विवि की परेशानियां दूर करना प्राथमिकता

Published at :08 May 2017 9:01 AM (IST)
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विवि की परेशानियां दूर करना प्राथमिकता

विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के नये कुलपति डॉ रमेश शरण ने कहा कि खुले विचार के साथ कुलपति का पद ग्रहण करूंगा. किसी धारणा, प्राथमिकता, एजेंडा को मन मस्तिष्क में ले जाने के बजाय विश्वविद्यालय के वर्तमान परिस्थितियों को प्राथमिकता देकर कार्य करूंगा. सभी के विचारों व विश्वविद्यालय के साथ लंबे समय से जुड़े लोगों […]

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विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के नये कुलपति डॉ रमेश शरण ने कहा कि खुले विचार के साथ कुलपति का पद ग्रहण करूंगा. किसी धारणा, प्राथमिकता, एजेंडा को मन मस्तिष्क में ले जाने के बजाय विश्वविद्यालय के वर्तमान परिस्थितियों को प्राथमिकता देकर कार्य करूंगा. सभी के विचारों व विश्वविद्यालय के साथ लंबे समय से जुड़े लोगों के अनुभव को लेकर काम होगा. डॉ शरण प्रभात खबर के संवाददाता से बातचीत कर रहे थे. प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश:

हजारीबाग : सवाल: विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में आपकी चुनौतियां ?

जवाब: विश्वविद्यालय व कॉलेजों में शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मी व आधारभूत संरचना की भारी कमी है. विशेष कर कॉलेज में आधुनिक प्रयोगशाला व पुस्तकालय नहीं है. शिक्षकेत्तर कर्मी सूचना तकनीक के जानकार व प्रशिक्षित नहीं हैं. इन परेशानियों को दूर करना प्राथमिकता होगी. विश्वविद्यालय ऑटोनोमस से हर लोगों की उम्मीदें बढ़ी होती है. नौकरशाह, यूनियन का भी दबाव होता है. नयी परिस्थिति में कार्यों को बेहतर करना मुख्य चुनौती होगी.

सवाल: विश्वविद्यालय संचालन में वित्तीय अनुशासन का कितना महत्व है ?

जवाब: विश्वविद्यालय कम खर्च पर अधिक काम करें. किसी भी कार्य में विलंब नहीं हो. वित्तीय कार्य में पूरी तरह पारदर्शी हो. ईमानदार हैं, तो लोगों को ईमानदारी दिखनी भी चाहिए.

सवाल: पूर्वी भारत के सबसे पुराने संत कोलंबा कॉलेज को ऑटोनोमस बनायेंगे ?

जवाब: संत कोलंबा कॉलेज काफी बेहतर, पुराना और ऐतिहासिक कॉलेज है. पिछले दिनों कॉलेज को नैक से बेहतर ग्रेडिंग मिलने की भी जानकारी है, लेकिन वहां शिक्षकों की भारी कमी है. कुलपति के रूप में संत कोलंबा कॉलेज के विकास के लिए जानकारी लेकर काम करूंगा.

सवाल: छात्र संगठन को विश्वविद्यालय हित में कितना मानते हैं?

जवाब: मेरा मानना है कि छात्र संगठन का चुनाव हर साल होना चाहिए. यही विद्यार्थी भविष्य के नेता होते हैं. हर साल चुनाव होने से नये चेहरे आयेंगे. छात्र संगठन की भूमिका को लेकर इन्हें प्रशिक्षण व जागरूक करने की जरूरत है. छोटी-छोटी बातों से ऊपर उठ कर विश्वविद्यालय के विकास के बारे में संगठन के सोच को बनाना है.

सवाल: शिक्षकों की समस्याओं का समाधान कैसे करेंगे ?

जवाब: मैं भी शिक्षक वर्ग से कुलपति पद पर आया हूं. मुझे प्रोन्नति मिलने में 22 वर्ष लगे. शिक्षकों के हर दर्द को जानता हूं. शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास होगा.

सवाल: नये कुलपति के टीम में शामिल होने के लिए लॉबिंग व खेमेबाजी को किस रूप में लेंगे ?

जवाब: शिक्षक के रूप में कई कुलपतियों के कार्यकाल को नजदीक से देखा हूं. नकारात्मक चीजों को नजर अंदाज कर सकारात्मक बातों व सोच को साथ करूंगा. क्षेत्र जात, धर्म के नाम पर घेराबंदी व लॉबिंग का पक्षधर नहीं हूं.

सवाल: विनोबा भावे विश्वविद्यालय के बारे में क्या सोच है ?

जवाब: विश्वविद्यालय व चतरा, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, धनबाद के कॉलेजों में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होता रहा हूं. डॉ अलीमान खान जैसे कई प्राचार्य हर कार्यक्रम में आमंत्रित करते थे.

पूरे विश्वविद्यालय की गतिविधियों से वाकिब हूं. हमारे कई छात्र भी विश्वविद्यालय के बारे में जानकारी समय-समय पर देते रहे हैं. हाल के दिनों में विश्वविद्यालय में स्वच्छता व अच्छे प्रबंधन को देखा हूं. अब विश्वविद्यालय में जाकर ही नये निर्णय लूंगा.

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