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झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की मौत: एंबुलेंस नहीं मिली तो डिब्बे में मासूम का शव लेकर पैदल निकला बेबस पिता

Updated at : 07 Mar 2026 8:13 PM (IST)
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Jharkhand Health System

मासूम के शव को कार्डबोर्ड के डिब्बे में लिया पीड़ित पिता

Jharkhand Health System: पश्चिमी सिंहभूम के चक्रधरपुर में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आयी है! अस्पताल की लापरवाही से नवजात की मौत के बाद, एंबुलेंस न मिलने पर मजबूर पिता अपने बच्चे के शव को कार्डबोर्ड के डिब्बे में लेकर घर लौटा. क्या है पूरा मामला पढ़ें इस रिपोर्ट में.

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Jharkhand Health System, पश्चिमी सिंहभूम (अनिल तिवारी): पश्चिमी सिंहभूम जिले के बंदगांव में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की पोल खोलती एक विचलित करने वाली घटना सामने आयी है. मामला अनुमंडल अस्पताल चक्रधरपुर की है, जहां प्रबंधन की लापरवाही और संवेदनहीनता के कारण एक पिता अपने नवजात शिशु के शव को कार्डबोर्ड के डिब्बे में भरकर घर ले जाने के लिए मजबूर हो गया. घटना के बाद इलाके में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है.

अस्पताल की लापरवाही के कारण हो गयी नवजात की मौत

जानकारी के अनुसार कराईकेला थाना क्षेत्र अंतर्गत बंगरासाई गांव निवासी रामकृष्ण हेंब्रम ने तीन दिन पहले अपनी पत्नी रीता तिरिया को प्रसव के लिए चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया था. शनिवार को रीता ने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण नवजात की मौत हो गयी.

शव को ले जाने के लिए नहीं दी गयी कोई सुविधा

परिजनों का कहना है कि बच्चे की मौत के बाद अस्पताल कर्मियों ने सांत्वना देने के बजाय रामकृष्ण हेंब्रम पर शव को तुरंत अस्पताल से ले जाने का दबाव बनाया. जब पीड़ित पिता ने इसके लिए घर एंबुलेंस या किसी साधन की मांग की, तो उसे कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करायी गयी.

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रामकृष्ण हेंब्रम शव को खाली कार्डबोर्ड में रखकर चल दिये घर

गरीबी और जानकारी के अभाव में मजबूर होकर रामकृष्ण हेंब्रम ने अपने बेटे के शव को एक खाली कार्डबोर्ड के डिब्बे में रखा और उसे लेकर घर के लिए निकल पड़े. यह दृश्य देखने के बाद इलाके के लोगों में गहरा आक्रोश है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के साथ अक्सर दुर्व्यवहार किया जाता है. यदि स्वास्थ्य विभाग चाहता तो मानवीय आधार पर एंबुलेंस से शव को घर तक पहुंचाया जा सकता था, लेकिन विभाग की संवेदनहीनता ने गरीब परिवार को इस दर्दनाक स्थिति में डाल दिया.

पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने प्रशासन से की कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करायी जाये. साथ ही दोषी स्वास्थ्य कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य गरीब परिवार को ऐसी अमानवीय स्थिति का सामना न करना पड़े.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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