एंबुलेंस का उपयोग मरीज ढोने के बजाय दवा और मेडिकल लॉजिस्टिक ढोने में किया जा रहा है

जानकारी नहीं, जांच की जायेगी : सीएस
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हजारीबाग. हजारीबाग जिले में एंबुलेंस का उपयोग मरीजों को ले जाने के बजाय दवा और मेडिकल लॉजिस्टिक ढोने के लिए किया जा रहा है. गुरुवार को सदर अस्पताल परिसर स्थित मेडिकल स्टोर से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चुरचू तक दवा भेजी गयी. स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के अनुसार, केवल विशेष परिस्थितियों में ही एंबुलेंस से मेडिकल लॉजिस्टिक ढोने की अनुमति होती है. इसके लिए उपायुक्त, सिविल सर्जन या स्वास्थ्य विभाग के सचिव का विशेष आदेश आवश्यक होता है, जिसमें वाहन का नंबर, अवधि और पदाधिकारी का आदेश पत्र स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए. नियमों और मानकों की अनदेखीसरकारी एसओपी में यह व्यवस्था महामारी, सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट, प्राकृतिक आपदा, दूरदराज क्षेत्रों में जहां अन्य वाहन उपलब्ध न हों, या अंग प्रत्यारोपण जैसी आपात स्थिति में ही लागू होती है. लेकिन हजारीबाग स्वास्थ्य विभाग द्वारा एंबुलेंस का नियमित रूप से दवा और सामग्री ढोने में उपयोग किया जा रहा है, जिससे नियमों और मानकों की अनदेखी हो रही है.
20,000 तक जुर्माना लगाया जा सकता हैसिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि उन्हें इस उपयोग की जानकारी नहीं थी और अब इसकी जांच की जायेगी. वहीं, जिला परिवहन पदाधिकारी बैजनाथ कामती ने स्पष्ट किया कि परिवहन विभाग वाहनों को उनके उद्देश्य के अनुसार परमिट जारी करता है. एंबुलेंस का उपयोग केवल मरीजों और मेडिकल स्टाफ को ले जाने के लिए किया जा सकता है. यदि एंबुलेंस से मेडिकल लॉजिस्टिक ढोया जा रहा है तो यह मोटरवाहन अधिनियम का उल्लंघन है और इस पर ₹20,000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है.
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