राज्य के सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदे जायेंगे 60 शव वाहन

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Oct 2018 5:17 AM

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जमशेदपुर : गरीबों को शव ले जाने में होने वाली परेशानी तथा इससे संबंधित खबरें मीडिया में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में 60 शव वाहन खरीदने का निर्णय लिया है. 24 जिला अस्पताल में दो-दो तथा तीन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तीन-तीन (रांची में छह) शव वाहन खरीदे जायेंगे. मारुति अोमनी वैन […]

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जमशेदपुर : गरीबों को शव ले जाने में होने वाली परेशानी तथा इससे संबंधित खबरें मीडिया में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में 60 शव वाहन खरीदने का निर्णय लिया है. 24 जिला अस्पताल में दो-दो तथा तीन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तीन-तीन (रांची में छह) शव वाहन खरीदे जायेंगे. मारुति अोमनी वैन को शव वाहन के रूप में खरीदने का निर्णय लिया गया है.
स्वास्थ्य, चिकित्सा, शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने शव वाहन खरीदने के संबंध में संकल्प जारी किया है. जारी संकल्प में कहा है कि 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की जनसंख्या 3,29,88,124 है. राज्य में मृत्यु दर (एसआरएस 2013 के अनुसार) 6.8 है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 7.2 एवं शहरी क्षेत्र में 5.6 है.
राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल एवं जिला अस्पताल में मृत्यु होने पर अस्पताल से घर शव ले जाने की आवश्यकता होती है, लेकिन कोई संगठित व्यवस्था नहीं होने के कारण मृतक के संबंधी अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए अत्यधिक शुल्क पर वाहनों की व्यवस्था निजी स्तर पर करते हैं. मीडिया में देश के विभिन्न राज्यों में शव ले जाने में परिजनों (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग केे लोगों) को होने वाली कठिनाई की अोर ध्यान आकृष्ट कराया गया है.
इसे ध्यान में देखते हुए राज्य सरकार द्वारा राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में शव वाहन की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है, ताकि मृतकों के परिजनों को शव ले जाने में किसी तरह की परेशानी नहीं हो. शवों को अस्पताल से घर तक ले जाने के लिए साठ शव वाहन खरीदने का निर्णय लिया गया है. शव वाहन की खरीद राज्य सरकार द्वारा की जायेगी अौर मारुति वैन का दर सबसे कम तथा कार्य क्षमता संतोषजनक होने के कारण इसे खरीदने का निर्णय लिया गया है.
शव वाहन का संचालन जिला के उपायुक्त द्वारा स्वयंसेवी संस्थाअों से विमर्श के बाद कार्य आदेश निर्गत होगा. योजना को कार्यान्वित करने में 2.35 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च आयेगा, जिसमें 3.20 लाख रुपये प्रति वैन की दर से 60 वाहन की खरीद पर 1.92 करोड़‍ रुपये तथा बीपीएल एवं 72 हजार रुपये से कम आये वाले परिवारों के लिए शव को अस्पताल से घर ले जाने में 41,88,800 रुपये (अनुमानित) वार्षिक खर्च (कुल दो करोड़ 33 लाख, अट्ठासी हजार आठ सौ रुपये) खर्च आयेगा, जिसके लिए 2.35 करोड़ रुपये का उपबंध किया जा रहा है.
क्या रहेगी व्यवस्था, कितना होगा खर्च
राज्य के अस्पतालों में अौसत वार्षिक मृत्यु 15,400 है, जिसमें बीपीएल श्रेणी के मृतकों का अौसत वार्षिक संख्या 15 हजार 400 का चालीस प्रतिशत अर्थात 6160 है.
6160 के हिसाब से प्रथम 10 किमी के लिए पांच सौ रुपये प्रति मृतक के दर से प्रतिपूर्ति राशि- 30, 80,000 रुपये
10 किमी से अधिक दूरी (अौसत 20 किमी) के लिए नौ रुपये प्रति किमी की दर से प्रतिपूर्ति राशि- 11,08,800 रुपये
कुल वार्षिक अनुमानित खर्च- 41,88,800 रुपये
निधि खरे ने संचालन के लिए मांगा था सुझाव और मंतव्य
स्वास्थ्य विभाग के पूर्व प्रधान सचिव निधि खरे ने जिला स्तर पर शव वाहन (मोक्ष यात्रा) के संचालन के संबंध में छह सितंबर को उपायुक्त एवं सिविल सर्जनों को पत्र लिख कर एमअोयू के मॉडल पर सुझाव और मंतव्य मांगा था.
सुझाव व मंतव्य नहीं मिलने पर माना गया था कि मॉडल अौर एमअोयू का प्रारूप मान्य है. निधि खरे ने जिला स्तर पर शव वाहन के संचालन के लिए मॉडल का चयन करते हुए सूचित करने को कहा था तथा मॉडल दो के चयन की स्थिति में एजेंसी या एनजीअो का चयन कर सूचना देने को कहा था.
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