हर वर्ष हो रहा है 20 लाख रुपये किराये का भुगतान
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 May 2017 8:22 AM (IST)
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हजारीबाग : जिले के 182 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कार्य विभागीय देखरेख के अभाव में अधूरा पड़ा हुआ है. इन योजनाओं पर सरकार का 1600 लाख रुपया खर्च होना है, लेकिन योजना समय पर पूरा नहीं हो पाया. जनता को इसका लाभ नहीं मिल पाया. यह कार्य हजारीबाग ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल की ओर से […]
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हजारीबाग : जिले के 182 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कार्य विभागीय देखरेख के अभाव में अधूरा पड़ा हुआ है. इन योजनाओं पर सरकार का 1600 लाख रुपया खर्च होना है, लेकिन योजना समय पर पूरा नहीं हो पाया. जनता को इसका लाभ नहीं मिल पाया. यह कार्य हजारीबाग ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल की ओर से होना है. आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण का समय छह माह निर्धारित है, लेकिन सात साल में भी यह कार्य पूरा नहीं हो सका. आंगनबाड़ी केंद्र का अपना भवन नहीं होने के कारण सेविका बच्चों को निजी कमरे व किराये के कमरे में पढ़ा रही हैं. इधर, इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी जहां निर्माण कार्य लंबित है, वहीं सरकार को भवन के नहीं करने के कारण किराये के मकान में आंगनबाड़ी केंद्र चलाना पड़ रहा है. सरकार किराये के रूप में प्रतिवर्ष 20 लाख रुपये खर्च कर रही है.
जमीन विवाद बड़ा कारण: हजारीबाग ग्रामीण विकास प्रमंडल को वित्तीय वर्ष 2012-13 में 94 आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण की मंजूरी मिली. इस पर 5.81 करोड़ रुपया खर्च होना था. योजना में मात्र 58 आंगनबाड़ी केंद्रों का काम ही पूरा हो पाया. वित्तीय वर्ष 2013-14 में विशेष प्रमंडल को 94 आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण करने के लिए फिर मंजूरी दी गयी. इसमें मात्र 63 केंद्र ही बने. वित्तीय वर्ष 2014-15 में 141 आंगनबाड़ी केंद्र बनाने की अनुमति दी गयी. इन आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 8.71 करोड़ की राशि उपलब्ध करायी गयी. इसमें मात्र 26 आंगनबाड़ी केंद्र पूरा हो पाया.
सूचना अधिकार अधिनियम-2005 के तहत ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल हजारीबाग के पत्रांक-891 के अनुसार 30 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र भूमि विवाद के कारण लंबित है. कई योजनाओं का एकरारनामा नहीं हो पाया और भवन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया.
क्षमता से अधिक जिम्मेवारी: हजारीबाग ग्रामीण विकास प्रमंडल में छह कनीय अभियंता कार्यरत हैं.
एक कनीय अभियंता पर क्षमता से अधिक निर्माण कार्य की जिम्मेवारी दी जाती है. उनका कार्य क्षेत्र बड़ा हो जाता है. वह पूरे कार्य की देखरेख सही तरीके से नहीं कर पाता है. वह सिर्फ एमबी बुक करने तक ही सिमट कर रह जाता है. निर्माण कार्य में बुनियाद से लेकर कमरा पूरा होने तक वह जांच पड़ताल नहीं कर पाता है. ऐसी स्थिति में गुणवत्ता पर भी सवाल उठते रहे हैं.
अपना भवन नहीं रहने से परेशानियां: आंगनबाड़ी केंद्र का अपना भवन नहीं होने से कई परेशानियों का सामना सेविकाओं व सहायिकाओं को करना पड़ता है. इनमें खाते का संधारण, खाने-पीने के समान रखने समेत अन्य जरूरी सामान, बच्चों की पढ़ाई, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं हो पा रही है.
1770 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित
जिले में 1770 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं. इनमें करीब 700 आंगनबाड़ी केंद्र के पास अपना भवन नहीं है.केंद्र किराये के मकान व छोटे कमरे में संचालित हो रहा है. सरकार किराये के मकान पर चल रहे इन आंगनबाड़ी केंद्रों के किराये का भुगतान कर रही है. ग्रामीण क्षेत्र में किराये के आंगनबाड़ी केंद्र 200 रुपये में और शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्र के लिए 750 रुपये का भुगतान किया जाता है. इस वर्ष आंगनबाड़ी केंद्रों के किराये में बढ़ोतरी करने का भी सरकार ने निर्णय लिया है. इसके अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में आंगनबाड़ी का किराया 900 से 3000 रुपये तक बढ़ सकता है.
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