अशोक सिंह हत्याकांड : प्रभुनाथ सिंह को उम्रकैद

Published at :24 May 2017 8:07 AM (IST)
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अशोक सिंह हत्याकांड : प्रभुनाथ सिंह को उम्रकैद

हजारीबाग : हजारीबाग सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र शर्मा की अदालत ने मशरक विधायक (छपरा) अशोक सिंह हत्याकांड में मंगलवार को पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह, उनके भाई दीनानाथ सिंह और पूर्व मुखिया रितेश सिंह को उम्रकैद की सजा सुनायी. सभी पर 40-40 हजार रुपये जुर्माना भी किया. सजा वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनायी गयी. कोर्ट ने तीनों […]

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हजारीबाग : हजारीबाग सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र शर्मा की अदालत ने मशरक विधायक (छपरा) अशोक सिंह हत्याकांड में मंगलवार को पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह, उनके भाई दीनानाथ सिंह और पूर्व मुखिया रितेश सिंह को उम्रकैद की सजा सुनायी. सभी पर 40-40 हजार रुपये जुर्माना भी किया. सजा वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनायी गयी. कोर्ट ने तीनों को धारा 302 के अलावा अन्य धारा के तहत दोषी पाया है. धारा 307 के तहत 10 वर्ष और 10 हजार रुपये का जुर्माना, विस्फोटक अधिनियम के तहत 10 वर्ष की सजा और 20 हजार रुपये जुर्माना, धारा 304 के तहत तीन वर्ष की सजा सुनायी गयी है.
फैसले की जानकारी सरकारी वकील उदय प्रताप सिंह ने दी. जुर्माने की रकम अदा नहीं करने पर अभियुक्तों को छह माह और अधिक सजा काटनी होगी. सभी सजाएं साथ-साथ चलेगी. फैसले के वक्त कोर्ट परिसर में दोनों पक्ष के रिश्तेदार, समर्थक और काफी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे.
उल्लेखनीय है कि विधायक अशोक सिंह हत्याकांड में 18 मई को ही तीनों को दोषी करार दिया गया था. वहीं प्रभुनाथ के भाई और विधायक केदार सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था.
क्या है मामला
तीन जुलाई 1995 को मशरक विधायक अशोक सिंह पटना आवास पर चुनाव जीतने के बाद अपने समर्थकों के साथ बैठे थे. इस दौरान अपराधियों ने उन पर बम से हमला कर दिया था. इसमें विधायक गंभीर रूप से घायल हो गये थे. उन्हें इलाज के लिए पीएमसीएच ले जाया गया. जहां उनकी मौत हो गयी थी. विधायक अशोक सिंह की पत्नी चांदनी सिंह ने गर्दनीबाग थाना (पटना) में प्रभुनाथ सिंह, उनके भाई दीनानाथ सिंह, विधायक केदार सिंह तथा पूर्व मुखिया रितेश सिंह के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी थी.
हजारीबाग कोर्ट में वर्ष 1997 में मामला आया
मशरक विधायक अशोक सिंह की हत्या तीन जुलाई 1995 को पटना में उनके आवास पर हुई थी. उस समय प्रभुनाथ सिंह के खिलाफ कई मामले चल रहे थे. एक अन्य मामले में गिरफ्तारी के बाद प्रभुनाथ सिंह को हजारीबाग केंद्रीय कारा में लाकर रखा गया. तत्कालीन बिहार सरकार ने हजारीबाग जेल में प्रभुनाथ सिंह को रखकर सभी मुकदमों का स्थानांतरण हजारीबाग कोर्ट में कर दिया था. इसी बीच मशरक विधायक अशोक सिंह का मामला पटना कोर्ट में शुरू हुआ. प्रभुनाथ सिंह ने हाइकोर्ट के जज गौरीशंकर चौबे के कोर्ट में आवेदन दिया था कि हजारीबाग जेल में बंद रहने के कारण पटना कोर्ट में चल रहा मुकदमा प्रभावित हो रहा है.
कोर्ट ने इस आवेदन को स्वीकार कर विधायक अशोक सिंह हत्याकांड का मामला पटना कोर्ट से हजारीबाग कोर्ट स्थानांतरण कर दिया. हजारीबाग कोर्ट में यह मामला 1997 में आया. वर्ष 2008 में आरोप गठित किया गया. 22 गवाह अभियोजन पक्ष में पेश हुए. विभिन्न कोर्ट में मुकदमा स्थानांतरण और लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण 22 वर्ष बाद इस मामले में फैसला आया.
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