अन्नदा कॉलेज में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का समापन

Updated at : 13 Mar 2026 8:40 PM (IST)
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अन्नदा कॉलेज में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का समापन

अन्नदा कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का समापन शुक्रवार को हुआ.

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पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है

हज़ारीबाग.

अन्नदा कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का समापन शुक्रवार को हुआ. दूसरे दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों में पर्यावरण, कानून, राजनीति, इतिहास और साहित्य से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा हुई. देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विद्वानों ने पर्यावरणीय चुनौतियों और उनके समाधान पर अपने विचार प्रस्तुत किये.

तकनीकी सत्र तीन की अध्यक्षता डॉ. स्वाति पराशर ने की. मुख्य वक्ता डॉ. मिथिलेश सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी भी आवश्यक है. पंकज चतुर्वेदी ने पर्यावरणीय संकट को समझने के लिए उसके ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भों पर बल दिया.

सत्र चार की अध्यक्षता डॉ. सजल मुखर्जी ने की. मुख्य वक्ता डॉ. उमा शंकर मलिक ने जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण को जरूरी बताया. डॉ. बंशीधर रुखैयार ने कहा कि स्थानीय समुदायों की मौखिक परंपराएं पर्यावरणीय ज्ञान का महत्वपूर्ण स्रोत हैं और आदिवासी समाज के अनुभवों को समझे बिना अध्ययन अधूरा रहेगा.

तकनीकी सत्र पांच की अध्यक्षता डॉ. ओम काटेल ने की. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन कम करना अनिवार्य है. डॉ. ए. इबेमचा चानू ने समाज, सरकार और वैज्ञानिक समुदाय के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया.

सत्र छह की अध्यक्षता डॉ. उमा शंकर मलिक ने की. मुख्य वक्ता डॉ. बसुधारा रॉय ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और समकालीन साहित्य में पर्यावरणीय चिंताओं को प्रमुखता मिल रही है. डॉ. निरोशा सालवथुरा ने पोस्टमॉडर्न साहित्य के माध्यम से प्रकृति, मानव और समाज के संबंधों को नए दृष्टिकोण से समझने की बात कही.

सेमिनार में शोधार्थियों द्वारा पोस्टर प्रेजेंटेशन भी किया गया. इस आयोजन में देश-विदेश से आए 150 से अधिक शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने पर्यावरणीय चुनौतियों, जोखिमों और उनके अनुकूलन की रणनीतियों पर गंभीर विमर्श किया.

समापन सत्र में डॉ. बनर्जी ने रिपोर्ट प्रस्तुत की. महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. नीलमणि मुखर्जी ने चयनित शोध पत्रों के प्रकाशन की घोषणा की. मुख्य अतिथि डीवीसी के श्री राम स्नेही शर्मा थे. धन्यवाद ज्ञापन सेमिनार के कन्वेनर डॉ. अजय प्रसाद वर्मा ने किया.

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