पांच से 18 वर्ष उम्र के ड्रॉप आउट बच्चों को स्कूल की शिक्षा से वापस जोड़ने के लिए 31 तक अभियान

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 20 Jul 2024 6:09 PM

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उपायुक्त की अध्यक्षता में आयोजित हुई रुआर, 2024 (बैक टू स्कूल कैंपेन) को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला

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प्रमुख संवाददाता, जमशेदपुर

सिदगोड़ा टाउन हॉल सिदगोड़ा में उपायुक्त अनन्य मित्तल की अध्यक्षता में रुआर 2024 (बैक टू स्कूल कैंपेन) को लेकर कार्यशाला आयोजित की गयी. नयी शिक्षा नीति और बाल शिक्षा अधिकार कानून के संबंध में निर्धारित प्रावधान के तहत पांच से 18 वर्ष के बच्चों को अनिवार्य रूप से स्कूल की शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रावधान है. 15 जुलाई से शुरु हुए इस अभियान को 31 जुलाई तक संचालित किया जाना है. इसका उद्देश्य स्कूल नहीं जाने वाले बच्चे या फिर स्कूल छोड़ देने वाले बच्चों को एक बार फिर से स्कूल लाना है. उपायुक्त ने रुआर जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. जागरूकता रथ गांव-गांव घूमकर अभिभावकों को अभियान की जानकारी देगा. साथ ही बच्चों को वापस स्कूल में नामांकन एवं छात्रों के लिए सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के संबंध में जागरूक करेगा. कार्यशाला में विधायक के प्रतिनिधि, डीडीसी मनीष कुमार, क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक निर्मला बरेलिया, डीइओ मनोज कुमार, डीएसइ आशीष पांडेय, स्कूलों के प्राचार्य तथा शिक्षा विभाग के अन्य पदाधिकारी व कर्मी एवं मुखियागण शामिल हुए.बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदानउपायुक्त ने अपने संबोधन में कहा कि अभियान की जानकारी सभी को है, लेकिन कितनी तत्परता से और गंभीरता से इसे अमल में लाना है, इस उद्देश्य से यह कार्यशाला आयोजित की गयी है. उन्होंने कहा कि समीक्षा के क्रम में यह पाया जाता है कि कई स्कूलों में या तो बच्चों की उपस्थिति नहीं है या उनकी अटेडेंस नहीं बन रही है. किसी बच्चे के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान होता है, उन्हें शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं रखा जा सकता है. हर परिस्थिति में उन्हें शिक्षा उपलब्ध कराई जानी है.

चुनौतियों को स्वीकार कर समाधान ढूढें

उपायुक्त ने कहा कि हर क्षेत्र विशेष की अपनी चुनौतियां हैं, स्थानीय स्तर पर उसका समाधान ढूंढे. जन प्रतिनिधियों के साथ शिक्षा विभागीय पदाधिकारी समीक्षा करें कि किस कारण से बच्चे स्कूल आना बंद कर रहे हैं. मुखिया, वार्ड सदस्य, प्राचार्य, शिक्षक व अभिभावक कमेटी बनाकर समेकित प्रयास करें. छात्रवृत्ति, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, साइकिल वितरण, मध्याह्न भोजन जैसी योजनाओं का अच्छादन बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने के लिए किया जाना चाहिए.

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डीडीसी मनीष कुमार ने कहा कि विशेषकर कमजोर वर्ग के बच्चों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने को लेकर जिला प्रशासन संवेदनशील है. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बहुत ही पारदर्शी तरीके से रिकॉर्ड टाइम में योग्य बच्चों का नामांकन प्रक्रिया पूर्ण किया गया है.

क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक, कोल्हान प्रमंडल ने कहा कि अभियान के तहत विद्यालय से बाहर रह गये बच्चे, प्रवासी बच्चे एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चे के माता-पिता तक पहुंचने का प्रयास किया जायेगा. यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि एक भी बच्चा विद्यालय से बाहर न रहे तथा 5 से 18 आयु वर्ग के सभी बच्चे विद्यालय में नामांकित हो और अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी करें. विद्यालय से बाहर रह गये बच्चों का शत प्रतिशत नामांकन एवं उपस्थिति, पिछले वर्षों में कक्षा एक से 11 तक के नामांकित सभी बच्चों का अगली कक्षा में शत प्रतिशत नामांकन एवं उपस्थिति, सभी बच्चों की उपस्थिति इ-विद्यावाहिनी में दर्ज करना तथा नव नामांकित बच्चों की शत प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करना कार्यक्रम का उद्देश्य है.

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