Jamshedpur News : जुगसलाई नगर परिषद : 44 साल बाद होने जा रहा चुनाव, 44 हजार मतदाता करेंगे प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला
Updated at : 28 Jan 2026 1:46 AM (IST)
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Jamshedpur News : जुगसलाई नगर परिषद में 44 साल बाद नगर निकाय चुनाव होने जा रहा है. नगर परिषद में कुल 44239 मतदाता प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे.
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आरक्षण की स्थिति :
अनुसूचित जाति-1 अन्य
अति पिछड़ा-1 महिला-3
अति पिछड़ा-1 अन्य-4
पिछड़ा वर्ग-2 महिला-1
पिछड़ा वर्ग-2 अन्य – 2
सामान्य वर्ग महिला- 5
सामान्य वर्ग अन्य – 6
Jamshedpur News :
जुगसलाई नगर परिषद में 44 साल बाद नगर निकाय चुनाव होने जा रहा है. नगर परिषद में कुल 44239 मतदाता प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे. जुगसलाई नगर परिषद क्षेत्र में कुल 22 वार्ड के लिए 41 मतदान केंद्र बनाये गये हैं. इसमें से 11 सीटें आरक्षित घोषित की गयी है. इसके तहत वार्ड नंबर 1, 5, 6, 7, 9, 10, 11 अति पिछड़ा वर्ग 1 के लिए आरक्षित है. वहीं वार्ड संख्या 13, 14, 18 को पिछड़ा वर्ग 2 के लिए आरक्षित किया गया है. वार्ड संख्या 2, 3, 4, 8, 12, 15, 17, 19, 20, 21, 22 को अनारक्षित सीट घोषित किया गया है. महिलाओं के लिए 9 सीट आरक्षित है. वार्ड संख्या 6, 9, 10, 13, 15, 19, 20, 21 और 22 महिला आरक्षित सीट होगी. यानी वार्ड संख्या 6 और 10 में अत्यंत पिछड़ा वर्ग 1 की महिला ही चुनाव लड़ सकेंगी. वहीं, वार्ड संख्या 13 में पिछड़ा वर्ग 2 की महिला ही चुनाव लड़ सकती हैं. इसके अलावा वार्ड संख्या 15, 19, 20, 21 और 22 में सामान्य वर्ग की महिलाएं चुनाव लड़ सकेंगी.जुगसलाई में दो बार हुआ था चुनाव, पहली बार अध्यक्ष बने थे मुरलीधर केडिया
जुगसलाई नगर परिषद में निकाय चुनाव पूरे 44 वर्षों बाद होने जा रहा है. जुगसलाई नगर परिषद के पहले जुगसलाई नगर पालिका हुआ करता था. जुगसलाई नगर पालिका बनने से पहले यहां अधिसूचित क्षेत्र समिति हुआ करती थी. आजादी से पहले, वर्ष 1924 में जुगसलाई में अधिसूचित क्षेत्र समिति का गठन हुआ था. बाद में 1976 में इसे नगर पालिका का दर्जा दिया गया और दिसंबर 1977 में पहला निकाय चुनाव कराया गया. इसके बाद जनवरी 1978 में चुने गये 14 वार्ड सदस्य ने मुरलीधर केडिया को जुगसलाई का पहला अध्यक्ष चुना था. जुगसलाई में अब तक केवल दो बार 1977 और 1983 में ही नगर निकाय चुनाव हुए हैं.2 हजार रुपये खर्च कर मुरलीधर केडिया लड़े थे चुनाव
पहली बार जुगसलाई के अध्यक्ष बने मुरलीधर केडिया आज भी उस सादगी भरे दौर को याद करते हुए बताते हैं कि उन्होंने वार्ड पार्षद का चुनाव 2000 रुपये खर्च कर लड़ा था. यह पूरी राशि सिर्फ हैंडबिल छपवाने में खर्च हुए थे. न पोस्टरबाजी, न बड़े-बड़े होर्डिंग और न ही दिखावटी प्रचार, सिर्फ जनसंपर्क ही चुनावी हथियार हुआ करता था. मुरलीधर केडिया बताते हैं कि उस दौर में अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से होता था. चुने गये सदस्यों द्वारा ही अध्यक्ष का चुनाव किया जाता था. श्री केडिया बताते हैं कि उस समय जुगसलाई में करीब 15 से 17 हजार मतदाता थे. एक वार्ड में लगभग एक हजार वोटर होते थे और औसतन 100 घर मिलाकर एक वार्ड बनता था. प्रत्याशी और पार्षद अपने-अपने मोहल्लों के लगभग हर परिवार को व्यक्तिगत रूप से जानते-पहचानते थे.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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