एक-एक लाख रुपये और मिलेगा पीड़ितों को मुआवजा

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 23 Feb 2020 8:04 AM

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मनीष सिन्हा, जमशेदपुर : बागबेड़ा के नागाडीह में बच्चा चोरी के आरोप में मारे गये चार लोगों के आश्रितों को एक-एक लाख रुपये अौर मुआवजा मिलेगा. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की अनुशंसा पर गृह विभाग ने इसकी स्वीकृति प्रदान की है, हालांकि अब तक आवंटन नहीं आने के कारण पीड़ित परिवारों को मुआवजा नहीं मिला है. […]

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मनीष सिन्हा, जमशेदपुर : बागबेड़ा के नागाडीह में बच्चा चोरी के आरोप में मारे गये चार लोगों के आश्रितों को एक-एक लाख रुपये अौर मुआवजा मिलेगा. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की अनुशंसा पर गृह विभाग ने इसकी स्वीकृति प्रदान की है, हालांकि अब तक आवंटन नहीं आने के कारण पीड़ित परिवारों को मुआवजा नहीं मिला है. घटना के बाद पीड़ित परिवारों को राज्य सरकार द्वारा दो-दो लाख रुपये मुआवजा दिये गये थे.

18 मई 2017 को राजनगर के शोभापुर में चार लोगों की तथा बागबेड़ा के नागाडीह में गौतम वर्मा, विकास वर्मा, उनकी दादी रामसखी देवी अौर गंगेश गुप्ता की भीड़ ने पिटाई कर दी थी, जिसमें तीनों की मौके पर ही मौत हो गयी थी, जबकि वृद्धा रामसखी देवी की इलाज के दौरान एक माह बाद मौत हुई थी. घटना के बाद तत्कालीन कोल्हान आयुक्त डॉ प्रदीप कुमार व डीआइजी प्रभात कुमार ने पूरी घटना की संयुक्त जांच की थी अौर गृह विभाग को रिपोर्ट सौंपी थी.
गृह विभाग के संयुक्त सचिव सतीश कुमार ने महालेखाकार को पत्र लिख कर बताया िक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की अनुशंसा के आलोक में रामसखी देवी, गौतम वर्मा, विकास वर्मा के आश्रित माणिक चंद्र प्रसाद को तीन लाख रुपये तथा गंगेश गुप्ता के आश्रित अोम प्रकाश गुप्ता को एक लाख रुपये (कुल चार लाख रुपये) आर्थिक सहायता की स्वीकृति िमली है.
उत्तम वर्मा ने बताया
सरकार राज्य की सभी मॉब लिंचिंग की घटना की सीबीआइ जांच कराये
नागीडीह में भीड़ के हाथों पीट-पीट कर मारे गये गौतम वर्मा, विकास वर्मा के भाई गौतम कुमार वर्मा ने ‘प्रभात खबर’ से बातचीत में कहा कि घटना के बाद राज्य सरकार द्वारा दो-दो लाख रुपये मुआवजा दिया गया था तथा एक-एक लाख रुपये अौर मुआवजा देने के आदेश की जानकारी उन्हें नहीं है.
इस घटना में उनके दो भाई, दादी तथा गंगेश गुप्ता की हत्या कर दी गयी थी, जबकि उनका कोई दोष नहीं था अौर शौचालय बनाने प्रचार-प्रसार के लिए लगे पोस्टर-बैनर को देखने गये थे.
बच्चा चोरी का झूठा आरोप लगा कर चारों की हत्या कर दी गयी थी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनकी मांग है कि न सिर्फ नागाडीह, बल्कि पूरे राज्य में जितने भी मॉब लिंचिंग की घटना हुई है, उसकी सीबीआइ से जांच करायी जाये, ताकि उसके सही कारणों का पता चल सके अौर दोषियों को सजा मिल सके.
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