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हजारीबाग का जीएसटी कार्यालय टैक्स वसूली बंपर, सुविधाएं नदारद

Updated at : 03 Mar 2026 1:42 PM (IST)
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Hazaribagh GST Office

स्टेट जीएसटी कार्यालय में गिरी हुई चारदीवारी (ऊपर) और स्टेट जीएसटी कार्यालय में जुगाड़ माध्यम से लोहे की खड़ी मामूली जंजीर (नीचे)

Hazaribagh GST Office: हजारीबाग के स्टेट और सेंट्रल जीएसटी कार्यालय करोड़ों की टैक्स वसूली कर रहे हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. स्टेट जीएसटी भवन में चारदीवारी जर्जर है, जबकि सेंट्रल जीएसटी दफ्तर किराए के भवन में संचालित हो रहा है, जिससे सुरक्षा और व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.

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हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट

Hazaribagh GST Office: झारखंड के उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडलीय मुख्यालय हजारीबाग के शहरी क्षेत्र में टैक्स डिपार्टमेंट के दो बड़े क्षेत्रीय कार्यालय है. इसमें एक स्टेट जीएसटी यानी कि वाणिज्य कर विभाग (कमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट) है. वहीं, दूसरा केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर विभाग इसका मतलब सेंट्रल जीएसटी है. दोनों क्षेत्रीय कार्यालयों के अधीन हजारीबाग, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, रामगढ़ के आलावा बोकारो जिले का कुछ भाग शामिल है. इन सभी जिलों से दोनों क्षेत्रीय कार्यालयों को प्रतिमाह दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले विभिन्न तरह की वस्तुओं की बिक्री और सेवाओं की आपूर्ति पर निर्धारित टैक्स करोड़ों में प्राप्त हो रहा है.

लंबे समय से खाली है अधिकारियों का पद

यह कह सकते हैं कि राज्य स्तर पर दोनों क्षेत्रीय कार्यालयों को राजस्व की वसूली में विशेष स्थान है. मतलब एक राज्य दूसरा सेंट्रल के खजाना को भरने में दोनों क्षेत्रीय कार्यालयों की भूमिका अपनी-अपनी जगहों पर अहम मानी जाती है. इसके उलट कहें तो बेहतर कमाई करने वाले दोनों कार्यालयों में सुविधा के नाम पर असुविधा व्याप्त है. वहीं अधिकारियों के कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली है. कई पदों पर प्रभारी काम कर रहे हैं.

स्टेट जीएसटी कार्यालय में चारदीवारी नहीं

स्टेट जीएसटी कार्यालय में चारदीवारी नहीं- क्षेत्रीय स्टेट जीएसटी कार्यालय भवन तीन मंजिला है. 2025 में बने नये कार्यालय भवन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है. वहीं, नये भवन में चारदीवारी नहीं होने से क्षेत्रीय कार्यालय की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा है. पहले की चारदीवारी पूरी तरह जर्जर एवं अधिकांश जगहों पर चारदीवारी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है. कार्यालय के पीछे के हिस्से में चारदीवारी गिरी हुई है. कार्यालय के एक तरफ कचहरी के रास्ते सटे साईट तरफ जुगाड़ माध्यम से मामूली तौर पर लोहे की जंजीर खड़ी की गई है. अधिकारी बताते हैं कि लंबे समय से चारदीवारी नहीं रहने से क्षेत्रीय कार्यालय में असुरक्षा की भावना बढ़ी हुई है. इसे देखने वाला कोई नहीं है.

किराए में चल रहा है सेंट्रल जीएसटी ऑफिस

सेंट्रल जीएसटी का अपना कार्यालय भवन नहीं- शहरी क्षेत्र के जुलू पार्क एनटीपीसी गेस्ट हाउस के ठीक बगल में वर्तमान समय क्षेत्रीय सेंट्रल जीएसटी कार्यालय किराये के मकान में संचालित है. इससे पहले भी दूसरे जगह पर यह कार्यालय भाड़े के घर में संचालित हो रहा था. शुरू से क्षेत्रीय सेंट्रल जीएसटी का अपना कार्यालय भवन नहीं होने से गाड़ियों की धर-पकड़ कर इसे सुरक्षित नहीं रखने में कई सवालों को जन्म दिया है. मसलन हाईवे पर धर पड़कर के बाद अधिकारी गाड़ियों को जहां-तहां असुरक्षित तरीके से खड़ा करते हैं. इस मामले में वाहन मालिकों को कई बार बड़े नुकसान का सामना करना पड़ा है. आरोप है कि अपना कार्यालय भवन नहीं होने से धर पकड़ किये गाड़ियों को सुरक्षित रखने के नाम पर अधिकारी मनमानी तरीके से काम करते हैं. बता दें कि मई 2025 की रिपोर्ट अनुसार 2023-24 की तुलना में क्षेत्रीय सेंट्रल जीएसटी हजारीबाग लगभग 44 करोड़ अधिक का बंपर राजस्व प्राप्त किया है.

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क्या कहते हैं अधिकारी

स्टेट जीएसटी के प्रभारी क्षेत्रीय आयुक्त (प्रशासन) जेएन मंडल ने कहा लंबे समय पहले की बनी चारदीवारी जर्जर एवं क्षतिग्रस्त है. नये चारदीवारी से संबंधित हजारीबाग भवन प्रमंडल कार्यपालक अभियंता को पत्र देकर प्राक्कलन की मांग की गई है. कार्यपालक अभियंता ने इस ओर अब तक कोई जवाब नहीं दिया है. उन्होंने क्षेत्रीय कार्यालय के लिए चारदीवारी होना जरूरी बताया है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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