तेजी से सिमट रहे खेतों पर कृषि वैज्ञानिक की बड़ी चेतावनी, बोलीं- खेत बचेंगे तभी बचेगा देश
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 13 Jun 2026 2:27 PM
सहरसा - मिलेट्स की खेती देखते वैज्ञानिक डॉ सुनीता पासवान
Saharsa News: बढ़ते शहरीकरण और घटती कृषि भूमि पर जताई चिंता. कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुनीता पासवान ने कहा- खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए खेतों का संरक्षण जरूरी.
सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट
Saharsa News: क्या आने वाले समय में खेती की जमीन कम होने से देश खाद्य संकट का सामना कर सकता है? कृषि विज्ञान केंद्र अगुवानपुर की वैज्ञानिक डॉ. सुनीता पासवान ने कृषि भूमि पर बढ़ते दबाव को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि खेत केवल अन्न उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय संतुलन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं. यदि खेत नहीं बचेंगे तो भविष्य में भोजन और पर्यावरण दोनों संकट में पड़ सकते हैं.
कृषि विज्ञान केंद्र अगुवानपुर की वैज्ञानिक डॉ. सुनीता पासवान ने कृषि भूमि संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि “खेत बचेंगे तो हमें भोजन मिलेगा और हम बचेंगे तो देश बचेगा.” उन्होंने कहा कि यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व और देश की खाद्य सुरक्षा का मूल आधार है.
बढ़ते शहरीकरण से कृषि भूमि पर बढ़ रहा दबाव
डॉ. पासवान ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण कृषि भूमि लगातार सिकुड़ती जा रही है. ऐसे हालात में खेतों का संरक्षण समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है. उन्होंने कहा कि कृषि भूमि केवल किसानों की आजीविका का साधन नहीं, बल्कि पूरे देश की खाद्य आपूर्ति व्यवस्था की रीढ़ है.
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कृषि योग्य भूमि लगातार कम होती रही तो आने वाले वर्षों में खाद्य संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
जल, जंगल और जमीन बचाना होगा
कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि खेती को सुरक्षित रखने के लिए जल, जंगल और जमीन का संरक्षण बेहद जरूरी है. जल के बिना खेती संभव नहीं है, जबकि जंगल वर्षा और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. वहीं उपजाऊ भूमि कृषि उत्पादन की आधारशिला है.
उन्होंने कहा कि इन प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करके ही कृषि और मानव जीवन दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है.
रासायनिक खेती पर जताई चिंता
डॉ. पासवान ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घट रही है, जिसका असर उत्पादन क्षमता पर पड़ रहा है.
उन्होंने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन जैसी टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाने की सलाह दी. साथ ही कृषि भूमि को गैर-कृषि कार्यों में परिवर्तित होने से रोकने पर भी बल दिया.
सामूहिक प्रयास से ही सुरक्षित होगा भविष्य
डॉ. सुनीता पासवान ने किसानों, वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और आम नागरिकों से खेतों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि खेत सुरक्षित रहेंगे तो भोजन सुरक्षित रहेगा, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और देश का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा. इसलिए जल, जंगल और जमीन की रक्षा करना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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