पैर फिसला तो तीस फीट गड्ढे में गिर सकते हैं बच्चे

Updated at : 24 Jul 2018 4:36 AM (IST)
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पैर फिसला तो तीस फीट गड्ढे में गिर सकते हैं बच्चे

पोटका : स्कूल विलय के प्रस्ताव को जिले में जोर-शोर से लागू तो कर दिया गया, लेकिन इसके बाद बच्चों को आने वाली परेशानियों से पूरी तरह आंख मूंद ली गयी. पूर्व में पोटका के मातकमडीह के बच्चों को गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई करनी होती थी. स्कूल विलय के बाद यहां के […]

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पोटका : स्कूल विलय के प्रस्ताव को जिले में जोर-शोर से लागू तो कर दिया गया, लेकिन इसके बाद बच्चों को आने वाली परेशानियों से पूरी तरह आंख मूंद ली गयी. पूर्व में पोटका के मातकमडीह के बच्चों को गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई करनी होती थी. स्कूल विलय के बाद यहां के 70 बच्चों को गांव से ढाई किलोमीटर दूर कालिकापुर उत्क्रमित उच्च विद्यालय जाना पड़ रहा है. बारिश के दिनों में यह किसी भयानक सपने से कम नहीं.
स्कूल के रास्ते में कालिकापुर के पास दोलाई बांध का जीर्णोद्वार कराया जा रहा है. बांध निर्माण के दौरान तालाब से निकली मिट्टी काट कर कच्चे रास्ते पर डाल दी गयी है. बारिश होने के बाद से यह रास्ता कीचड़मय हो गया है. छात्र-छात्रायें घुटने तक कीचड़ में डूबकर इसे पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं.
कीचड़ से सने रास्ते के ठीक बगल में तीस फीट गड्ढा है, जिसमें पानी भरा हुआ है. यहां से आने-जाने के क्रम में अगर बच्चों का पैर फिसला तो बड़ा हादसा हो सकता है. फिलहाल बच्चे किसी तरह से चप्पल व जूतों को हाथ में लेकर इस रास्ते को पार कर रहे हैं. यह स्थिति लगभग सवा किलोमीटर तक है. स्कूल विलय के विरोध में मातकमडीह के ग्रामीणों ने आंदोलन भी किया था. कोई सुनवाई नहीं होने पर अभिभावकों ने अपने बच्चों का नामांकन कालिकापुर उच्च िवद्यालय में करवा दिया था.
पोटका
स्कूल िवलय के बाद जान हथेली पर ले ढाई किमी दूर जाते हैं मातकमडीह के बच्चे
दोलाई बांध निर्माण के दौरान खोदी गयी मिट्टी को रास्ते में डालने से बढ़ी परेशानी
बच्चे प्रतिदिन जान जोखिम में डाल स्कूल जा रहे हैं. इस मामले में शिकायत पर भी अभी तक कार्रवाई नहीं हुई. सरकार और प्रशासन स्कूल विलय को रद्द करें.
हेमंत भकत, ग्राम प्रधान, मातकमडीह
विद्यालय का विलय नीति आयोग के निर्णय के पश्चात किया गया है. मातकमडीह के ग्रामीणों की मांग जिला प्रशासन तक पहुंचा दी गयी है. जानकारी जिला को दे दी गयी है.
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