टूटी झोंपड़ियों में गुजारा कर रहे हैं मल्हार परिवार

बड़कागांव : एक ओर जहां राज्य सरकार दो वर्ष की उपलिब्ध पर विकास पर्व मना रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों का हाल अभी भी बेहाल है. इनकी स्थिति सरकार की विकास के दावे की पोल खोल रही है. प्रखंड के सांढ़ पंचायत के होरम गांव में दो मल्हार परिवार झोपड़ी बनाकर […]
बड़कागांव : एक ओर जहां राज्य सरकार दो वर्ष की उपलिब्ध पर विकास पर्व मना रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों का हाल अभी भी बेहाल है. इनकी स्थिति सरकार की विकास के दावे की पोल खोल रही है.
प्रखंड के सांढ़ पंचायत के होरम गांव में दो मल्हार परिवार झोपड़ी बनाकर किसी तरह गुजारा कर रहे हैं. अपनी कला के बदौलत मल्हार परिवार का किसी तरह भरण पोषण हो रहा है, लेकिन कलाकृतियों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जिससे यह परिवार भुखमरी की जिंदगी गुजार रहा है. पायला, कटोरा व अन्य वस्तुओं को तैयार कर मल्हार परिवार गांव में बेचते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण फिलहाल यह परिवार कच्चा माल तक नहीं खरीद पा रहा है.
गुजारा करना हो गया है मुश्किल : महावीर मल्हार व अनिल मल्हार का परिवार झोपड़ियों में रह कर किसी तरह अपना गुजारा कर रहा है. इसी तरह यहां कुल दस परिवार झोपड़ी बनाकर तीन वर्षों से रह रहा है. अनिल मल्हार, छोटू मल्हार, कविता देवी, कोशिला देवी, सहदेव मल्हार, शिवदेव मल्हार, सीता कुमारी, सांवली कुमारी, सलोनी कुमारी के साथ वृद्ध महिला मसोमात मूर्ति भी साथ रहती है. इनके लिए समाजसेवी उमेश दांगी ने जविप्र से 32 किलो अनाज की व्यवस्था की. हालांकि मात्र आठ दिन ही यह अनाज इनके पास चलता है. बाकी समय खाने के लाले पड़ जाते हैं.
किसी ने नहीं ली सुधि: मल्हार परिवार द्वारा बनाये गये समानों की अब गांव में कम ही बिक्री होती है. अल्मुनियम व कांसा पीतल का पायला, सोरही, कटोरा ये तैयार करते हैं. दो परिवार बचरा से आकर यहां बसा है. इतने दिन बीत जाने के बाद भी कोई भी जनप्रतिनिधि इनकी सुधि लेने नहीं पहुंचे हैं. फिलहाल ठंड से पूरा परिवार
ठिठुर रहा है.जगह-जगह गरीबों के बीच गर्म कपड़ों का वितरण हो रहा है, लेकिन इनकी ओर किसी का भी नजर नहीं है.
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