विदेशों तक नहीं पहुंच पा रही इचाक की धनियां की खुशबू, करोड़ों का हो रहा नुकसान

Author : Panchayatnama Published by : Prabhat Khabar Updated At : 20 Apr 2020 5:48 PM

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लॉकडाउन (Lockdown) से हजारीबाग (Hazaribag) जिला अंतर्गत इचाक प्रखंड में धनियां (Coriander) की खेती करने वाले किसानों (Farmers) को भारी क्षति का सामना करना पड़ रहा है. देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों में भी जाने वाला यहां का धनियां लोकडाउन के कारण खेतों में ही पड़ा-पड़ा खराब हो रहा है.

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रामशरण शर्मा

इचाक (हजारीबाग) : लॉकडाउन (Lockdown) से हजारीबाग (Hazaribag) जिला अंतर्गत इचाक प्रखंड में धनियां (Coriander) की खेती करने वाले किसानों (Farmers) को भारी क्षति का सामना करना पड़ रहा है. देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों में भी जाने वाला यहां का धनियां लोकडाउन के कारण खेतों में ही पड़ा-पड़ा खराब हो रहा है. इचाक के कई गांवों के करीब 500 एकड़ भूमि पर धनियां की खेती होती है. इससे करीब 35 हजार क्विंटल धनियां की पैदावार होती है.

प्रखंड के बरकाखुर्द, रतनपुर, कला द्वार, बरका कला, दरिया, जोगीडीह, पोखरिया, सायल कला, सायल खुर्द, फूफनदी, हसेल, मंडपा, मूर्तिया, डाढा, जगडा, अंबा टांड़, असिया, करियतपुर समेत अन्य गांवों में सैकड़ों किसान भारी मात्रा में धनियां की खेती कर हर साल करोड़ों की कमाई करते हैं. खेतों में लगे तैयार धनियां का फसल नहीं बेच पाने से इस वक्त करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

फिलवक्त, इचाक के दर्जनों गांवों के करीब 500 एकड़ भूमि पर धनियां (Coriander) की खेती हुई है. लॉकडाउन हो जाने के कारण किसान धनियां पत्ता को नहीं बेच पा रहे हैं. किसानों की माने, तो एक एकड़ भूमि में 62 क्विंटल (Quintal) से लेकर 70 क्विंटल (Quintal) धनियां पत्ता (Coriander leaf) का उत्पादन होता है. इस तरह 500 एकड़ भूमि में करीब 31 से 35 हजार क्विंटल धनियां पत्ता खेतों में लगे हैं, जिसकी वर्तमान मूल्य करीब 14-15 करोड़ रुपये है. लेकिन, लॉकडाउन के कारण सिंचाई न होने के कारण अब सूखने लगा है. किसानों का कहना है कि अगर बाहर से व्यापारी आते, तो 4-5 हजार रुपये प्रति क्विंटल धनियां पत्ता बिकता.

बरका खुर्द के प्रगतिशील किसान मोहन महतो, देवनाथ महतो , विनोद मेहता, अशोक प्रसाद मेहता ने संयुक्त रूप से कहा कि हमलोग का डेढ़ एकड़ खेत में धनियां पत्ता तैयार है. लॉकडाउन के कारण धनियां पत्ता को नहीं बेच पा रहे हैं. अभी 45- 50 रुपये किलो धनियां बेचते, तो लागत व मेहनत निकलता व लाखों रुपये की आमदनी भी होती.

इचाक प्रखंड के सायल कला के प्रगतिशील किसान घनश्याम मेहता, गोविंद मेहता, रतनपुर के प्रकाश मेहता, भोला मेहता, दरिया गांव के सुनील मेहता, रामाशीष मेहता, प्रवीण मेहता, कलड़वार के विश्वनाथ मेहता, संजय मेहता और उमेश मेहता ने कहा कि लॉकडाउन से हम किसानों को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है. गांव के बाजार में इतना धनियां का पत्ता नहीं बिक सकता. फसल भी पटवन नहीं करने से मरने लगे हैं.

किसानों का कहना है कि लोकल मार्केट में बेचना भी चाहूं, तो इतना धनियां खरीदने वाला कोई नहीं मिलेगा. बाहरी व्यापारी के आने से इचाक का धनियां झारखंड, बिहार, बगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा समेत देश के अन्य राज्यों में भी जाता है. इसके अलावा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका में भी इचाक की धनियां अपनी खुशबू बिखेरती है.

चैंबर ऑफ फार्मर्स के प्रखंड अध्यक्ष अशोक कुमार मेहता ने कहा कि इचाक के किसानों की समस्या के बारे में सरकार को सोचना चाहिए. लॉकडाउन के दौरान किसानों के खेत में लगे घनियां पत्ता की बिक्री नहीं होती है, तो करोड़ों रुपये का नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा. इसलिए जिला प्रशासन किसानों के लिए आवश्यक कदम उठाये, ताकि किसान कर्ज की बोझ में नहीं दबे.

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