धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख कारण: डॉ रंजीत
Author Prabhat khabar digital desk
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जमशेदपुर : धूम्रपान करना फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख कारण है. इससे लंग कैंसर होने का सबसे बड़ा खतरा रहता है. फेफड़ों के कैंसर (लंग कैंसर) की वजह से भारत में हर साल हजारों लोगों की मौत होती है. इस कैंसर से बचाने के लिए लोगों को जागरूक करना बहुत जरूरी है. फेफड़ों में होने […]
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जमशेदपुर : धूम्रपान करना फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख कारण है. इससे लंग कैंसर होने का सबसे बड़ा खतरा रहता है. फेफड़ों के कैंसर (लंग कैंसर) की वजह से भारत में हर साल हजारों लोगों की मौत होती है. इस कैंसर से बचाने के लिए लोगों को जागरूक करना बहुत जरूरी है. फेफड़ों में होने वाले इस कैंसर के शुरुआती चरणों की पहचान करना मुश्किल है. सही समय पर लोग इसके लक्षणों को लेकर डॉक्टर के पास चले जाते हैं, तो काफी हद तक इस खतरे को टाला जा सकता है.
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उक्त बातें बुधवार को दूसरे दिन एमजीएम अस्पताल के मेडिकल विभाग में स्थित सेमिनार हॉल में सांस व छाती से संबंधित बीमारी पर आयोजित सेमिनार में उपस्थित यूनाइटेड किंगडम (यूके) के अलेक्जेंड्रा डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल से आये रेस्पीरेटरी मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ रंजीत कुमार सिंह ने कही. उन्होंने कहा कि भारत में सांस से संबंधित बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. इसमें मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है.
उन्होंने एमजीएम के मेडिकल विभाग के डॉक्टरों और मेडिकल के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को सांस की बीमारियों के परीक्षण की आधुनिक तकनीक के बारे में जानकारी दे रहे थे. उन्होंने कहा कि देश में लगभग 90 फीसदी फेफड़े के कै���सर के मामले सिगरेट, बीड़ी या हुक्का से जुड़े हैं.
अन्य 10 फीसदी लोगों में इस रोग का प्रमुख कारण पर्यावरण में कैंसरकारी तत्वों की मौजूदगी है. फेफड़ों के कैंसर के लिए धूम्रपान सबसे बड़ा कारक है. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक लगातार खांसी आना, खांसी के साथ खून आना, जल्दी सांस फूलना या घबराहट होना, भूख न लगना और जल्दी थकावट हो जाना.
हर वक्त कमजोरी महसूस करना. बार-बार संक्रमण का होना. इसके अलावा हड्डियों में दर्द और चेहरे, हाथ या गर्दन में सूजन भी इसके सामान्य लक्षण है. इस दौरान डॉ पी सरकार, डॉ निर्मल कुमार सहित मेडिसिन के कई सीनियर व जूनियर डॉक्टरों के साथ मेडिकल के कई विद्यार्थी मौजूद थे.
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