मर रही हैं मछलियां
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Feb 2017 9:04 AM (IST)
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हजारीबाग : हजारीबाग झील के एक भाग का पानी दूषित हो चुका है. स्थिति यह है कि उसमें पाली जा रही मछलियां भी मर गयी हैं. झील में शहर के नाले का गंदा पानी जाने से पानी जहरीला हो गया है. होटलों के गले अनाज व गंद्गी नाली में डालने से बन रहे सड़ांध व […]
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हजारीबाग : हजारीबाग झील के एक भाग का पानी दूषित हो चुका है. स्थिति यह है कि उसमें पाली जा रही मछलियां भी मर गयी हैं. झील में शहर के नाले का गंदा पानी जाने से पानी जहरीला हो गया है.
होटलों के गले अनाज व गंद्गी नाली में डालने से बन रहे सड़ांध व शौचालयों की गंदगी भी नाले के माध्यम से झील में जाने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है. इस झील के आसपास कई अधिकारियों के सरकारी आवास भी हैं, लेकिन झील को साफ करने के मामले में कभी गंभीरता नहीं बरती गयी.
सेहत के लिए नुकसानदायक: सुबह स्वास्थ्य लाभ लेने पहुंचने वाले सैकड़ों लोगों की सेहत के लिए झील का जहरीला बन चुका जल काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है. झील में मरी मछलियों को लोग खाने के लिए भी ले जा रहे हैं. जहरीले पानी से मरी मछलियों के खाने से लोग बीमार भी पड़ सकते हैं. इन मरी हुई मछलियों को खाने के लिए ले जानेवाले लोगों पर कोई रोकटोक नहीं है. मत्स्य विभाग की ओर से भी किसी तरह के कदम नहीं उठाये गये हैं.
झील के पास फेंका जा रहा है कचरा: झील के पास सड़क के दूसरी ओर खाली सरकारी स्थान पर शहर का कचरा भी फेंका जा रहा है. इन कचरों से भी दुर्गंध आती है. यह सुबह स्वास्थ्य लाभ करने के लिए पहुंचनेवाले लोगों को नुकसान पहुंचा सकता है. इतना ही नहीं, उन कचरों में आग लगाकर जलाया भी जाता है. इससे सुबह टहलनेवाले लोगों को परेशानी होती है.
टहलने व व्यायाम करनेवाले परेशान: सुबह झील के किनारे टहलने पहुंचे द्वारिका प्रसाद (65) बताते हैं कि झील के एक भाग के पानी से बदबू आती है. वहीं सड़क के किनारे ही कचरे में आग लगा दी जाती है. सुबह टहलने के समय धुआं से खांसी होना शुरू हो जाता है. द्वारिका प्रसाद बताते हैं कि उन्हें अस्थमा की बीमारी है. ऐसी स्थिति में उन्हें परेशानी होती है. पुलिस में भरती को लेकर दौड़ने का प्रैक्टिस कर रहे युवक इंद्रपाल, हरिमोहन व अवधेश ने बताया कि हमलोग दौड़ने के साथ ही यहां व्यायाम भी करते हैं. दौड़ने के समय कचरे के धुआं से परेशानी होती है.
क्या कहते हैं अधिकारी
जिला मत्स्य पदाधिकारी शंभु प्रसाद यादव ने बताया कि शहर के नाले का पानी आने से झील का पानी खराब हुआ. इसके कारण पानी में अॉक्सीजन की कमी हुई और मछलियां मरी हैं. पानी में चूना और पोटैशियम परमैगनेट डाला गया है. इससे अॉक्सीजन की कमी दूर हो गयी है. अब मछलियों के मरने का सिलसिला थमा है.
गंदा पानी से चर्मरोग का खतरा: चिकित्सक
फिजिशियन डॉक्टर निशींद्र किंजल्क ने बताया कि गंदा पानी से चर्म रोग फैलता है. संक्रमण फैलने का डर रहता है. टहलने व दौड़ने के समय लोग लंबी सांसे लेते हैं. उस समय धुआं अधिक नुकसान पहुंचाता है. धुआं से दमावाले लोगों की परेशानी बढ़ जाती है
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