदिक मंत्र सीख रहे पटमदा के आदिवासी बच्चे, शाम होते ही मंत्रों से गूंज उठता है कुलटांड

Updated at : 16 Jan 2025 1:24 AM (IST)
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वैदिक मंत्र सीख रहे पटमदा के आदिवासी बच्चे, शाम होते ही मंत्रों से गूंज उठता है कुलटांड

निखिल सिन्हा, जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा में एक गांव है कुलटांड, प्रकृति के गोद में बसे आदिवासी बहुल इस गांव में 28 परिवार रहता है, जिसमें हो, मुंडा और संताली शामिल हैं.

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-पूर्वी सिंहभूम के कुलटांड में है वैदिक पाठशाला

-28 परिवार के 45 बच्चे रोजाना शाम में वैदिक पाठशाला में होते हैं शामिल

-फर्राटे के साथ वैदिक मंत्रों का करते हैं उच्चारण

-मानस सत्संग समिति के संयोजक यज्ञाधीश पूज्य श्री जम्मू वाले बाबा बच्चों को दे रहे वैदिक ज्ञान

निखिल सिन्हा, जमशेदपुर :

पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा में एक गांव है कुलटांड, प्रकृति के गोद में बसे आदिवासी बहुल इस गांव में 28 परिवार रहता है, जिसमें हो, मुंडा और संताली शामिल हैं. गांव के बच्चे सरकारी स्कूलों में आधुनिक शिक्षा के साथ शाम में वैदिक शिक्षा भी हासिल कर रहे हैं. अंग्रेजी, गणित और विज्ञान के साथ वेदों की पढ़ाई कर रहे हैं. इसके लिए करीब दो वर्ष पहले गांव के शिव शक्ति पंचमुखी हनुमान मंदिर में वैदिक पाठशाला की स्थापना की गयी. यहां के बच्चे फर्राटे से संस्कृत में आयुर्वेद और ऋग्वेद के श्लोक बोलते हैं. इन बच्चों को गीता- रामायण के दर्जनों श्लोक कंठस्थ हैं. ये बच्चे घर में हो, मुंडारी और संताल बोलते है. लेकिन उनका संस्कृत में मंत्रोच्चार सुन कर आप मंत्रमुग्ध हो जायेंगे. इसका उद्देश्य बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी पारंपरिक शिक्षा व परंपरा का ज्ञान देना है. गांव के बच्चे हर दिन सुबह सरकारी स्कूल जाते हैं और शाम में शिव शक्ति पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर स्थित वैदिक पाठशाला में वेदों की पढ़ाई और भजन-कीर्तन करते हैं.

वेद और शिष्टाचार की दी जाती है शिक्षा

वर्तमान में इस पाठशाला में कुल 45 बच्चे हैं. हर दिन शाम पांच से सात बजे तक बच्चों को वेद के साथ शिष्टाचार की शिक्षा दी जाती है. बच्चों को संस्कृत में आयुर्वेद और ऋग्वेद के श्लोक कंठस्थ कराये जाते हैं. वेदों की पढ़ाई के साथ बच्चों को सामाजिक कर्तव्य के बारे में भी बताया जाता है. वैदिक पाठशाला की कोशिश है कि यहां पढ़ने वाले बच्चे व्यवहार कुशल हों. उन्हें वेद का ज्ञान हो.

संस्कृत और भोजपुरी में करते हैं भजन और आरती

वैदिक पाठशाला में बच्चे भगवान की आरती संस्कृत और भोजपुरी में भी करते है. भोजपुरी में भजन भी गाते हैं. उन्हें मंत्रोच्चारण का भी ज्ञान दिया जाता है. मंत्रों के महत्व को बताया जाता है. इसके अलावा बच्चों को बैठने, बोलने और अतिथियों के स्वागत करने की भी शिक्षा दी जाती है. उन्हें व्यवहार कुशल बनाने का काम किया जाता है.

रविवार को बच्चे गांवों में निकालते हैं प्रभात फेरी

यहां के बच्चे हर रविवार को अलग-अलग गांवों में प्रभात फेरी निकालते हैं. इस दौरान वे गांव-गांव जाकर लोगों को गीता के श्लोक और भजन सुनाते हैं. वेद के बारे में जानकारी देते हैं. गांव के बच्चों को पाठशाला में आकर वेद का ज्ञान लेने की अपील करते हैं.

नशा से दूर रहने का देते हैं संदेश

पाठशाला के बच्चे गांव के लोगों को नशा से दूर रहने का भी संदेश देते हैं. नशा से होने वाली बीमारियों और नुकसान के बारे बताते हैं. स्लोगन और गाना से गांव के लोगों को नशा से दूर रहने की पाठ पढ़ाते है. इसका असर भी दिखने लगा है. पहले की तुलना में गांवों में नशा करने वालों की संख्या में कमी आयी है.

बच्चों को अपनी परंपरा के बारे में बताना उद्देश्य

वैदिक पाठशाला का संचालन करने वाले मानस सत्संग समिति के संयोजक यज्ञाधीश पूज्य श्री जम्मू वाले बाबा ने बताया कि गांव के बच्चे जैसे- तैसे पढ़ाई करते थे. उनका जीवनयापन भी कुछ अजीबो- गरीब था. गांव के रामनाथ सिंह ने उनसे संपर्क किया और गांव में वैदिक पाठशाला खोलने तथा बच्चों को शिक्षा देने की बात कही. उनकी बातों से प्रेरित होकर वे एक दिन कुलटांड गांव पहुंचे. उन्होंने गांव का भ्रमण किया. बच्चों के आचरण को देखा और फिर उसके बाद गांव के ही मंदिर में वैदिक पाठशाला खोलने की योजना बनायी. उनका उद्देश्य गांव के बच्चों में वेद ज्ञान का संचार करना है. बच्चों को शिष्टाचार का ज्ञान देना है. आधुनिक शिक्षा में संस्कार और संस्कृति काफी दूर चली गयी है. इसे फिर से स्थापित करने के लिए वैदिक पाठशाला में बच्चों को शिक्षा दी जा रही है. इसके अलावा देशभक्ति और गौ सेवा के बारे में बताया जाता है.

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