जमशेदपुर : सरकार का ध्यान विकास पर कम, पब्लिसिटी पर ज्यादा : डॉ अजय

Updated at : 31 Dec 2018 3:38 AM (IST)
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जमशेदपुर : सरकार का ध्यान विकास पर कम, पब्लिसिटी पर ज्यादा : डॉ अजय

जमशेदपुर : कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने कहा कि झारखंड सरकार का ध्यान विकास पर कम पब्लिसिटी पर ज्यादा है. बिष्टुपुर स्थित तिलक पुस्तकालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि झारखंड की रघुवर सरकार ने 2014-15 से 30 दिसंबर 2018 तक सरकार ने प्रचार-प्रसार में 530.69 करोड़ रुपये खर्च कर […]

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जमशेदपुर : कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने कहा कि झारखंड सरकार का ध्यान विकास पर कम पब्लिसिटी पर ज्यादा है. बिष्टुपुर स्थित तिलक पुस्तकालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि झारखंड की रघुवर सरकार ने 2014-15 से 30 दिसंबर 2018 तक सरकार ने प्रचार-प्रसार में 530.69 करोड़ रुपये खर्च कर दिये.इसका खुलासा सरकार की ही मध्यावधि फिस्कल रिपोर्ट में किया गया है.
मोमेंटम झारखंड के नाम पर सिर्फ रांची नहीं, बल्कि देश के सभी प्रमुख हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशन अौर महानगरों में पोस्टर-बैनर लगा कर जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने का काम किया गया. हिंदी फिल्म एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर के संबंध में डॉ अजय कुमार ने कहा कि यह भाजपा प्रायोजित फिल्म है.
भाजपा ही इस तरह की हरकत करती है. उन्होंने फिल्म के विरोध या रोक लगाने की मांग से इनकार किया. प्रेस वार्ता में जिला अध्यक्ष विजय खां, कोल्हान प्रवक्ता राकेश तिवारी, ब्रजेंद्र तिवारी, संजय सिंह आजाद, प्रिंस सिंह,धर्मेंद्र प्रसाद, जोगिंदर सिंह मौजूद थे.
कंबल घोटाला ने सरकार के भ्रष्टाचार के जीरो टॉलरेंस के दावे को उजागर किया है : अजय कुमार ने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट ने राज्य में रघुवर सरकार के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावे की हकीकत को सार्वजनिक कर दिया है. 2016 में श्रम नियोजन विभाग ने 9.82 लाख ऊनी कंबल आपूर्ति करने का आदेश इसी शर्त पर दिया था कि कंबल स्थानीय बुनकरों द्वारा तैयार किया जायेगा.
झारक्राफ्ट के अधिकारियों की मिलीभगत से निविदा की शर्तों का उल्लंघन कर बाहर से घटिया कंबल खरीद कर आपूर्ति ही नहीं किया गया, बल्कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर भुगतान भी कर दिया गया. पानीपत की दो कंपनी से 15.54 करोड़ रुपये की धागा खरीद कर 27 कलस्टर पर आपूर्ति का उल्लेख तो है, पर इस संबंध में कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है. ट्रकों से ढुलाई में भी भारी गड़बडी है. फर्जी दस्तावेज के आधार पर 18.41 करोड़ रुपये के भुगतान पर सरकार की चुप्पी है.
312 करोड़ खर्च कर खरीदे गये दुधारू पशुअों का कोई अता-पता नहीं : डॉ अजय कुमार ने मवेशियों के समग्र स्वास्थ्य को बनाये रखने अौर दूध उत्पादकता बढ़ाने के लिए शुरू किये गये तकनीकी इनपुट कार्यक्रम में भी घोटाला का आरोप लगाया. कहा कि गव्य विकास निदेशालय ने वर्ष 2012 से 17 तक कुल 63 करोड़ रुपये खर्च किये.
सीएजी की जांच में पाया गया कि निदेशालय के पास सिर्फ 2016-17 की ही हिसाब-सबूत उपलब्ध है. वर्ष 2012 से 16 तक किये गये 43 करोड़ खर्च का कोई हिसाब मौजूद नहीं है. 312 करोड़ खर्च कर खरीदे गये दुधारू पशुअों का कोई अता-पता नहीं है.
दस पीसीयू में निवेश से राज्य सरकार को 2,092.56 करोड़ का नुकसान : डॉ अजय कुमार ने कहा कि महालेखाकार की रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य सरकार के दस पीसीयू में (अंश एवं ऋण) निवेश से राज्य सरकार को 2,092.56 करोड़ का सीधे नुकसान हुआ है. राज्य की 24 में से सिर्फ दस पीसीयू ने लेखा-जोखा जमा किया है, जिसमें से पांच कंपनियों ने करीब 22.98 करोड़ का लाभ अर्जित किया है. पांच कंपनियों ने 1700.73 करोड़ का नुकसान उठाया है.
डॉ अजय ने झारखंड पुलिस हाउसिंग निगम लि. के पुलिस बल आधुनिकीकरण में गड़बड़ी, आधारभूत संरचना के क्षेत्र बिजली, पानी, शिक्षा, खाद्य आपूर्ति, स्वास्थ्य अौर कृषि में खर्च का प्रतिशत पीआरडी के मुकाबले काफी कम होने की बात कही. डॉ अजय ने कहा कि रघुवर सरकार घोटालों की जांच कराने से कतराती है अौर विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए मंत्री सरयू राय बयानबाजी करते हैं.
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