असीम मंडल की तलाश में सरेंडर कर चुके नक्सली रंजीत को लेकर सीमावर्ती जंगल में घुसी पुलिस

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बीहड़ गांवों में सर्च ऑपरेशन चलाती पुलिस.

झारखंड-बंगाल सीमा पर एक करोड़ के इनामी नक्सली असीम मंडल की तलाश तेज। सरेंडर कर चुके रंजीत पाल की मदद से पुलिस ने जंगल में घेराबंदी की।

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गालूडीह : झारखंड-बंगाल सीमा पर एक करोड़ के इनामी माओवादी केंद्रीय समिति सदस्य असीम मंडल उर्फ आकाश की गिरफ्तारी के लिए सुरक्षा बलों ने शिकंजा कस दिया है. पुलिस और कोबरा बटालियन द्वारा पिछले कई दिनों से इलाके की 24 घंटे घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. पहाड़ों से लेकर बीहड़ गांवों तक कड़ा पहरा बैठाया गया है. इससे नक्सलियों तक रसद और पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो चुकी है. भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार, सांसद सुनील महतो हत्याकांड के मुख्य आरोपी रहे और वर्ष 2017 में कोलकाता पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली राहुल उर्फ रंजीत पाल को साथ लेकर कोबरा बटालियन बीहड़ों में उतरी है. चूंकि रंजीत पाल इस क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहा था. उसे दलमा से लेकर बंगाल के बांदवान व लालगढ़ तक के चप्पे-चप्पे की भौगोलिक जानकारी है, इसलिए पुलिस उसकी मदद से असीम मंडल के ठिकानों को खंगाल रही है. हालांकि, अब तक असीम मंडल का सुरक्षा बलों से सीधा आमना-सामना नहीं हुआ है.

सात साथियों के साथ दलमा से घाटशिला के बीच छिपा है असीम मंडल

असीम मंडल अपने सात साथियों सचिन, मीता, अतुल, बुलू, मंगल और मालती के साथ दलमा से घाटशिला के बीच पहाड़ी शृंखला में कहीं छिपा है. समय-समय पर जगह बदल रहा है. बारिश में जंगल घना होने का उसे लाभ मिल रहा है. पिछले 10 दिनों से ज्यादा समय से पुलिस लगातार घेराबंदी की हुई है. एक तरफ बंगाल तो दूसरी तरफ झारखंड पुलिस की चौकसी और सर्च ऑपरेशन है. ऐसे में उसका पहाड़ से निकलना संभव नहीं है.

बचे नक्सली सरेंडर कर दें, उनके लिए बेहतर

ग्रामीण एसपी शुभम खंडेवाल ने कहा - दलमा से घाटशिला रेंज के पहाड़ों में एक करोड़ के इनामी नक्सली असीम मंडल के छिपे होने की सूचना पर झारखंड और बंगाल पुलिस संयुक्त रूप से अभियान चला रही है. नक्सलियों तक रसद की पहुंच बंद कर दी गयी है. नक्सली जल्द पुलिस की गिरफ्त में होंगे, इसलिए बेहतर होगा कि वे आत्मसमर्पण कर दें, अन्यथा उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. झारखंड में नक्सलवाद का दायरा लगभग सिमट चुका है. पुलिस के कड़े पहरे के बीच बचे हुए नक्सलियों का बचना नामुमकिन है.

असीम की 16 सदस्यीय टीम में अब मात्र सात बचे

पश्चिम मेदनीपुर (पश्चिम बंगाल) के फूलचक गांव का रहने वाला असीम मंडल कभी 16 सदस्यीय दस्ते के साथ चलता था. लगातार पुलिसिया कार्रवाई और गिरफ्तारियों के बाद अब उसके साथ केवल सात नक्सली ही बचे हैं. वर्तमान में उसके साथ सचिन उर्फ रामप्रसाद मार्डी, अतुल उर्फ प्रकाश, बुलू, मीता, मंगल और मालती शामिल हैं.

हाल में दस्ते को लगे बड़े झटके

1. बंगाल में बेला सरकार और डॉ. प्रदीप मंडल पकड़े गये.

2. दलमा से मदन महतो, सागर सिंह और मीना हथियारों के साथ गिरफ्तार.

3. बंगाल में महिला नक्सली पुष्पा उर्फ शकुंतला महतो ने हथियार के साथ सरेंडर किया.

4. सारंडा मुठभेड़ में समीर मारा गया, जबकि बीमारी से श्याम सिंकू की मौत हो चुकी है.

तीन-चार माह पहले संगठन का हिस्सा बनी थी अनिता

सारंडा में सक्रिय रही असीम मंडल टीम की एक महिला नक्सली अनिता कयाम ने सरेंडर कर दिया है. खबर है कि वह पिछले तीन-चार माह से असीम मंडल टीम का हिस्सा बनी थी. वह संगठन में साधारण सदस्य थी. संगठन के भोजन बनाने का काम करती थी. वह अपने पास देसी बंदूक रखती थी. खबर है सारंडा से असीम के भागने के बाद वह साथ आयी थी. फिर दलमा, नीमडीह होते हुए चली गयी थी.


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मो. युनूस परवेज

लेखक के बारे में

By मो. युनूस परवेज

मो. युनूस परवेज वर्ष 1995 से पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने घाटशिला महाविद्यालय और रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और राजनीतिक विज्ञान ऑनर्स की डिग्री हासिल की है. इनकी राजनीति, अपराध, नक्सलवाद, खेल, शिक्षा और खेती किसानी की खबरों में विशेष रुचि है. डिजिटल जर्नलिज्म में 5 साल का अनुभव है.

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