प्रभुनाथ सिंह के समर्थकों में मायूसी, भेजे गये जेल

Published at :19 May 2017 9:05 AM (IST)
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प्रभुनाथ सिंह के समर्थकों में मायूसी, भेजे गये जेल

हजारीबाग : मशरक (बिहार) के विधायक अशोक सिंह की हत्या के मामले में 22 साल बाद गुरुवार को जैसे ही फैसला आया. पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के समर्थकों में मायूसी छा गयी. व्यवहार न्यायालय एडीजे-नौ, हजारीबाग के न्यायाधीश सुरेंद्र शर्मा ने पूर्व फैसले में संसाद प्रभुनाथ सिंह, दीनानाथ सिंह व रीतेश सिंह को हत्या का […]

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हजारीबाग : मशरक (बिहार) के विधायक अशोक सिंह की हत्या के मामले में 22 साल बाद गुरुवार को जैसे ही फैसला आया. पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के समर्थकों में मायूसी छा गयी. व्यवहार न्यायालय एडीजे-नौ, हजारीबाग के न्यायाधीश सुरेंद्र शर्मा ने पूर्व फैसले में संसाद प्रभुनाथ सिंह, दीनानाथ सिंह व रीतेश सिंह को हत्या का दोषी करार दिया. सजा की बिंदु पर 23 मई को फैसला आयेगा. कोर्ट ने वहीं एक नामजद आरोपी बनियापुर के राजद विधायक केदार सिंह को बरी कर दिया. इस मामले में 22 लोगों की गवाही हुई. कोर्ट का फैसला आते ही अचानक कोर्ट परिसर में लोगों की भीड़ लग गयी.
ज्ञात हो कि अशोक सिंह हत्याकांड को लेकर पटना के गर्दनीबाग थाना में 339-95 के तहत मामला दर्ज हुआ था. इसमें प्रभुनाथ सिंह, उनके दो भाई केदार सिंह व दीनानाथ सिंह समेत एक पूर्व मुखिया रीतेश सिंह को नामजद आरोपी बनाया गया था. पटना न्यायालय में मामले की सुनवाई प्रारंभ हुई थी. लगभग दो साल तक पटना न्यायालय में यह मामला चला.
1997 में शुरू हुई हजारीबाग कोर्ट में सुनवाई: प्रभुनाथ सिंह के हजारीबाग जेल में बंद रहने के कारण अशोक सिंह हत्याकांड मामले की सुनवाई हजारीबाग न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग उठी थी. उच्च न्यायालय के आदेश के बाद पटना कोर्ट से यह मामला हजारीबाग कोर्ट में स्थानांतरित हुआ था. वर्ष 1997 में हजारीबाग न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू हुई थी. विधायक अशोक सिंह के भाई तारकेश्वर सिंह ने विभिन्न न्यायालयों में मामले की सुनवाई स्थानांतरित करने को लेकर समय-समय पर आवेदन दिया था. न्यायाधीश जीके सिंह व आरएस शुक्ला के कोर्ट से मामले को स्थानांतरण करवाया गया.
सुनवाई के दौरान कई माह तक कोर्ट खाली रखने के कारण मामले की सुनवाई की तिथि बढ़ती रही. इस बीच इस मामले में अभियोजन पक्ष से 22 गवाहों का न्यायालय में बयान दर्ज कराया गया. 2008 में केस चार्जफ्रेम होने के बाद कानूनी प्रक्रिया चलती रही. आखिरकार 18 मई 2017 को 22 वर्ष बाद फैसला सुनाया गया.
पत्नी ने दर्ज करायी थी प्राथमिकी: बिहार विधानसभा चुनाव-1995 में मशरक विधानसभा सीट से अशोक सिंह राजद के टिकट से विधायक बने थे.
उन्होंने बिहार पीपुल्स पार्टी के उम्मीदवार प्रभुनाथ सिंह को उस वक्त हराया था. विधायक बनने के बाद अशोक सिंह पटना स्थित अपने आवास पर तीन जुलाई-1995 को समर्थकों के साथ बैठे थे. उसी समय विधायक पर बम से हमला हुआ था. हमले में विधायक गंभीर रूप से घायल हो गये थे. उसके बाद उनकी मौत पीएमसीएच में इलाज के दौरान हो गयी थी. विधायक की पत्नी चांदनी सिंह ने पटना गर्दनीबाग थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी.
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