सब्जी व लकड़ी बेच मां ने रामचंद्र सहिस को कराया मैट्रिक

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Jun 2019 12:00 AM

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सब्जी व लकड़ी बेच मां ने रामचंद्र सहिस को कराया मैट्रिक – बोड़ाम के मुचीडीह गांव में 15 जनवरी 1975 का हुआ था जन्म – 1987 में पिता की हो गयी थी मौत, मैट्रिक के बाद पढ़ाने लगे थे ट्यूशन – परिवार की स्थिति दयनीय होने के कारण बीच में ही छोड़ दी थी स्नातक […]

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सब्जी व लकड़ी बेच मां ने रामचंद्र सहिस को कराया मैट्रिक – बोड़ाम के मुचीडीह गांव में 15 जनवरी 1975 का हुआ था जन्म – 1987 में पिता की हो गयी थी मौत, मैट्रिक के बाद पढ़ाने लगे थे ट्यूशन – परिवार की स्थिति दयनीय होने के कारण बीच में ही छोड़ दी थी स्नातक की पढ़ाई पटमदा. रामचंद्र सहिस का जन्म 15 जनवरी 1975 को पूर्वी सिंहभूम के बोड़ाम प्रखंड के मुचीडीह गांव में किसान परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम विजय सहिस व मां का लख्खी सहिस है. रामचंद्र सहिस 1981 से 85 तक मुचीडीह प्राथमिक विद्यालय से शिक्षा हासिल करने के बाद 1985 में रामकृष्ण मिशन हॉस्टल आ गये और यहीं रहते हुए उन्होंने साकची चेनाब रोड स्थित विवेकानंद हाइस्कूल से 1991 में मैट्रिक की परीक्षा पास की. इसी बीच 1987 में उनके पिता का निधन हो गया. 1994 में उन्होंने सिंहभूम कॉलेज चांडिल से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की और यहीं से स्नातक करने लगे, लेकिन पिता की मौत के बाद आर्थिक स्थित दयनीय होने के कारण बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी. रामचंद्र सहिस की मां लख्खी सहिस ने बताया कि 1987 में पति की मौत के बाद उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के लिए बोड़ाम बाजार में सब्जी बेचने के अलावा दलमा जंगल से लकड़ी लाकर हाट-बाजार में बेचा करती थी. इससे किसी तरह दो वक्त का रोटी नसीब होता था. लख्खी सहिस ने बताया कि कभी-कभार तो रात के वक्त भूखे पेट सोना पड़ता था. उन्होंने बताया कि मैट्रिक पास करने के बाद रामचंद्र ट्यूशन पढ़ाने लगा, जिससे बेटी की शादी हुई और परिवार में फिर से खुशियां लौटी.1992 से जुड़े हैं सामाजिक कार्यों से रामचंद्र सहिस को 1992 में विवेकानंद आदर्श सेवा समिति बोड़ाम का सचिव बनाया गया. इसके बाद वे 1997 में नेहरू युवा केंद्र जमशेदपुर से जुड़े और सामाजिक कार्य किया. उन्होंने 1991 से 2005 तक स्कूली बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया. साथ ही पॉल्ट्री फॉर्म व कृषि कार्य से भी जुड़े रहे. इसके बाद वे वर्ष 2000 में झामुमाे के सदस्य बने और कुछ दिनों के बाद उन्हें झामुमो का पंचायत सचिव बनाया गया. दो बच्चाें के पिता हैं सहिस रामचंद्र सहिस की शादी वर्ष 2000 में बोड़ाम के बेलडीह गांव के खगेन सहिस की बेटी सरस्वती सहिस से हुई. उनके दो बेटे हैं. बड़ा बेटा विशाल सहिस (14) व छोटा शुभम (10) है. वहीं, छोटी बहन उर्मिला सहिस है, जिनकी शादी घनश्याम सहिस के साथ हुई है.

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