ईरान में तख्तापलट का डर! राष्ट्रपति-स्पीकर ने अराघची को हटाने की ठानी, क्या IRGC चला रही सरकार?

Published by :Govind Jee
Published at :01 May 2026 10:15 AM (IST)
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Iran political crisis ghalibaf president wants to dismiss fm araghchi

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची.

Iran Political Crisis: ईरान की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त उथल-पुथल मची है. लंदन स्थित 'ईरान इंटरनेशनल' की एक खास रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ अपने ही विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बेहद नाराज हैं. खबर है कि ये दोनों नेता अराघची को उनके पद से हटाने की तैयारी कर रहे हैं. इन नेताओं का मानना है कि अराघची सरकार की नीतियों पर चलने के बजाय 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स' (IRGC) के कमांडर अहमद वाहिदी के 'असिस्टेंट' की तरह काम कर रहे हैं.

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Iran Political Crisis: ईरान इंटरनेशनल के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में अराघची ने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को भरोसे में लिए बिना कई बड़े फैसले किए हैं. वे सीधे तौर पर IRGC कमांडर अहमद वाहिदी के निर्देशों पर काम कर रहे हैं. इस बात से राष्ट्रपति इतने खफा हैं कि उन्होंने अपने करीबी लोगों से कह दिया है कि अगर अराघची का यही रवैया रहा, तो वे उन्हें जल्द ही बर्खास्त कर देंगे.

परमाणु वार्ता में बढ़ी रार

ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में भी अंदरूनी कलह सामने आई है. ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट बताती है कि 12 अप्रैल, शनिवार को ईरानी डेलीगेशन को बातचीत बीच में ही छोड़नी पड़ी थी. इसका कारण यह था कि शुक्रवार की मीटिंग में अराघची ने हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को मिलने वाली सैन्य और आर्थिक मदद कम करने के संकेत दिए थे. अराघची के इस लचीले रुख पर सुरक्षा परिषद के सचिव और पूर्व IRGC कमांडर मोहम्मद बागेर जोल्गाद्र ने कड़ी आपत्ति जताई थी, जिससे टीम के अंदर मतभेद गहरे हो गए.

अमेरिका का तंज: अपनी मर्जी से डील नहीं कर सकता ईरान

इस विवाद पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ‘फॉक्स न्यूज’ से बातचीत में कहा कि अमेरिकी डेलीगेशन ने महसूस किया कि ईरानी टीम अपनी मर्जी से कोई समझौता नहीं कर सकती. उन्हें हर छोटे-बड़े फैसले के लिए तेहरान से ‘सुप्रीम लीडर’ या किसी और बड़े अधिकारी की मंजूरी लेनी पड़ती है. इधर, 28 मार्च की एक पुरानी रिपोर्ट में भी राष्ट्रपति पेजेश्कियान और कमांडर वाहिदी के बीच युद्ध और गिरती इकोनॉमी को लेकर गंभीर विवाद की बात सामने आई थी.

राष्ट्रपति पेजेश्कियान खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं

ईरान इंटरनेशनल की 31 मार्च की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं. उन्हें जंग में मारे गए सरकारी अधिकारियों की जगह नई नियुक्तियां करने तक की आजादी नहीं दी जा रही है. कमांडर वाहिदी ने साफ कह दिया है कि युद्ध के हालात को देखते हुए सभी महत्वपूर्ण और संवेदनशील पदों पर नियुक्तियां सीधे रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा ही की जाएंगी.

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गालिबाफ ने बातचीत की टीम से इस्तीफा दे दिया था

संसद में भी फूट साफ दिख रही है. 27 अप्रैल को 261 सांसदों ने गालिबाफ की टीम का समर्थन किया, लेकिन सईद जलीली गुट के कट्टरपंथी सांसदों ने इस पर दस्तखत नहीं किए. इससे पहले खबर आई थी कि न्यूक्लियर एनर्जी के मुद्दे पर फटकार पड़ने के बाद गालिबाफ ने बातचीत की टीम से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद अराघची ने कमान संभालने की कोशिश की और 24 अप्रैल को अकेले इस्लामाबाद जाकर प्रस्ताव सौंपा, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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