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ईसाइयों को उनकी आस्था को लेकर निशाने पर लिया जा रहा

Updated at : 28 Jul 2018 4:45 AM (IST)
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ईसाइयों को उनकी आस्था को लेकर निशाने पर लिया जा रहा

जमशेदपुर : अगर आपमें टैलेंट है तो उसको और निखारिये, मौका मत चूकिये, कोई कमजोरी आड़े नहीं आयेगी. यह कहना है देशना जैन का. देशना जैन ने इस साल न केवल जयपुर में आयोजित मिस इंडिया (बधिर) प्रतियोगिता जीती बल्कि वह मिस एशिया (बधिर) की भी विजेता रहीं. इसके अलावा ताइवान के ताइपे में आयोजित […]

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जमशेदपुर : अगर आपमें टैलेंट है तो उसको और निखारिये, मौका मत चूकिये, कोई कमजोरी आड़े नहीं आयेगी. यह कहना है देशना जैन का. देशना जैन ने इस साल न केवल जयपुर में आयोजित मिस इंडिया (बधिर) प्रतियोगिता जीती बल्कि वह मिस एशिया (बधिर) की भी विजेता रहीं. इसके अलावा ताइवान के ताइपे में आयोजित मिस इंटरनेशनल (बधिर) प्रतियोगिता में चौथे स्थान पर रहीं. वह शहर में हॉर्न फ्री अभियान की शुरुआत करने अपने पिता देवेंद्र कुमार जैन के साथ पहुंची हैं.
देशना मध्यप्रदेश की टीकमगढ़ की रहनेवाली हैं. बिष्टुपुर स्थित एक होटल में पिता देवेंद्र कुमार की सहायता से प्रभात खबर से बातचीत करते हुए देशना ने बताया कि जब परिवार ब्याह, शादी या अन्य समारोह में जाता था तो लोग उसका मजाक उड़ाते थे. इस पर पिता गुस्सा होकर कार्यक्रम से चले आते थे. पिता मेरा उपहास नहीं देख सकते थे, इसलिए उन्होंने अपने रिश्तेदारों से दूरी बना ली, लेकिन अब वे ही रिश्तेदार मुझे लेकर गर्व का अनुभव करते हैं. वह अभी इंदौर की बायलिंग्वल एकेडमी में बीए की पढ़ाई कर रही हैं. देशना को फोटोग्राफी का भी शौक है.
उन्होंने कहा कि उसने बचपन से भोपाल के हॉस्टल में रहकर ही पढ़ाई की है. वह सामान्य बच्चों के साथ ही फैशन शो में भाग लेती चली गयीं. उन्होंने बताया कि वह चाहती हैं कि 2019 में इटली में होने वाले मिस डेफ यूनिवर्स में हिस्सा लें और इसकी तैयारी कर रही हैं. उन्होंने कहा कि अमूमन यह देखा जाता है कि कोई भी मूक बधिर लड़की होती है, तो उसकी शादी करा दी जाती है, जिसके बाद कुछ दिनों के बाद पति से लड़ाई हो जाती है.
उन्होंने कहा कि मूक-बधिर लड़की को पहले खुद के पैरों पर खड़ा होना चाहिए, पैसे कमाने चाहिए ताकि किसी की मोहताज न रहे, उसके बाद ही शादी करनी चाहिए. उनके पिता देवेंद्र कुमार जैन ने बताया कि उनकी दो संतानें हैं, एक बेटा और एक बेटी. दोनों ही जन्म से मूक-बधिर हैं, लेकिन उन्हें इसका कभी अफसोस नहीं हुआ. ये मेरे लिए ईश्वर के वरदान हैं. इन्हें हमने हमेशा आगे बढ़ने का हौलसा दिया और बेटी ने खुद की मेहनत से ही यह मुकाम हासिल करने में सफलता पायी.
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